रजनीकांत अवस्थी
महराजगंज/रायबरेली: उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार बनते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सबसे पहले गड्ढा मुक्त सड़कों की घोषणा की थी। जिससे आम जनता को यह लगा था कि, अब शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों की सड़कें गड्ढा मुक्त हो जाएंगी और वाहन चालकों व पैदल राहगीरों को अच्छी सड़कें मिलेंगी मगर प्रदेश के मुख्यमंत्री जी की गड्ढा मुक्त सड़कें करवाए जाने की घोषणा लोगों की निगाह में हवा हवाई साबित होती नजर आ रही है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों का हाल तो बद से बदतर हो गया है। यहां पर सड़कों का तो नामोनिशान ही मिट सा गया है। जिसमें गड्ढों के अलावा कुछ भी नहीं बचा है।
आपको बता दें कि, प्रदेश की सkड़कों को गड्ढा मुक्त करने का योगी सरकार का दावा हवा हवाई साबित हो रहा है। जी हां महराजगंज कस्बा से इन्हौना मार्ग जो जनपद रायबरेली को अमेठी से जोड़ता है महराजगंज कस्बे से मऊ की बड़ी नहर तक लगभग 10 किलोमीटर का यह मुख्य मार्ग पूरी तरह से गड्ढों में तब्दील हो गया है। जिस पर महराजगंज से रानी का पुरवा, मोन, औसेरी का पुरवा, खेरवा डेपार मऊ, मऊ से बड़ी नहर तक मुख्य मार्ग पूरी तरह से क्षतिग्रस्त है। जिस पर आए दिन सड़क दुर्घटनाएं घटती रहती हैं, बावजूद संबंधित विभाग व उच्चाधिकारी मामले को संज्ञान नहीं ले रहे हैं।
विदित हो कि, यही हाल महराजगंज विकासखंड क्षेत्र के सैकड़ों गांव को मुख्य मार्ग से जोड़ने वाली सड़कों का है। चाहे वह मऊ से सिकन्दरपुर संपर्क मार्ग हो, या डिपारमऊ से टीसा खानापुर संपर्क मार्ग हो, चाहे मोन से नारायणपुर संपर्क मार्ग हो सभी मार्ग खस्ताहाल है।
सरकार रोज सड़कों के गड्ढा मुक्त होने के नित्य नए दावे कर रही है। किंतु जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। अधिकारियों की लापरवाही कहें या सरकार की उदासीनता। जो भी हो झेलना तो आम आदमी को ही पड़ रहा है। आम आदमी की जान सदैव जोखिम में रहती है।
सड़कों की दशा को सुधारने के नाम पर प्रतिवर्ष करोड़ों की धनराशि कहां चली जाती है। यह किसी को पता नहीं। ना ही इसे जानने की जहमत कोई उठाना चाहता है। इसका परिणाम यह होता है कि, सड़कों के गड्ढे दिन प्रतिदिन बढ़ते ही जाते हैं। ऐसी स्थिति में राहगीरों की जान सदैव जोखिम में रहती है। किंतु जान हथेली पर रखकर चलना जैसे उनकी किस्मत बन गई है। आखिर फरियाद भी कहां करें। इस फरियाद का कुछ भी होने वाला नहीं।
ऐसा केवल उपर्युक्त सड़कों का हाल नहीं बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों की अधिकांश सड़कें भी कमोबेश इसी हाल में है।
महराजगंज/रायबरेली: उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार बनते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सबसे पहले गड्ढा मुक्त सड़कों की घोषणा की थी। जिससे आम जनता को यह लगा था कि, अब शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों की सड़कें गड्ढा मुक्त हो जाएंगी और वाहन चालकों व पैदल राहगीरों को अच्छी सड़कें मिलेंगी मगर प्रदेश के मुख्यमंत्री जी की गड्ढा मुक्त सड़कें करवाए जाने की घोषणा लोगों की निगाह में हवा हवाई साबित होती नजर आ रही है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों का हाल तो बद से बदतर हो गया है। यहां पर सड़कों का तो नामोनिशान ही मिट सा गया है। जिसमें गड्ढों के अलावा कुछ भी नहीं बचा है।
आपको बता दें कि, प्रदेश की सkड़कों को गड्ढा मुक्त करने का योगी सरकार का दावा हवा हवाई साबित हो रहा है। जी हां महराजगंज कस्बा से इन्हौना मार्ग जो जनपद रायबरेली को अमेठी से जोड़ता है महराजगंज कस्बे से मऊ की बड़ी नहर तक लगभग 10 किलोमीटर का यह मुख्य मार्ग पूरी तरह से गड्ढों में तब्दील हो गया है। जिस पर महराजगंज से रानी का पुरवा, मोन, औसेरी का पुरवा, खेरवा डेपार मऊ, मऊ से बड़ी नहर तक मुख्य मार्ग पूरी तरह से क्षतिग्रस्त है। जिस पर आए दिन सड़क दुर्घटनाएं घटती रहती हैं, बावजूद संबंधित विभाग व उच्चाधिकारी मामले को संज्ञान नहीं ले रहे हैं।
विदित हो कि, यही हाल महराजगंज विकासखंड क्षेत्र के सैकड़ों गांव को मुख्य मार्ग से जोड़ने वाली सड़कों का है। चाहे वह मऊ से सिकन्दरपुर संपर्क मार्ग हो, या डिपारमऊ से टीसा खानापुर संपर्क मार्ग हो, चाहे मोन से नारायणपुर संपर्क मार्ग हो सभी मार्ग खस्ताहाल है।
सरकार रोज सड़कों के गड्ढा मुक्त होने के नित्य नए दावे कर रही है। किंतु जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। अधिकारियों की लापरवाही कहें या सरकार की उदासीनता। जो भी हो झेलना तो आम आदमी को ही पड़ रहा है। आम आदमी की जान सदैव जोखिम में रहती है।
सड़कों की दशा को सुधारने के नाम पर प्रतिवर्ष करोड़ों की धनराशि कहां चली जाती है। यह किसी को पता नहीं। ना ही इसे जानने की जहमत कोई उठाना चाहता है। इसका परिणाम यह होता है कि, सड़कों के गड्ढे दिन प्रतिदिन बढ़ते ही जाते हैं। ऐसी स्थिति में राहगीरों की जान सदैव जोखिम में रहती है। किंतु जान हथेली पर रखकर चलना जैसे उनकी किस्मत बन गई है। आखिर फरियाद भी कहां करें। इस फरियाद का कुछ भी होने वाला नहीं।
ऐसा केवल उपर्युक्त सड़कों का हाल नहीं बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों की अधिकांश सड़कें भी कमोबेश इसी हाल में है।






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