भगवान सुमिरन से नहीं स्मरण से प्रसन्न होते हैं-पं0 राधेश्याम शास्त्री।। Raebareli news ।।

रजनीकांत अवस्थी
रायबरेली: शिवगढ़ क्षेत्र के पिपरी गांव में सेवानिवृत्त शिक्षक गोविंद नारायण शुक्ला के आवास प्रांगण में चल रही सात दिवसीय संगीतमयी श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ के छठवें दिन कथावाचक पंडित राधेश्याम शास्त्री जी महाराज ने अपनी दिव्य वाणी से अमृतमयी वर्षा करते हुए श्री कृष्ण रासलीला, कंस वध, श्री कृष्ण रुक्मणी विवाह का बड़ा ही सुंदर वर्णन किया।
      आपको बता दें कि, उपस्थित श्रोताओं को संगीतमय श्रीमद् भागवत महापुराण कथा का श्रवण पान कराते हुए उन्होंने कहा कि, भगवान श्रीकृष्ण सांवरे थे, ऐसा नहीं है उनके सौंदर्य में बड़ी गहराई थी। बिल्कुल वैसे ही जैसे कि, नदी जब गहरी होती है तो उसका जल सांवरा हो जाता है। मोर पंखों से बने भगवान श्री कृष्ण के मुकुट में सारे रंग समाए हैं। इसीलिए भगवान श्री कृष्ण को पूर्णावतार कहा जाता है। जब-जब पृथ्वी पर अत्याचार बढ़ता है। तो भगवान किसी न किसी रूप में अवतरित होते हैं, कंस का संहार करने के लिए भगवान श्री कृष्ण ने जन्म लिया था। भगवान श्री कृष्ण युद्धवादी नहीं थे लेकिन युद्ध को भी जीवन के खेल का हिस्सा मानते थे।
       उनमें किसी को मिटाने की आकांक्षा नहीं थी। वे किसी को दुख नहीं पहुंचाना चाहते थे। युद्ध न हो जिसके लिए उन्होंने सारे उपाय कर लिए थे। भगवान श्री कृष्ण कहते थे कि, युद्ध ना हो ठीक है, किंतु युद्ध से भागना ठीक नहीं है। यदि मनुष्य के मंगल के लिए मनुष्य के हित के लिए युद्ध अनिवार्य हो जाए तो इस अनिवार्य युद्ध को आनंद से स्वीकार करना चाहिए।
       श्री शास्त्री जी महाराज ने कहा कि, भगवान श्री कृष्ण का सारा का सारा आधार उपासना है और उपासना का सारा आधार स्मरण का है। लेकिन उपासक भूल गए। स्मरण की जगह उन्होंने सुमिरन शुरू कर दिया और स्मरण को भूलकर अब सुमिरन कर रहे हैं। भगवान को पाना है तो सुमिरन नहीं स्मरण करना होगा।
       विदित हो कि, कथावाचक राधेश्याम शास्त्री जी महराज अयोध्या धाम के संत शिरोमणि श्री श्री 108 श्री महंत नृत्य गोपालदास जी महराज के शिष्य हैं। जो अपनी दिव्य वाणी से अमृतमयी वर्षा कर रहे हैं। प्रतिदिन सायं 6 से 9 तक आयोजित कथा का रसपान करने के लिए श्रोताओं का जनसैलाब उमड़ रहा है।
       इस संगीतमयी श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ का आयोजन मधू शुक्ला एवं सेवानिवृत्त शिक्षक गोविंद नारायण शुक्ला के द्वारा किया जा रहा है। कार्यक्रम में व्यवस्थापक की मुख्य भूमिका राजकुमार शुक्ला निभा रहे हैं। इस मौके पर मुख्य यजमान केश शुक्ला, विजय नारायण शुक्ला, महेश शुक्ला, मीना शुक्ला, पिपरी प्रधान अनुपमा तिवारी, सुनील शुक्ला, नंदकिशोर तिवारी, सीमा शुक्ला, नमिता, शैलेश, अर्पणा, राकेश बाबू तिवारी, ललित, रितेश, शिशिर, सौरभ, ऋषभ, आर्यन, आर्यव, ललित तिवारी, रामदेव अवस्थी सहित हजारों की संख्या में श्रोता गण मौजूद रहे।

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