आसमान से ज़मीन पर बनके महाकाल उतरे मौत के बादल

आकाश को ले गया आकाश में, धर दबोचा चमेली को और काजल भी चंगुल में फंसी--
भागो भागो आफत आई की चतुर्दिक होती रही चीख --
मिर्जापुर । अचानक यमदूतों को ज़मीन पर हाहाकार नृत्य की इच्छा हुई होगी, सो बादलों को अपना लक्जरी वाहन बनाया और सीधे उतर आए जिले के विभिन्न अंचलों में । आते ही ओलों और आंधी तूफान के ढोल मजीरों पर मौत के दूतों का भयानक नृत्य होने लगा । लोग घरों में दुबकने लगे । बचाओ बचाओ की चीख पुकार होने लगी पर यमदूत तो कलेजा यमराज के पास गिरवी कर ही आते हैं लिहाजा चीख-पुकार से पसीजे नहीं बल्कि अट्टहास के साथ हाहाकार करने लगे ।
बेशुक्रिया हुआ शुक्र--
शुक्रवार, 13 मार्च को नगर सहित जिले के विभिन्न अंचलों में आसमान से ओले के रूप में बमों की बरसात जैसे हो रही हो । सच में पर्वतीय इलाकों उत्तराखंड, शिमला की तरह बादल सड़कों, घरों के दरवाजों, आंगन, खेत-खलिहानों में उतर आए । लोगबाग दहल कर दरवाजे, खिड़कियां बंद करने लगे । लेकिन जब ये बादल मौत के दूत थे तो खाली हाथ कहां जाने वाले ? लिहाजा कइयों की जिंदगी लेकर एवं किसानों की मेहनत और अरमानों का गला घोटते नज़र आए । इन बादलों के आगे इंसान बड़ा बेबस होता दिखाई पड़ा ।
जिन्हें ले गए ये बेरहम बादल---
विंध्याचल में एक युवा होनहार 24 वर्ष के आकाश को तथा सिरसी गहरवार की 8 वर्ष की बच्ची काजल को अपना निवाला बनाया यमदूतों ने । इतने से क्षुधा शांत नहीं हुई और अहरौरा में 40 वर्ष के डॉक्टर को तो घर में घुस कर दबोच लिया । यह युवक दिलीप घर में सोया हुआ था कि एक पेड़ पर चढ़कर कूदे यमदूत और वह मौत के पंजों में फंस गया । इसी तरह विंध्याचल के पास शिवपुर की चमेली को शायद खुशबू के लिए मौत के देवता साथ ले गए ।
टूटी आस, कैसे चुकाएंगे ख़र्जा और कैसे दिलाएंगे स्कूटी-
सच में किसान किसी मां को अपने बेटे को देखकर जैसे खुशी होती है, वैसे किसान को अपना लहलहाता और भरापूरा खेत-खलिहान देखकर । फसल अच्छी हुई थी । सो किशोर उम्र के बच्चों से बाप ने वायदा किया था कि इस बार जरूर वे स्कूटी दिलाएंगे । बहुतेरे किसानों ने बेटी के व्याह का कर्जा चुकाने का साहूकारों से मोहलत ली थी । लेकिन सारे वायदे और अरमानों का गला घोंट गया बेरहम मौसम ।
अकथनीय और अवर्णनीय है दास्तान-ए-बर्बादी--
इस बर्बादी की दास्तान लिखने का कोई दावा करे तो लगेगा कि प्रथम दृष्टया वह झूट्ठा है । शुक्रवार के पूर्व भी छानबे, लालगंज, हलिया में इसी तरह की बर्बादी की गूंज चल रही थी कि शुक्रवार को फिर बादलों का हो गया जानलेवा हमला । 
आसमान का दिल फटा तो धरती का भी--
जरूर प्रकृति के साथ खिलवाड़ के चलते आसमां का दिल फटा होगा तो उसके रिएक्शन से जनमानस के साथ पशु-पक्षी और परिंदों का भी कलेजा बुरी तरह फट गया है ।
भरपाई हो--
सर्वप्रथम घर-मकान से लेकर खेत-खलिहान तक में जिन किसानों की क्षति हुई है, उनको आपातकाल समझते हुए 48-72 घण्टे के अंदर मदद मिलनी चाहिए । इसमें सरकारी तंत्र को किसी भी प्रकार का खेल न करते हुए रहमदिली से सरकारी मदद देनी चाहिए ।
CSR के तहत प्राइवेट एजेंसियां भी करें मदद--
प्राइवेट सेक्टर में जितनी कम्पनियां जिले की धरती पर स्थापित होकर कमाई कर रही हैं, उनके लिए व्यसायिक प्राविधानों में जरूरी होता है सामाजिक कार्यों के लिए लाभांश से मदद करना । विंध्याचल में मुफ्त की जमीन लेकर फ्रांस की सोलर कम्पनी हो या मड़िहान, चुनार में स्थापित विविध कम्पनियों, समाजसेवा के नाम पर सुर्खियां बटोरने वाले NGO, विविध त्योहारों पर डांस कार्यक्रम आयोजित कर लुफ्त लेने वाले क्लब यदि प्रकृति के मारो की मदद में आगे नहीं आते तो फिर यह कहने में कोई संकोच नहीं कि इनकी आंखों में यदा-कदा आंसूओं और घड़ियाल के आंसुओं में कोई अंतर नहीं। 
                      -सलिल पांडेय, मिर्जापुर ।
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