मिर्जापुर। भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष रह चुके वरिष्ठ नेता श्री गंगासागर दुबे राजनीतिज्ञ के साथ विविध विषयों यथा राजनीति के साथ सामाजिक, अंतरराष्ट्रीय, ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक विषयों के अध्येता हैं । वे जब भी कोई विचार प्रकट करते हैं तो उसमें पूरा आत्मविश्वास झलकता हैं। प्रायः उनके प्रश्नों का उत्तर देना सहज नहीं लगता । शिवरात्रि पर उनसे महादेव के महात्म्य पर हुए वैचारिक संवाद की झलक प्रस्तुत-
विषय-'जब सती यज्ञकुंडमें जलकर भस्म हो गई तो महादेव भस्ममें सती को ढूंढने लगे और पूरे शरीर में लगाकर अर्धांगिनीके सामीप्यकी अनुभूति करने लगे।'
श्री दुबे का प्रश्न ?---
'लेकिन भइया यह भी प्रसंग मिलता हैकि शिव अवसाद में सती की मृत शरीर लेकर शिव त्र्यलोक में विचरण करने लगे थे जिसे विष्णु ने चक्र सुदर्शन के काट काट कर जमीन पर गिरा दिया वही आज शक्तिपीठ है।और सती के उसी अंग रूप में पूजा होती है।यदि जलकर भस्म बनी तो शिव क्या लेकर घूम रहे थे।'
समाधान के संदर्भ में उत्तर---
आपका सन्दर्भ सती के आग में कूदने से ही जुड़ा है । महादेव प्रथमतः यज्ञकुंड में पहुंचें और प्रसंग यह भी आता है कि असंतुलित हो कर आग की राख में सती को ढूढने लगे । विशाल यज्ञकुंड की राख शरीर मे लगा लिया । असंतुलन की स्थिति में यह स्वाभाविक क्रिया है । उससे संतोष नहीं मिला । निश्चित रूप से आग की राख ने उन्हें ऊर्जा दी और फिर वे सती के जले हुए पार्थिव शरीर को कभी सिर पर रखकर तो कभी बगल में लेकर लगे घूमने । ब्रह्मांड हिलने लगा । इसे अस्थि विसर्जन क्रिया के रूप में भी देखा जाना चाहिए ।
सिर पर रखने के कारण प्रथम पत्नी गंगा और दूसरी पत्नी पार्वती हुईं । यह प्रसंग देवीपुराण में उल्लिखित है । आगे चलकर पार्वती का गंगा से मनमुटाव भी रहा । वे महादेव से शिकायत करती हैं कि गंगा को आपने सिर पर बैठा रखा है । गंगा ने विंध्य क्षेत्र में आकर पार्वती स्वरूपा मां काली से कहा-महादेव ने यदि सिर पर बैठाया तो लोकहित और धरती की प्यास बुझाने के लिए जमीन पर भी मुझे कर दिया । यहां मनमुटाव दूर हुआ ।
आपका आध्यात्मिक ज्ञान बहुत गहरा है । आप बीच बीच में जटिल प्रश्न उठाते हैं । आपके के चिंतन में ज्ञान-गंगा विराजमान हैं । कोटिशः मंगलकामनाएं महाशिवरात्रि पर्व पर ।
-सलिल पांडेय, मिर्जापुर ।
विषय-'जब सती यज्ञकुंडमें जलकर भस्म हो गई तो महादेव भस्ममें सती को ढूंढने लगे और पूरे शरीर में लगाकर अर्धांगिनीके सामीप्यकी अनुभूति करने लगे।'
श्री दुबे का प्रश्न ?---
'लेकिन भइया यह भी प्रसंग मिलता हैकि शिव अवसाद में सती की मृत शरीर लेकर शिव त्र्यलोक में विचरण करने लगे थे जिसे विष्णु ने चक्र सुदर्शन के काट काट कर जमीन पर गिरा दिया वही आज शक्तिपीठ है।और सती के उसी अंग रूप में पूजा होती है।यदि जलकर भस्म बनी तो शिव क्या लेकर घूम रहे थे।'
समाधान के संदर्भ में उत्तर---
आपका सन्दर्भ सती के आग में कूदने से ही जुड़ा है । महादेव प्रथमतः यज्ञकुंड में पहुंचें और प्रसंग यह भी आता है कि असंतुलित हो कर आग की राख में सती को ढूढने लगे । विशाल यज्ञकुंड की राख शरीर मे लगा लिया । असंतुलन की स्थिति में यह स्वाभाविक क्रिया है । उससे संतोष नहीं मिला । निश्चित रूप से आग की राख ने उन्हें ऊर्जा दी और फिर वे सती के जले हुए पार्थिव शरीर को कभी सिर पर रखकर तो कभी बगल में लेकर लगे घूमने । ब्रह्मांड हिलने लगा । इसे अस्थि विसर्जन क्रिया के रूप में भी देखा जाना चाहिए ।
सिर पर रखने के कारण प्रथम पत्नी गंगा और दूसरी पत्नी पार्वती हुईं । यह प्रसंग देवीपुराण में उल्लिखित है । आगे चलकर पार्वती का गंगा से मनमुटाव भी रहा । वे महादेव से शिकायत करती हैं कि गंगा को आपने सिर पर बैठा रखा है । गंगा ने विंध्य क्षेत्र में आकर पार्वती स्वरूपा मां काली से कहा-महादेव ने यदि सिर पर बैठाया तो लोकहित और धरती की प्यास बुझाने के लिए जमीन पर भी मुझे कर दिया । यहां मनमुटाव दूर हुआ ।
आपका आध्यात्मिक ज्ञान बहुत गहरा है । आप बीच बीच में जटिल प्रश्न उठाते हैं । आपके के चिंतन में ज्ञान-गंगा विराजमान हैं । कोटिशः मंगलकामनाएं महाशिवरात्रि पर्व पर ।
-सलिल पांडेय, मिर्जापुर ।





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