कल्पवृक्ष ऐसा वृक्ष है कि उससे जो भी मांगा जाता है मिल जाता है ।
यदि कल्पवृक्ष बंटने लगे तो शायद ही कोई ऐसा होगा, जो इस वृक्ष के पाने की ख्वाहिश न करे ।
बोध कथा-कल्पवृक्ष के नीचे कई दिनों का भूखा एक व्यक्ति थक कर बैठा । बैठते ही भूख की वजह से तड़पता वह भोजन की ख्वाहिश करने लगा कि कुछ भी मिल जाए तो खा लें ।
तत्क्षण उसके सामने स्वादिष्ट व्यंजनों से भरी थाली आ गई ।
अब वह सोने के लिए सोच रहा था कि सजा-सजाया पलंग दिख गया ।
-उस पर वह सो गया । सुबह उठा तो आश्चर्य में वह पड़ गया । सोचा कि इस पेड़ पर शायद भूत-प्रेत रहता हो । यह सोचते भूत-प्रेत आ गए ।
वह घबरा गया और मन ही मन सोचने लगा कि कहीं भूत-प्रेत मार न डालें ।
इतना सोचते भूत-प्रेत उसे मार डाले और उसकी मृत्यु हो गई ।
निहितार्थ- भगवान श्री कृष्ण के उपदेशों के अनुसार उद्यम करना चाहिए । बिना परिश्रम के कल्पवृक्ष की तरह धन-सम्पदा मिलने पर उसका अंत बुरा होता है ।
©सलिल पांडेय, मिर्जापुर
कॉपीराइट- लेखक का नाम डिलीट कर अपना नाम जोड़ना दंडनीय है ।
यदि कल्पवृक्ष बंटने लगे तो शायद ही कोई ऐसा होगा, जो इस वृक्ष के पाने की ख्वाहिश न करे ।
बोध कथा-कल्पवृक्ष के नीचे कई दिनों का भूखा एक व्यक्ति थक कर बैठा । बैठते ही भूख की वजह से तड़पता वह भोजन की ख्वाहिश करने लगा कि कुछ भी मिल जाए तो खा लें ।
तत्क्षण उसके सामने स्वादिष्ट व्यंजनों से भरी थाली आ गई ।
अब वह सोने के लिए सोच रहा था कि सजा-सजाया पलंग दिख गया ।
-उस पर वह सो गया । सुबह उठा तो आश्चर्य में वह पड़ गया । सोचा कि इस पेड़ पर शायद भूत-प्रेत रहता हो । यह सोचते भूत-प्रेत आ गए ।
वह घबरा गया और मन ही मन सोचने लगा कि कहीं भूत-प्रेत मार न डालें ।
इतना सोचते भूत-प्रेत उसे मार डाले और उसकी मृत्यु हो गई ।
निहितार्थ- भगवान श्री कृष्ण के उपदेशों के अनुसार उद्यम करना चाहिए । बिना परिश्रम के कल्पवृक्ष की तरह धन-सम्पदा मिलने पर उसका अंत बुरा होता है ।
©सलिल पांडेय, मिर्जापुर
कॉपीराइट- लेखक का नाम डिलीट कर अपना नाम जोड़ना दंडनीय है ।





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