अजिता श्रीवास्तव को बधाई देने ब्रज से राधा-कान्हा तो कैलाश से महादेव भागे भागे आए

सांस्कृतिक धन्यवाद में मनीष खूब नाचे, झूम के नाचे-- 
मिर्जापुर। प्रदेश की राज्यपाल आनन्दी बेन ने लोकगीतों में कजली विधा की जन्मदात्री मां विन्ध्यवासिनी के धाम क्षेत्र की गायिका अजिता श्रीवास्तव को सम्मानित क्या किया कि पूरा विंध्यधाम आनन्द के 'रत्नाकर' (सागर) में डूबता-इतराता, हिलोरें खाता पिछले एक माह से दिख रहा है । आनन्द का यह 'शुचि-स्मिता'(पवित्र-मुस्कान) भाव नगर के अति विशिष्ट लोगों के चेहरे पर सांस्कृतिक धन्यवाद कार्यक्रम में तैरता हुआ दिखाई पड़ा ।
स्प्रिंग होटल में मन भी स्प्रिंग की तरह उछलता रहा ।---
रविवार को लोकगीतों की साधिका और उपासिका अजिता का फलों से लदकर झुके वृक्षों की तरह विनम्र रूप उस वक्त दिखा जब राज्यपाल से एवार्ड मिलने के बाद उन्होंने लोगों से सम्मान पाने की ख्वाहिश के बाजाय उल्टे 'Thank's मिर्जापुर' का आयोजन अपनी ओर से किया । 
जरूर अजिता श्रीवास्तव ईश्वरीय कृपा-तरंगों के बीच रहती हैं, सो सदैव सूर्य जैसे प्रकाश देता है, वृक्ष जैसे आक्सीजन देते हैं, वैसे अजिता हमेशा दाताभाव में रहती हैं और बहुतेरे उनके अनुगामी बनके परजीवी तथा याचक भाव में रहते हैं । अजिता के इस स्वरूप पर मुग्ध होकर ही मां विन्ध्यवासिनी प्रसन्न हुईं तथा पहली बार यहां से किसी को अकादमी पुरस्कार मिला ।
शुभकामनाओं का उड़ता रहा रंग-गुलाल--
 अजिता के इस कार्यक्रम में शुभकामनाओं का रंग गुलाल नगर विधायक श्री रत्नाकर मिश्र, मझवां विधायक शुचिस्मिता मौर्य, नगरपालिका परिषद के अध्यक्ष मनोज कुमार जायसवाल, बहुआयामी क्षेत्रों का नब्ज पर हाथ रखने वाले आर्थोपेडिक सर्जन डॉ नीरज त्रिपाठी, कम उम्र के होकर उच्च चिंतन में पारंगत दिवाकर मिश्र, आर्यकन्या इ0 कालेज की अध्यापिका अर्चना, सामाजिक क्षेत्र में विशिष्ट स्थान रखने वाले विभूति मिश्र, कृष्णा कोचिंग के संचालक निर्भय अग्रवाल आदि बहुतेरों ने उड़ाया । सबकी ख्वाहिश दिखी कि अजिता को पुरस्कार का यह सिलसिला राष्ट्रीय होते अंतर्राष्टीय स्तर तक पहुंचे, ऐसा मां विन्ध्यवासिनी वरदान दें ।
कृष्ण ब्रज से तो महादेव कैलाश से भागे भागे आए वरदान देने---
दो दिन पहले चक्रवाती आंधी से दु:खित मन को सुकुन देने का काम ब्रज के कान्हा बनकर कत्थक सम्राट कहे जाने वाले स्व महेश्वर पति के शिष्य मनीष शर्मा और उपासना जोया क्या आईं कि नृत्य-गीत और संगीत ने यह सिद्ध कर दिया कि प्रकृति की प्रतिकूलताओं से इनमें लड़ने की जिस क्षमता का उल्लेख किया गया हैं, वह पूरी तरह वैज्ञानिक है ।
राधा और कान्हा इक-दूजे को रंग लगाते भाव नृत्य प्रस्तुत कर रहे थे लेकिन रंग पूरे जनसमुदाय पर चढ़ता नज़र आया । इक नजर में सब गज़ब सा लग रहा था । इसी के साथ मनीष शर्मा ने महादेव को कैलाश से बुला तब लिया जब नटराज बन वे खूब नाचे और झूम के नाचे । 
अद्भुत रहा कार्यक्रम--
कार्यक्रमों में यदि नम्बर देने की बारी यदि आती तो परीक्षक मंत्र मुग्ध इतना हो गया था कि 100 नम्बर के पूर्णांक में 101 नम्बर प्राप्तांक कालम में लिख बैठता। श्रीमती अजिता के भांजे श्री जय श्रीवास्तव सबको उत्तरीय पहनाने में ही आनन्दित हो रहे थे ।
                       -सलिल पांडेय, मिर्जापुर ।
©लेखक की अनुमति के बिना नाम एडिट कर किसी अन्य का नाम लिखकर प्रयोग करना दण्डनीय है ।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ