आपराधिक तथ्यों को छुपा कर क्यों दिया गया लाइसेंस : पहले ही गहराई से जांच क्यों नहीं हुई?

मिर्जापुर। पवित्र विंध्याचल मुख्यालय के जिले में मिड डे मील में गरीब, असहाय, अशक्त और प्रकृति के मारे निर्बल वर्ग परिवार के बेसिक शिक्षा के स्कूल में देश के भविष्य बच्चों को नमकरोटी के बल पर महान बनाने के चक्कर में जिला अन्तर्राष्ट्रीय बदनामियों को झेल रहा था और मामले की लीपापोती में सहायक बनने के एवज में रेवड़ी की तरह असलहे का लाइसेंस मिल रहा था, जो अब सुर्खियों में आ रहा है । 
 दैनिकअखबार ने उछाला मामले को!---
एक प्रमुख दैनिक अखबार में उछले कथित अपराधियों को तथ्यों को छुपा कर मिले असलहे के लाइसेंस पाने में सफल रहने वालों को स्थानांतरित नगर मजिस्ट्रेट श्री सुशील लाल श्रीवास्तव द्वारा जाते जाते दी गई नोटिस के कई मायने निकल रहे हैं ।
   दर-असल हुआ किसीसमय डायरेक्ट IAS एवं IPS की तैनाती के दौरान PCS प्रोन्नत एक अधिकारी को शक हुआ कि डायरेक्ट वाले उनके विरुद्ध गुटबंदी कर रहे हैं । उनदिनों डायरेक्ट आईएएस श्रीमती प्रियंका निरंजन, अरविंद चौहान तथा आईपीएस श्रीमती शालिनी जब कभी एक साथ बैठती तो प्रशासनिक प्लस-रेट बढ़ जाता था । इन तीनों में एकता को तोड़ने के लिए कुछ ऐसे लोग जिनके पास काम-काज का अभाव था और किसी तरह इस आफिस से उस आफिस तक चक्कर लगाते थे, उन्हें बतौर मुखबिर बना लिया गया और उनको पॉकेट में रखने तथा मनचाहा ढंग से नचाने के लिए प्रशासनिक लाभ देना एक सरल और सहज मार्ग था । प्रशासनिक कमजोर-नस को पकड़ चुके ऐसे लोगों ने असलहे के लाइसेंस की आढ़त खोल दी और उनके आढ़त पर जो पहुंचा, दान दक्षिणा चढ़ाया कि लाइसेंस नियमों को गंगा नदी में प्रवाहित कर उपकृत किया जाने लगा ।
 इसी चक्कर मे मुकेरीबाजर के बवाल को तूल दिया गया!- -
डायरेक्ट आईपीएस श्रीमती शालिनी की बलि के लिए नवम्बर '18 में मुकेरीबाजार में हुए उवद्र्व को प्रशानिक स्तर पर तूल देने का अनुमान लगया गया और यह भी इल्जाम लगा कि उन्होंने गनर हटाने में मनमानी की । 
 सब चुप थे क्योंकि प्रशासन में चल रही थी नेतागिरी ।---
नेताजी बने प्रशासनिक अधिकारियों ने दे तो दिया लाइसेंस लेकिन उसमें अब कुछ को लग रहा है कि मामला कभी गले की फांस बन सकता है । प्रधान नेताजी नमक रोटी प्रकरण में अपने नायकत्व से हाथ धो बैठे । उन पर आ गया संकट तो सब पल्ला झाड़कर अलग होने की फिराक में लगे हैं ।
 अप्रैल18 से अक्टूबर 19 तक की जाँच हो ---
उक्त अवधि में निर्गत लाइसेंसों की जांच की मांग तेज हो रही है । आढ़तियों का चेहरा लटका हुआ है । बहराल सिर्फ लाइसेंस ही नहीं हेलीकॉप्टर बाबा मामले में एक तहसीलदार सबसे बड़े सरकारी बंगले में क्यों बेहोश हुए थे ? एक एसडीएम को क्यों प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई ? महिलाओं के विभाग का एक सेकेंड दर्जे का अधिकारी क्यों महत्त्वपूर्ण हो गया ? वह विभागीय महिलाओं के साथ पिकनिक पर कैसे जाते थे ? जिसका वीडियो लोगों के पास होना बताया जाता है । सरकारी बंगले में भरूहना के पास की कालोनी की कतिपय परिवार का बेरोकटोक प्रवेश क्यों होता था ? कार्यदायी संस्थाओं से त्राहिमाम की गूंज क्यों आती थी?आदि विषय भी जांच के विंदु होने चाहिए !
                        सलिलपांडेय, मिर्जापुर 

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