ये धर्मगुरु नहीं बल्कि गुरुघण्टाल जैसे लग रहे ।----
मिर्जापुर। देश के PM से लेकर DM तक के होशोहवास गायब है वैश्विक बीमारी कोरोना को लेकर । PM राष्ट्र के नाम सन्देश दे रहे हैं कि, भीड़भाड़ वाली जगह कोरोना के लिए बहुत मुफीद जगह है। लिहाजा भीड़ न करें और न भीड़ का हिस्सा बने । बल्कि जनता कर्फ्यू का माहौल बनाएं । इसी तरह DM जो किसी भी जिले के विकास और ला एंड ऑर्डर के लिए मुख्य जिम्मेदार अधिकारी होते हैं, वे हर सड़क, हर डगर, हर गली-हर मुहल्ले में निगरानी कर रहे कि कहीं कोरोना तो आकर डेरा तो नहीं जमा रहा है, वहीं मुख्य इलाके सिविल लाइन में बुधवार से चल रहे उर्स में इतनी भीड़ हो रही है कि राह चलना मुश्किल हो गया है ।
घोड़े शहीद एवं कछवा में किसके परमिशन से लगा है मेला-ठेला ?- -
नगर में कचहरी से मात्र 200 कदमों की दूरी पर, जहां से आफिसर्स के बंगले शुरू हो जाते हैं, ठीक सामने आफिसर्स क्लब है जो कभी कमिश्नर का दफ्तर/आवास हुआ करता था, के पास उर्स पर भारी भीड़ रही । वहां से WHO के सारे मानकों को रौंदते हुए लोगों को पुण्य कमाने के लिए बुलाया जा रहा है और आश्वस्त किया जा रहा है कि उनके मेले को परमिशन है । किसका परमिशन है, यह नहीं स्पष्ट हो पा रहा था । कोई यह टिप्पणी करते सुना गया कि कोरोना वायरस से ही शायद परमिशन मिला है कि वह यहां नहीं आएगा !
कछवां में भी उर्स--
गुरुवार, 19 मार्च को ही कछवां में यही स्थिति रही । बुधवार को शिकायत मिलने पर SDM, सदर भागे दौड़े गए और मेला रुकवा भी दिया, लेकिन उनके लौटने के बाद फिर मेला रंगत में आ गया । जबकि घोड़े शहीद में बुधवार को सिटी मजिस्ट्रेट ने साउंड बंद करा दिया था, बावजूद इसके गुरुवार को सब कुछ चलता रहा। किसी भी धर्म का मेला-ठेला बंद कर दिया जा रहा है। लेकिन यहां के कतिपय धर्मगुरु धर्मगुरु न होकर गुरुघण्टाल लग रहे हैं । धर्मगुरु होते तो उन्हें जनता की सेहत की चिंता पहले होती ।
-सलिल पांडेय, मिर्जापुर ।
मिर्जापुर। देश के PM से लेकर DM तक के होशोहवास गायब है वैश्विक बीमारी कोरोना को लेकर । PM राष्ट्र के नाम सन्देश दे रहे हैं कि, भीड़भाड़ वाली जगह कोरोना के लिए बहुत मुफीद जगह है। लिहाजा भीड़ न करें और न भीड़ का हिस्सा बने । बल्कि जनता कर्फ्यू का माहौल बनाएं । इसी तरह DM जो किसी भी जिले के विकास और ला एंड ऑर्डर के लिए मुख्य जिम्मेदार अधिकारी होते हैं, वे हर सड़क, हर डगर, हर गली-हर मुहल्ले में निगरानी कर रहे कि कहीं कोरोना तो आकर डेरा तो नहीं जमा रहा है, वहीं मुख्य इलाके सिविल लाइन में बुधवार से चल रहे उर्स में इतनी भीड़ हो रही है कि राह चलना मुश्किल हो गया है ।
घोड़े शहीद एवं कछवा में किसके परमिशन से लगा है मेला-ठेला ?- -
नगर में कचहरी से मात्र 200 कदमों की दूरी पर, जहां से आफिसर्स के बंगले शुरू हो जाते हैं, ठीक सामने आफिसर्स क्लब है जो कभी कमिश्नर का दफ्तर/आवास हुआ करता था, के पास उर्स पर भारी भीड़ रही । वहां से WHO के सारे मानकों को रौंदते हुए लोगों को पुण्य कमाने के लिए बुलाया जा रहा है और आश्वस्त किया जा रहा है कि उनके मेले को परमिशन है । किसका परमिशन है, यह नहीं स्पष्ट हो पा रहा था । कोई यह टिप्पणी करते सुना गया कि कोरोना वायरस से ही शायद परमिशन मिला है कि वह यहां नहीं आएगा !
कछवां में भी उर्स--
गुरुवार, 19 मार्च को ही कछवां में यही स्थिति रही । बुधवार को शिकायत मिलने पर SDM, सदर भागे दौड़े गए और मेला रुकवा भी दिया, लेकिन उनके लौटने के बाद फिर मेला रंगत में आ गया । जबकि घोड़े शहीद में बुधवार को सिटी मजिस्ट्रेट ने साउंड बंद करा दिया था, बावजूद इसके गुरुवार को सब कुछ चलता रहा। किसी भी धर्म का मेला-ठेला बंद कर दिया जा रहा है। लेकिन यहां के कतिपय धर्मगुरु धर्मगुरु न होकर गुरुघण्टाल लग रहे हैं । धर्मगुरु होते तो उन्हें जनता की सेहत की चिंता पहले होती ।
-सलिल पांडेय, मिर्जापुर ।


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