सलिल पांडेय
मिर्जापुर: कुछ साल पहले बलिया (उ0 प्र0) की निवासिनी महिला के साथ देश की राजधानी में दुराचरण की वारदात के बाद उसे छद्म नाम 'निर्भया' दिया गया क्योंकि उसका वास्तविक नाम कुछ और था ।
सिर्फ नाम ही निर्भया, हकीकत में नारी वर्ग है भयाक्रांत--
हैदराबाद में डॉ प्रियंका रेड्डी की घटना में उसे दूसरी निर्भया कहा जा रहा है जबकि न जाने कितनी निर्भया पाशविक प्रवृत्ति की चपेट में अब तक आ चुकी हैं ।
क्या गारंटी, फिर नहीं होगा तीसरा निर्भयाकांड?---
बहुतेरी संस्थाएं ऐसे मौके पर जुलूस, निंदा, बहस, धरना आदि के जरिए जीवंत हो उठती हैं । वे यह गारंटी नहीं दे पाएंगे कि उनकी सक्रियता से अब ऐसी घटना नहीं हो पाएगी ।
ये घड़ियाली आंसू तो नहीं ?---
ऐसी घटनाओं के बाद आंसूओं का समंदर बहने लगता है । इस तरह की घटना होने पर जिस इलाके में घटना हुई, उस इलाके की समाजसेवी संस्थाएं, ऐसी घटनाओं की निंदा, धरना और सुर्खियां बटोरने वाले लोग क्या यह कहकर कि उनके रहते ऐसी घटना हो गयी लिहाजा उन्हें भी कानून की चपेट में लिया जाए । वे अपने दायित्व का निर्वाह नहीं कर सके, लिहाजा फिर ऐसी घटना हो गई !
इलाके के हर तरह के जनप्रतिनधि ले जिम्मेदारी!---
जिस इलाके में ऐसी घटना हो, उस इलाके के सम्बंधित आफिसर को निलंबित आदि तो किया जाए, साथ में प्रधान से लेकर सांसद, घटना वाले जनपद के यदि कोई मंत्री हों, सबको जिम्मेदार बनाया जाए कि वे अपने क्षेत्र में पाशविक आचरण का ही प्रचार प्रसार कर रहे हैं । लिहाजा इलाका शर्मसार हो गया । वह गांव हो या वार्ड, उस पर पेनाल्टी लगे । वरना 'यह पाशविक प्रवृत्ति है', 'यह जघन्य कांड है', 'बर्दाश्त नहीं किया जाएगा' आदि आदि बयान सिर्फ मज़ाकबाजी ही कही जाएगी ।
मिर्जापुर: कुछ साल पहले बलिया (उ0 प्र0) की निवासिनी महिला के साथ देश की राजधानी में दुराचरण की वारदात के बाद उसे छद्म नाम 'निर्भया' दिया गया क्योंकि उसका वास्तविक नाम कुछ और था ।
सिर्फ नाम ही निर्भया, हकीकत में नारी वर्ग है भयाक्रांत--
हैदराबाद में डॉ प्रियंका रेड्डी की घटना में उसे दूसरी निर्भया कहा जा रहा है जबकि न जाने कितनी निर्भया पाशविक प्रवृत्ति की चपेट में अब तक आ चुकी हैं ।
क्या गारंटी, फिर नहीं होगा तीसरा निर्भयाकांड?---
बहुतेरी संस्थाएं ऐसे मौके पर जुलूस, निंदा, बहस, धरना आदि के जरिए जीवंत हो उठती हैं । वे यह गारंटी नहीं दे पाएंगे कि उनकी सक्रियता से अब ऐसी घटना नहीं हो पाएगी ।
ये घड़ियाली आंसू तो नहीं ?---
ऐसी घटनाओं के बाद आंसूओं का समंदर बहने लगता है । इस तरह की घटना होने पर जिस इलाके में घटना हुई, उस इलाके की समाजसेवी संस्थाएं, ऐसी घटनाओं की निंदा, धरना और सुर्खियां बटोरने वाले लोग क्या यह कहकर कि उनके रहते ऐसी घटना हो गयी लिहाजा उन्हें भी कानून की चपेट में लिया जाए । वे अपने दायित्व का निर्वाह नहीं कर सके, लिहाजा फिर ऐसी घटना हो गई !
इलाके के हर तरह के जनप्रतिनधि ले जिम्मेदारी!---
जिस इलाके में ऐसी घटना हो, उस इलाके के सम्बंधित आफिसर को निलंबित आदि तो किया जाए, साथ में प्रधान से लेकर सांसद, घटना वाले जनपद के यदि कोई मंत्री हों, सबको जिम्मेदार बनाया जाए कि वे अपने क्षेत्र में पाशविक आचरण का ही प्रचार प्रसार कर रहे हैं । लिहाजा इलाका शर्मसार हो गया । वह गांव हो या वार्ड, उस पर पेनाल्टी लगे । वरना 'यह पाशविक प्रवृत्ति है', 'यह जघन्य कांड है', 'बर्दाश्त नहीं किया जाएगा' आदि आदि बयान सिर्फ मज़ाकबाजी ही कही जाएगी ।

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