सार......
⭕10 मई 1857 के प्रथम स्वाधीनता संग्राम की स्मृति में भाकपा माले ने मनाया क्रान्ति दिवस।
विस्तार........
रायबरेली: आज भाकपा (माले) कार्यकर्ताओं ने 1857 के महानायक वीरा पासी द्वार से महानायक राना बेनी माधव की प्रतिमा तक मार्च निकालकर 1857 के स्वातंत्रता समर में प्राणों की आहुति देने वाले अनगिनत शहीदों, लड़ाके बीर योद्धाओं, आजादी के दीवानों को याद करते हुए उन्हे श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
आपको बता दें कि, अवध के महासंग्राम के नायक राना बेनी माधव की प्रतिमा में पुष्पांजलि के बाद भाकपा (माले) राज्य कमेटी सदस्य विजय विद्रोही ने कहा कि, 10 मई-क्रांति दिवस पर असंख्य योद्धाओं का स्मरण करना जरूरी है, जिन्होंने अपने प्राणों का उत्सर्ग कर स्वतंत्रता का मार्ग प्रशस्त किया। मुख्य रूप से बहादुर शाह जफर, रानी लक्ष्मीबाई, वीर कुंवर सिंह, तात्या टोपे, तोपची गौस खां, मौलवी अजीमुल्ला, बेगम हजरत महल का स्मरण किये बिना इस महान क्रांति को नही समझा जा सकता।
1857 की क्रांति विश्व की एक महान आश्चर्यजनक, अत्यंत प्रभावी और परिवर्तनकारी घटना थी। इसने न केवल ब्रिटिश साम्राज्यवाद और उपनिवेशवाद की चूलें हिला दीं। यह किसी उत्तेजना से उत्पन्न आंदोलन नहीं था। इसके राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक तीनों आयाम थे।
इस महासंग्राम में असंख्य साझे बलिदानों की साझी बिरासत के वारिशो को उस एकता संघर्ष और बलिदान के महान संदेश की हिफाजत करने की जिम्मेदारी है। आज जब विभाजनकारी नफरत की सियासत देश की जनता की एकता को विभाजित कर जातीय धार्मिक उन्माद के सहारे सत्ता हथियाने की पैतरेबाजी हो रही है देश में गुलामी का एक नया दौर लाने की पुरजोर कोशिशें जारी हैं, नागरिक आजादी, संविधान लोकतंत्र सब दांव पर है तब 1857 के अमर सेनानी हमारे मार्गदर्शक बनकर हमे एकता का संदेश देते हैं और इस मुल्क से सांप्रदायिक शक्तियों को उखाड़ फेंकने और एक प्रगतिशील भारत के निर्माण का रास्ता दिखाते हैं।
इस अवसर पर भाकपा (माले) जिला सचिव उदय पटेल, किसान महासभा अध्यक्ष फूल चंद्र मौर्या, इंकलाबी नौजवान सभा प्रदेश उपाध्यक्ष हनुमान अंबेडकर, इंसाफ मंच जिलाध्यक्ष डा. हलीम महमूद, सचिव अहसन खान, आर एस एडवोकेट, मो इरफान आदि ने भी श्रद्धा सुमन अर्पित किए।

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