ताजुद्दीनपुर के ग्राम रोजगार सेवक की याचिका उच्चतम न्यायालय ने की खारिज

रजनीकांत अवस्थी

महराजगंज/रायबरेली: विकासखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत ताजुद्दीनपुर के रोजगार सेवक देवनाथ को विगत दिनों मनरेगा मजदूरों की मजदूरी गमन किए जाने के मामले में अधिकारियों की मौजूदगी में हुई ग्राम पंचायत की खुली बैठक में रोजगार सेवक के पद से बर्खास्त कर दिया गया था। जिसको लेकर रोजगार सेवक ने हाई कोर्ट लखनऊ की खंडपीठ में एक याचिका डालकर बहाल किए जाने की अपील की थी। जिस पर उच्च न्यायालय के मजिस्ट्रेट ने याचिका को खारिज कर दिया है तथा ग्राम सभा में खुली बैठक में उच्चाधिकारियों की मौजूदगी में किए गए निर्णय को उचित ठहराया है। 

      आपको बता दें कि, याचिकाकर्ता के विद्वान अधिवक्ता तथा विपक्षी पक्ष 1 से 5 की ओर से उपस्थित विद्वान राज्य अधिवक्ता को सुना गया। पारित आदेश के मद्देनजर विपक्षी पक्ष 6 को नोटिस देने से छूट प्राप्त है। 29 जुलाई, 2024 के आदेश को चुनौती देते हुए याचिका दायर की गई है, जिसमें कहा गया है कि, याचिकाकर्ता को उक्त आदेश के माध्यम से ग्राम रोजगार सेवक देवनाथ को पद से सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। 

     न्यायालय द्वारा कहा गया है कि, हालांकि, विद्वान राज्य अधिवक्ता रणविजय सिंह ने इस याचिका की स्थिरता के संबंध में इस आधार पर प्रारंभिक आपत्ति उठाई है कि, 29 जुलाई, 2024 का आदेश महज एक पत्र है, जबकि इसके अवलोकन से यह स्पष्ट हो जाएगा कि, याचिकाकर्ता की सेवाएं वास्तव में ग्राम पंचायत के 25 जून, 2024 के प्रस्ताव के माध्यम से समाप्त कर दी गई हैं, जिसे चुनौती नहीं दी गई है।   

      उपरोक्त के मद्देनजर, याचिकाकर्ता के विद्वान वकील ने निर्देशों के आधार पर इस याचिका को नए सिरे से दायर करने की स्वतंत्रता के साथ वापस लेने की मांग की है। इस तरह के प्रस्तुतीकरण के मद्देनजर, याचिका को 25 जून, 2024 के संकल्प को चुनौती देने की पूर्वोक्त स्वतंत्रता के साथ खारिज किया जाता है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ