रजनीकांत अवस्थी
महराजगंज/रायबरेली: क्षेत्र के मोन गांव स्थित बाबा ओरीदास जी महाराज के मंदिर की तपोस्थली प्रांगण में बसंत पर्व पर लगने वाले सात दिवसीय मेले का शुभारंभ 30 जनवरी 2020 दिन बृहस्पतिवार को धूमधाम से हुआ। पहले ही दिन सुबह से भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। भीड़ पर काबू पाने के लिए मेले में जगह-जगह भारी मात्रा में पुलिस बल तैनात रहा।
आपको बता दें कि, इन्हौना मार्ग पर महराजगंज से लगभग 3 किलोमीटर की दूरी पर पश्चिम दिशा की ओर स्थित बाबा ओरी दास के प्राचीन मंदिर प्रांगण में कई वर्षो पूर्व से बसंत पंचमी के दिन मेला लगता है। जिसमें क्षेत्र ही नहीं दूर-दराज से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं। बुजुर्गो का कहना है कि, बाबा का जन्म मोन गांव के अवस्थी परिवार में 1710 ई में हुआ था। जिनको ओरी दास अवस्थी के नाम से लोग संबोधित करते थे।
ग्रामीणों का यह भी मानना है कि, बाबा की गांव के ही कुछ लोगों से किसी बात को लेकर विवाद चल रहा था। वृद्धावस्था में बाबा की गांव के ही कुछ दबंगों द्वारा हत्या कर दी थी। ग्रामीणों के सहयोग से बाबा का अंतिम संस्कार महराजगंज से इन्हौना मार्ग के किनारे स्थित बाबा की बाग में किया गया। बताया जाता है कि, बाबा की समाधि पर ही कुछ दिन बाद एक पीपल का पेड़ उगा जो, आज पूरे जनपद में अपने विशालकाय के लिए अनोखी मिसाल बना हुआ है।
क्षेत्र के बुजुर्ग बताते हैं कि, बाबा की हत्या उपरांत बाबा की हत्या में शामिल लोगों के साथ लगातार घटनाएं होनी लगी। धीरे-धीरे गांव के सात घरों में दीपक जलाने वाला कोई नहीं बचा। घर खंडहर हो गये। बाबा की महिमा यूं फैली की आज खंडहर स्थान पर यदि कोई दीपक जलाने जाता है तो उसे भी बाबा स्वप्न देकर ऐसा न करने को आगाह करते हैं। तब से आज तक मेले का आयोजन होता चला आ रहा है।
महराजगंज/रायबरेली: क्षेत्र के मोन गांव स्थित बाबा ओरीदास जी महाराज के मंदिर की तपोस्थली प्रांगण में बसंत पर्व पर लगने वाले सात दिवसीय मेले का शुभारंभ 30 जनवरी 2020 दिन बृहस्पतिवार को धूमधाम से हुआ। पहले ही दिन सुबह से भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। भीड़ पर काबू पाने के लिए मेले में जगह-जगह भारी मात्रा में पुलिस बल तैनात रहा।
आपको बता दें कि, इन्हौना मार्ग पर महराजगंज से लगभग 3 किलोमीटर की दूरी पर पश्चिम दिशा की ओर स्थित बाबा ओरी दास के प्राचीन मंदिर प्रांगण में कई वर्षो पूर्व से बसंत पंचमी के दिन मेला लगता है। जिसमें क्षेत्र ही नहीं दूर-दराज से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं। बुजुर्गो का कहना है कि, बाबा का जन्म मोन गांव के अवस्थी परिवार में 1710 ई में हुआ था। जिनको ओरी दास अवस्थी के नाम से लोग संबोधित करते थे।
ग्रामीणों का यह भी मानना है कि, बाबा की गांव के ही कुछ लोगों से किसी बात को लेकर विवाद चल रहा था। वृद्धावस्था में बाबा की गांव के ही कुछ दबंगों द्वारा हत्या कर दी थी। ग्रामीणों के सहयोग से बाबा का अंतिम संस्कार महराजगंज से इन्हौना मार्ग के किनारे स्थित बाबा की बाग में किया गया। बताया जाता है कि, बाबा की समाधि पर ही कुछ दिन बाद एक पीपल का पेड़ उगा जो, आज पूरे जनपद में अपने विशालकाय के लिए अनोखी मिसाल बना हुआ है।
क्षेत्र के बुजुर्ग बताते हैं कि, बाबा की हत्या उपरांत बाबा की हत्या में शामिल लोगों के साथ लगातार घटनाएं होनी लगी। धीरे-धीरे गांव के सात घरों में दीपक जलाने वाला कोई नहीं बचा। घर खंडहर हो गये। बाबा की महिमा यूं फैली की आज खंडहर स्थान पर यदि कोई दीपक जलाने जाता है तो उसे भी बाबा स्वप्न देकर ऐसा न करने को आगाह करते हैं। तब से आज तक मेले का आयोजन होता चला आ रहा है।





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