बसंत पंचमी की पूर्व संध्या पर एकल विद्यालयों में मनाया गया बसन्तोत्सव।। Raebareli news ।।

आचार्य बहनों ने मांगा विश्व से अज्ञानता के तिमिर मिटाने का आशीर्वाद

रजनीकांत अवस्थी
शिवगढ़/रायबरेली: बसन्त पंचमी की पूर्व संध्या पर शिवगढ़ क्षेत्र के बैंती, देहली, कसना, खजुरों,
जयचन्दपुर, शिवली, तरौजा, सीवन सहित एकल विद्यालयों में आचार्या बहनों एवं छात्र-छात्राओं ने विधि-विधान पूर्वक मां सरस्वती की पूजा, अर्चना एवं वंदना की। मान्यता है कि, बसंत पंचमी के पावन अवसर पर विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा अर्चना करने से ज्ञान दायिनी मां सरस्वती खुश होकर श्रद्धालुओं के मन मस्तिक से अज्ञानता के तिमिर को मिटाकर उनके जीवन को ज्ञान रूपी प्रकाश से आलोकित कर देती हैं।
       यही कारण है कि, बसंत पंचमी के पावन अवसर पर विद्यालयों एवं घरों में हर्षोल्लास पूर्वक बसन्त उत्सव मनाया जाता है। छात्र-छात्राओं एवं श्रद्धालुओं द्वारा विभिन्न तरीकों से मंत्रोच्चारण के साथ मां सरस्वती की पूजा अर्चना की जाती है।
     आपको बता दें कि, बसंत पंचमी की पूर्व संध्या पर एकल विद्यालय बैंती में आचार्य बहन सारिका रावत ने एकल विद्यालय की छात्रा शालिनी, ललिता, सविता, रजनी, माही, सगुन, विशाल, प्रीति, खुशी, शशांक शेखर, बृजेश कुमार,दीपक, दीनदयाल, विनय कुमार, रौनक कुमार, विशाल सहित छात्र-छात्राओं के साथ मिलकर मंत्रोच्चारण के साथ विधि-विधान पूर्वक मां सरस्वती की पूजा की। और मां सरस्वती से अज्ञानता के अंधकार को मिटाकर ज्ञान रूपी प्रकाश से समूचे विश्व के जीवन को आलोकित करने का आशीर्वाद मांगा।
    वहीं एकल विद्यालय शिवली में आचार्य बहन अनीता, सीवन में शुभाशिनी सहित आचार्या बहनों ने अपने-अपने विद्यालय में बसंतोत्सव मनाया। इस अवसर पर एकल विद्यालय के शिवगढ़ संच प्रमुख जितेंद्र सिंह, संरक्षक भद्रपाल सिंह ने कई एकल विद्यालयों में आयोजित कार्यक्रम में शिरकत की।
       विदित हो कि, शिवगढ़ क्षेत्र में कुल 30 एकल विद्यालय संचालित हैं। प्रत्येक एकल विद्यालय में एक आचार्या बहन को नियुक्त किया गया है। आचार्या बहने अपने दरवाजे अथवा सार्वजनिक स्थलों पर 6 से 14 वर्ष के बच्चों को संस्कार युक्त शिक्षा देकर संस्कार युक्त राष्ट्र का निर्माण कर रही हैं। ज्ञात हो कि, एकल विद्यालय अभियान की शुरुआत 1988 में झारखंड के गुमला नामक ब्लॉक के रतनपुर गांव से हुई थी। जिसकी शुरुआत 60 विद्यालयों से हुई थी आज पूरे देश में एक लाख गांव और 4 संपर्कीय गांव सहित करीब पांच लाख गांवों में एकल विद्यालय अभियान चलाया जा रहा है।

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