पराई स्त्री की तरफ देखना आंखों में पूतना का वास-पं0 राधेश्याम शास्त्री

रजनीकांत अवस्थी
शिवगढ़ क्षेत्र की ग्राम पंचायत पिपरी में चल रही श्रीमद्भागवत पुराण कथा के पांचवें दिन अयोध्या धाम से पधारे व्यास गद्दी पर आसीन छोटी छावनी नृत्य गोपाल दास के शिष्य पंडित राधेश्याम शास्त्री ने बहुत ही मार्मिक कथा सुनाई।
      आपको बता दें कि श्री शास्त्री जी महाराज ने बताया कि, पांच ज्ञानेंद्रियां हैं और पांच कर्मेंद्रियां हैं। मन, बुद्धि, चित्त एवं अहंकार और इन्हीं 14 स्थानों पर वासना अविद्या रहती है। रामायण में कैकई ने राम को 14 वर्ष वनवास की कामना की थी। इसका सीधा अर्थ है कि,14 स्थानों पर बसे रावण रूपी अहंकार को नष्ट करने वाले श्री राम बनकर 14 वर्ष तक तपस्या मे रत रहते है। भागवत कथा के दौरान भव्य श्री कृष्ण जन्मोत्सव भी मनाया गया। 
       इसीक्रम में 16 कलाओं से परिपूर्ण श्री कृष्ण के जीवन वृतांत से जोड़कर शास्त्री जी ने जीवन का रहस्य बताया। श्री शास्त्री जी ने श्रीमद् भागवत कथा पुराण का व्याख्यान करते हुए कहा कि, नीति और धर्म के मना करने के बाद भी यदि पराई स्त्री पर दृष्टि जाती है तो इसका अर्थ है कि, आंखों में पूतना का वास हो रहा है। आंखों के माध्यम से मन में पाप अपना स्थान बना रहा है। पूतना 3 वर्ष तक बालक अर्थात शिशु को मारने का कार्य करती है।

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