बंदरों के आंतक से परेशान ग्रामीण, कई हो चुके हैं शिकार

रजनीकांत अवस्थी

बछरावां/रायबरेली: थुलेंडी गांव में बंदरों का आतंक इस कदर बढ़ चुका है कि, लोगों का घर से निकलना दूभर हो गया है। हर पल ग्रामीणों पर बंदरों के हमले का खतरा मंडराया करता है। अब तक गांव के दर्जनों लोग बंदर के हमले का शिकार हो चुके हैं। 

     आपको बता दें कि, ग्रामीणों का कहना है कि, बंदरों का झुंड कभी पानी की टंकी, तो कभी तार एवं खुले में रखे अन्य उपकरणों को तोड़फोड़ देते हैं, कोई सामान लेकर गुजरता है। तो बन्दर थैला छीन कर भाग जाते हैं। शंकर, इसरार, मुस्लिम, मानसी, विकास, रामचरण, रहमतुल्लाह, सौरभ, उबेद खान, अंजनी, रामू शुक्ला, नंदकिशोर, वीरेंद्र, अयूब, ब्रह्मा देवी और ईशान खान हाल ही में बन्दरों के हमले का शिकार हुए हैं।

      गांव के रहने वाले मुकेश ने बताया कि, पिछले चार माह से बंदरों ने जमकर उत्पाद मचा रखा है। अब तक 60 से ज्यादा गांव के लोग बंदर के हमले के शिकार हो चुके हैं। यहां तक की शंकर कुशवाहा पर तीन बंदरों ने एक साथ हमला कर दिया है, उनका ट्रॉमा सेंटर में इलाज चल रहा है। 

      सौरभ पाठक ने बताया कि, इतनी गर्मी पड़ रही है किंतु लोग छत पर सोने से डरते हैं। गांव के ही गोवर्धन शुक्ल का कहना है कि, बंदरों के डर से लोगों का घर से निकलना दूभर हो गया है। बंदर अक्सर तोड़फोड़ करते रहते हैं। 

     मामले में वनरक्षक बृजेश वर्मा ने बताया कि, वन विभाग को आदेशित किया है कि, बंदरों की समस्याएं ग्राम पंचायत स्तर पर निस्तारित होंगी। यह काम ग्राम सभा का है।

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