यह बड़प्पन कर सकते हैं वरिष्ठ पत्रकार श्री शशि गुप्त

मिर्जापुर। पत्रकारों में श्री शशि गुप्त विचार प्रधान पत्रकार है । इनकी लेखनी में सरस्वती निवास करती हैं । सामाजिक, आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक आदि सभी विषयों पर पूरे आत्म-विश्वास से अपने अखबार 'गांडीव' या अपने ब्लाग 'व्याकुल पथिक' में लिखते हैं । लिखते वक्त बहुतों से विचार-मंथन भी करते हैं और जिसके विचार को लेखन में ढालते हैं, पूरा सम्मान देते हुए उसका उल्लेख भी करते हैं । उन्हें इस बात का भरोसा है कि इससे वे छोटे नहीं हो जाएंगे ।
चोरी 'मैंने तो कहते थे' वाले करते हैं ।--
एक वाक्य में व्याकरण की ढेरों गलतियां करने वाले जब कोई शानदार लेखन पोस्ट करते या छापते हैं तो प्रथम दृष्टया समझ में आ जाता है कि यह 'लेखन-चोर' किस्म का पोस्ट है । वे समुद्र की तरह विस्तृत सोशल मीडिया में पूरे दिन घात लगाए बैठे रहते हैं कि कैसे कोई ऐसा पोस्ट दिखे जिस अपना बनाकर 'धंधा-पानी' बनाए रखे । धड़ाधड़ नाम एडिट कर उसे अपना आलेख/खबर बनाकर अपनी छुद्रता को जगजाहिर करते हैं ।
     फिलहाल लचक (फुल फार्म-लेखन चोर कंट्रोल) फ्रंट इस पर अडिग है कि सिर से ऊपर जब पानी जा रहा है तो अब कोई शील-संकोच नहीं । कानून का सहारा लिया जाए और उचित कार्रवाई की जाए । लेखन चोरी से पीड़ित हर व्यक्ति को 'लचक' संस्था मदद करेगी ।
                      -सलिल पांडेय, मिर्जापुर ।
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