शिवाकांत अवस्थी
बछरावां/रायबरेली: कहने को तो हमारे चुने हुए जनप्रतिनिधि सरकार चलाते हैं परंतु सत्यता यह है कि, भारतवर्ष के लोकतंत्र की बागडोर नौकरशाही के हाथों में है। वह जैसी सलाह दे देता है, वैसा ही सरकार कर गुजरती है। नतीजा यह होता है कि, अरबों खरबों रुपया पानी में चला जाता है, जिसका ज्वलंत उदाहरण स्थानीय विकासखंड के बन्नावा ग्राम सभा व जीगो ग्राम सभा में देखा जा सकता है। जहां पूर्ववर्ती सरकारों द्वारा किसानों के नाम पर जगह-जगह हाट बाजार बनाए गए और दलील यह दी गई कि, किसान अपना आनाज लेकर इन बाजारों में आएगा और बाहर से आने वाले व्यापारी यहीं से खरीदारी करेंगे।
आपको बता दें कि, रायबरेली जनपद के बन्नावा गांव में करोड़ों रुपए की लागत से एक स्टोर बनाया गया, और उसके पीछे ऊंचाई पर मंडी हाट का निर्माण किया गया। निर्माण तो हो गया और ठेकेदार द्वारा अपना भुगतान भी ले लिया गया। परंतु सरकार द्वारा इस केंद्र पर कभी कोई कर्मचारी ही तैनात नहीं किया गया, और अगर तैनात भी किया गया होगा, तो उसकी जनता को जानकारी नहीं है। एक भी दिन किसानों की उपज उक्त मंडी स्थल पर नहीं पहुंच पाई और बीते समय के साथ मंडी स्थल केवल जानवर चराने वालों की आराम गाह बनकर रह गया।
आपको यह भी बता दें कि, यहां बना स्टोर भी क्षतिग्रस्त हो गया, तथा गिरने की कगार पर पहुंच चुका है। यही हालत जीगों ग्राम सभा में भी हुआ, यहां मंडी स्थल का निर्माण किया गया, कई दर्जन दुकानें बनवाई गई, यह दुकाने कुछ लोगों को आवंटित भी की गई। परंतु कभी किसी ने भी यहां दुकान नहीं खोली, कुछ लोग इन दुकानों में भूसा भरे हुए हैं। तो बड़ी तादाद में महिलाएं इसके परिसर में कंडे पाथने का काम कर रही हैं।
शिवगढ़ में भी इसी तरह की मंडी का निर्माण किया गया था जो आज मिटने की कगार पर है। अगर ईमानदारी से जांच की जाए, तो पूरे विकासखंड के अंदर इस तरह के कई कारनामे पूर्ववर्ती सरकारों के देखने को मिलेंगे। जिनमें जनता की गाढ़ी कमाई का अरबों खरबों रुपया बर्बाद हो चुका है।

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