शैक्षिक तंत्र की अवधारणा पर करना होगा गम्भीरता से विचार : आर0के0 सिंह।। Raebareli news ।।

रजनीकांत अवस्थी
शिवगढ़/रायबरेली: शिवगढ़ कस्बे में स्थित श्री बरखण्ड़ी महाविद्यालय शिवगढ़ में "परीक्षा तंत्र में परिवर्तित होता शैक्षिक तंत्र" विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजित की गयी। संगोष्ठी का शुभारम्भ महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ0 आर0के0 सिंह के द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित करके किया गया। इसी कड़ी में महाविद्यालय की छात्रा अंशिका, जान्वही, कंचन सिंह, निशा बाजपेई ने अपनी मधुर आवाज में सरस्वती वंदना प्रस्तुत करके सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं वर्षा सिंह, नीलम, मंदाकिनी ने देशभक्ति से ओतप्रोत गीत गाकर समूचे विद्यालय प्रांगण का माहौल देशभक्तिमय बना दिया। 
       आपको बता दें कि, इस अवसर पर बतौर संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे महाविद्यालय के प्राचार्य डॉक्टर आर0के0 सिंह ने अपने उद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि, शिक्षा सर्वांगीण विकास करने वाली होनी चाहिए। छात्र- छात्राओं को संबोधित करते हुए श्री सिंह ने कहा कि, क्या परीक्षा में 99% अंक पाना ही सच्ची शिक्षा है ? जो विद्यार्थी 99% अंक पा रहा है वह महान है, वह मॉडल है। इस धारणा के कारण सीबीएसई की परीक्षा में इससे कम अंक पाने पर तेलंगाना में कई छात्रों की आत्महत्या का मामला सामने आया है। 90% से कम अंक पाने वाले शेष छात्र इसी कारणवश स्वयं को दीन-हीन समझने लगते हैं और अवसाद में चले जाते हैं। हम सबको इस शैक्षिक तंत्र की इस अवधारणा पर राष्ट्रीय स्तर पर गंभीरता से विचार करना होगा, क्योंकि लगभग 10% छात्र मानसिक रूप से अस्वस्थ्य बताए जा रहे हैं। 
      श्री सिंह ने आगे कहा कि, राष्ट्र को गौरव शिखर पर ले जाने के लिए युवाओं में भरपूर क्षमताएं हैं लेकिन इसमें तंत्र को सहायक बनाना पड़ेगा। ताकि उनकी आकांक्षाओं का विमान मंजिल तक पहुंच सके। दुनिया में ऐसे बहुत उदाहरण है जिन्होंने कम शिक्षा प्राप्त कर समाज को बड़े स्तर पर प्रभावित करके एक इतिहास रच दिया है। नोबेल पुरस्कार से सम्मानित डॉक्टर रविंद्रनाथ टैगोर, हलधर नाम, क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले भारत रत्न से सम्मानित सचिन तेंदुलकर सहित तमाम ऐसे उदाहरण है। अब ऐसी निति की अवधारणा की अत्यंत आवश्यकता है कि, भारत विकसित देश बने। बच्चों के भविष्य के लिए सुषुप्ता अवस्था से बाहर निकल कर सभी को गम्भीरता से चिंतन करना होगा।
       वहीं डॉक्टर संचिता मिश्रा ने अपने संबोधन में कहा कि, शिक्षा परीक्षातंत्र को महत्व न देकर लोकतंत्र में शिक्षा मूल्यों का सृजन करने वाली होनी चाहिए। डॉ0 आर0डी0 सिंह ने कहा कि, शिक्षा परीक्षा तंत्र को बढ़ावा न देकर बच्चों का सर्वांगीण विकास करने वाली होनी चाहिए। डॉ0 सुमन शुक्ला ने 3 घंटे की परीक्षा के स्थान पर मासिक, त्रैमासिक, अर्धवार्षिक ,वार्षिक परीक्षा पर बल दिया।
      डॉ0 आशुतोष मिश्रा ने उत्तम व्यक्तित्व के निर्माण पर बल दिया। सुरेश चन्द्र शुक्ला ने शिक्षक को नई तालिका से मानसिक विकास का रंग भरने तथा डॉ0 रश्मि ने मानव सेवा ही मानव का विकास पर बल दिया। संगोष्ठी में अंजलिका, रिंकी, ललिता, प्रवीण सिंह, अंजली चौरसिया, ज्योति तिवारी, तबस्सुम ने सारगर्भित विचार प्रकट किए। 
      इस अवसर पर डॉक्टर संजय, अमर बहादुर सिंह, अनुज सिंह, राकेश सिंह, पवन सिंह सहित लोग मौजूद रहे।

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