भाजपा कार्यसमिति की बैठक चुनावी समीक्षा बैठक में हुई थी तब्दील, खूब चला आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला।। Raebareli news ।।

सार..............

●जोरदार हंगामे के साथ संपन्न हुई भाजपा की समीक्षा बैठक में अपने ही दल के नेताओं ने जड़े थे एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप, खूब हुई थी किरकिरी।

●इस ऊहापोह की स्थिति में 2022 के आम चुनाव में भाजपा कैसे भेदेगी कांग्रेस का किला।

●कैसे पूरा होगा एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह द्वारा कथित भाजपा को 6 विधानसभा सीटें जिताने का सपना।

विस्तार.............

शिवाकांत अवस्थी

रायबरेली: विगत बृहस्पतिवार को शहर के सिविल लाइन स्थित सूर्या होटल में आयोजित भाजपा जिला कार्यसमिति की बैठक त्रिस्तरीय पंचायती चुनाव की समीक्षा बैठक में तब्दील हो गई थी। बैठक में जमकर हंगामा बरपा था। आरोप-प्रत्यारोपों का दौर चला, तो हंगामा हो गया था। हंगामा व शोरगुल को बढ़ता देख हालत को नियंत्रित करने के लिए बैठक के मुख्य अतिथि प्रदेश महामंत्री विद्यासागर सोनकर को हस्तक्षेप करने के लिए माइक अपने हाथ में लेना पड़ा था। कार्यकर्ता बेहद आक्रोश में दिखे। किसी तरह से स्थिति को संभाला गया। लेकिन इस दौरान जिले के 2 बड़े दिग्गजों ने एक दूसरे की पोल खोलने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी।

   आपको बता दें कि, भाजपा के जिलाध्यक्ष रामदेव पाल द्वारा पार्टी के आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा तय करने के लिए जिला कार्यसमिति की बैठक बुलाई गई थी, जिसमें भाजपा के लगभग लगभग सारे महत्वपूर्ण कार्यकर्ता व नेता मौजूद रहे। कार्यक्रम के उद्घाटन के फौरन बाद जब पूर्व एमएलसी एवं शिवगढ़ रियासत के राजा राकेश प्रताप सिंह सदस्य राष्ट्रीय परिषद ने मुख्य अतिथि की अनुमति लेकर बैठक में कुछ प्रश्न उठाने की इजाजत मांगी। सभी की ओर से इजाजत दिए जाने के बाद राजा राकेश प्रताप सिंह ने जनपद के कार्यकर्ताओं और संगठन से जुड़े पदाधिकारियों की दुखती नस पर हाथ रख दिया।

    उन्होंने कहा कि, विगत जिला पंचायत सदस्य और क्षेत्र पंचायत प्रमुखों के चुनाव में पार्टी के कुछ लोगों ने पार्टी की ही ऐसी तैसी करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। इससे क्या? पार्टी मजबूत होगी? उन्होंने इशारों इशारों में पार्टी के वर्तमान एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह जो कांग्रेस छोड़कर दो साल पहले भाजपा में शामिल हुए थे, उन पर आरोप जड़ दिया कि, जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में पूरे जिले में एक ओर जहां भाजपा ने अपने प्रत्याशी घोषित कर खड़े किए थे, उनके मुकाबले अधिकांश स्थानों पर जो प्रत्याशी उतारे गए, उन्होंने भी भाजपा का बैनर और झंडे का इस्तेमाल किया। हालांकि खड़े किए गए अधिकांश प्रत्याशी चुनाव हार गए। उनकी जबानते जप्त हो गई। किंतु इन प्रत्याशियों के खड़ा करने से भाजपा के ओरिजिनल कैंडिडेटों को बहुत बड़ा नुकसान झेलना पड़ा। कई स्थानों पर भितरघात कराई गई। जिससे भाजपा के तमाम प्रत्याशी महज कुछ मतों से हार गए।

  राजा राकेश प्रताप सिंह ने नाटकीय अंदाज में कहा कि, जो जीतकर भाजपाई आए हैं, उनको तो वह बधाई देते हैं, परंतु नेता विशेष द्वारा भाजपा के बैनर लगाकर लड़ाई गए प्रत्याशियों की वजह से जो भाजपा के प्रत्याशी हारे हैं। उन्हें वह श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। इससे पूरी बैठक में सन्नाटा छा गया। साथ ही राजा राकेश प्रताप सिंह ने ब्लाक प्रमुखी के चुनाव का भी जिक्र करते हुए कहा कि, कई स्थानों पर पार्टी में शामिल एक नेता के इशारे पर पार्टी घोषित कैंडिडेटों के खिलाफ उम्मीदवार लड़ाए गए। उनमें से शिवगढ़ का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि, क्षेत्र के चर्चित कुख्यात अपराधी को एक नेता विशेष ने सपोर्ट देकर उनके बेटे कुंवर हनुमंत सिंह के खिलाफ प्रत्याशी उतार दिया। यही नहीं मतदान के दिन से पहले कथित नेता के बड़े भाई डेरा डालकर शिवगढ़ में पड़े रहे, और वोटरों को धमकाने तथा लालच देने का काम किया। हालांकि वोटरों के सराहनीय योगदान के चलते कुंवर हनुमंत सिंह बराबर मत पाकर लॉटरी सिस्टम से चुनाव जीत गए। लेकिन शिवगढ़ में ऐसा गंदा माहौल इतिहास में नहीं देखा गया। उनकी मांग थी कि पार्टी इन विषयों पर जांच कराकर ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति ना हो कठोर कार्यवाही की मांग की।

  जैसे ही श्री सिंह का कथन पूर्ण हुआ तत्काल विधायक राजाराम त्यागी खड़े हो गए। श्री त्यागी ने भी उसी नेता की ओर इशारा करते हुए आरोप लगाया कि, जिला पंचायत सदस्य के चुनाव के दौरान पहले तो इस नेता ने अपने ड्राइवर को टिकट दिला दिया, और इस नेता ने प्रदेश नेतृत्व को गुमराह कर उनका टिकट कटवा कर अपने ड्राइवर को टिकट दिलवा दिया। लेकिन क्षेत्रीय विधायक राम नरेश रावत व पूर्व एमएलसी राजा राकेश प्रताप सिंह के हस्तक्षेप के बाद उन्हें दोबारा टिकट दिया गया। किंतु फिर भी यह नेता नहीं माना और उसने अपने ड्राइवर को न केवल मैदान में उतारा, बल्कि झंडा, पोस्टर, बिल्ला भाजपा के लगवा कर उनका जमकर विरोध कराया। उन्होंने पार्टी में शिकायत की, तो महज एक छोटे कार्यकर्ता मातादीन पासी को तो पार्टी ने बाहर का रास्ता दिखा दिया, किंतु चर्चित इस बड़े नेता और उनके गुर्गों पर कोई कार्यवाही क्यों नहीं हुई।

   मीटिंग में यह बातें चलती रही तभी आक्रोश से भरे एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह ने माइक अपने हाथ में ले लिया, और मुख्य अतिथि विद्यासागर सोनकर की ओर मुखातिब होते हुए कहा कि, इन सभी विषयों पर चर्चा इस तरह खुलेआम नहीं की जाती है। इसके लिए अलग से बैठक बुलानी चाहिए, तभी हाल में मौजूद कार्यकर्ताओं ने हो हल्ला करना शुरू कर दिया। कई बार दूसरे नेताओं पर जब एमएलसी ने उंगली उठाई, तो मौजूद कार्यकर्ताओं ने ही उनका विरोध किया। बैठक में मौजूद वरिष्ठ नेता कौशल किशोर श्रीवास्तव ने व्यवस्था का प्रश्न उठाते हुए एमएलसी दिनेश सिंह पर अनेक आरोप जड़ दिए। उनके समर्थन में भाजपा के पूर्व नगर अध्यक्ष संतोष पांडेय ने भी तगड़े आरोप लगाए, माहौल तनावपूर्ण हो गया, तो मुख्य अतिथि विद्यासागर सोनकर ने माइक अपने हाथ में ले लिया और शोर-शराबा मचा रहे नेताओं को जमकर आड़े हाथों लिया, तथा कहा कि, पार्टी में इस तरह की बातें! इस तरह का व्यवहार! इस तरह के आरोप प्रत्यारोप बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। आज जो जो बातें सामने आई हैं, उनको वह संगठन के शीर्ष स्तर पर पहुंचा कर रायबरेली में भाजपा की मजबूती के लिए कड़े कदम उठाने की अनुशंसा करेंगे।

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 पूरे घटनाक्रम में जब राजा राकेश प्रताप सिंह बोल रहे थे, तो कार्यकर्ता जमकर ताली बजाते हुए उनका समर्थन कर रहे थे। वहीं दूसरे नेता के बोलने के दौरान लगातार हूटिंग तथा विरोध जताते रहे। अब देखना यह है कि, विधानसभा के आम चुनाव 2022 में होने को है। इसके लिए भाजपा संगठन एकजुटता का परिचय देता है, या फिर इसी तरीके से गुटबाजी में बांट कर पूरे जिले की जनता को एक दूसरा संदेश देकर आगामी चुनाव में पार्टी का बंटाधार करता है। यह यक्ष प्रश्न है! इसका उत्तर तो भविष्य में मिलेगा?

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