सार........
⭕ पुराणों के अनुसार बसंत पंचमी के दिन भगवान शिवजी व मां पार्वती जी का तिलकोत्सव हुआ-आचार्य अजय शुक्ल।
विस्तार.........
सलेमपुर/देवरिया: सनातन धर्म व संस्कृति का प्रमुख पर्व बसंत पंचमी माघ मास के शुक्ल पक्ष के पंचमी को मनाया जाता है। इस बार यह पर्व शुभ योग व रेवती नक्षत्र में 3 फरवरी को मनाया जाएगा। उक्त बातें बताते हुए आचार्य अजय शुक्ल ने कहा कि, दो फरवरी को दोपहर 12 बजकर 28 मिनट पर पंचमी तिथि आरम्भ हो रही है जो 3 फरवरी को सुबह 9 बजकर 35 मिनट तक रहेगी।
आपको बता दें कि, आचार्य अजय शुक्ल ने बताया कि, उदया तिथि मान के अनुसार 3 फरवरी को बसंत पंचमी का पर्व मनाना श्रेयस्कर होगा। पुराणों के अनुसार इसी दिन भगवान शिवजी व मां पार्वती जी का तिलकोत्सव हुआ था। इसके बाद ही उनके विवाह की रस्में शुरू हो गई थी। इसी बसंत पंचमी को विद्या की देवी मां सरस्वती का भी जन्म हुआ था। इस दिन कोई भी मांगलिक कार्य शुरू करने की मान्यता हमारे वेद और शास्त्रों ने बताया है।
आचार्य श्री ने बताया कि, बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती जी के पूजन का विशेष महत्व है, पीताम्बर धारण कर भगवान श्रीकृष्ण ने भी बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा अर्चना की थी, तभी से पीत वस्त्र धारण कर इनकी पूजा करने का प्रचलन प्रारंभ हो गया। आचार्य जी ने बताया कि, पीला रंग शुद्धता, सादगी, निर्मलता व सात्विकता का प्रतीक है। यह त्योहार विद्यार्थियों, साधकों, भक्तों व ज्ञान की इच्छा रखने वाले उपासकों को सिद्धि तथा मनोवांछित फल देने वाला है।


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