कोरोना को लेकर संचार माध्यमों में ज्यादा सक्रियता कहीं जनता कर्फ्यू प्रशासनिक कर्फ्यू में न बदल जाए ?

मिर्जापुर । संचार माध्यमों, खासकर सोशल मीडिया पर कोरोना को लेकर जनता-कर्फ्यू मामले में महा-उत्साह है तो इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में व्यापारिक हितों को साधने के साथ सनसनी और प्रिंट मीडिया में छोटी-मोटी संस्थाओं को हाई-लाइट करने की प्लानिंग अधिक झलकती नज़र आई । किसी विशेष संगठन ने नगर और जिले में धरातल पर उतर कर जागरूक करने का काम इसलिए नहीं किया, क्योंकि अब कोई भी महा-अभियान सिर्फ संचार माध्यमों तक सिमट कर रह जाता है ।
अहर्निश चल रहे पोस्ट--
कोरोना को लेकर हजारों-हजार पोस्ट सोशल मीडिया पर अहर्निश (दिन तो दिन पूरी की पूरी रात) झोंके जा रहे हैं । लेकिन आमजनता कि कठिनाई पर फिलहाल ध्यान न के बराबर है । लिहाजा सोशल मीडिया पर मास्क और सेनिटाइजर को लेकर हल्लाबोल चल रहा है । कोई संगठन फिलहाल पत्रक आदि लेकर प्रशासन के दर पर पहुंचता नहीं दिखा ।
पोस्ट की बरसात- -
सोशल मीडिया पर पोस्ट डालकर भले लोग ब्लैक मार्केटिन्ग के खिलाफ मन की भड़ास निकाल दे रहे हैं लेकिन हकीकत यह है कि इतने पोस्ट बादल फटने की तरह बरस रहे हैं कि कौन किसका पोस्ट पढ़े और किसका न पढ़े ।
नतीजा यह है
इस तरह एकांगी प्रयास के चलते मुख्यालय पर शनिवार को मास्क की ब्लैक मार्केटिंग होती रही। इक्के दुक्के दुकानों पर कोई चेकिंग करने गया तो दुकानदार से कुछ मास्क आदि खुद लेकर चलता बना । डेटॉल कम्पनी का सेनिटाइजर संभवतः कोरोना के डर से जल्दी बाहर निकलने को तैयार नहीं दिखा । सद्य: अस्तित्व में आई कम्पनियों के सेनिटाइजर जरूर कोरोना से लड़ने के लिए ऊंचे दाम पर ललकारते दिखे । 
सेनिटाइजर से खतरा--
सोशल मीडिया में किसी स्थान पर सेनिटाइजर से खतरे की खबर आने से दहल भी उत्पन्न हो गई । हुआ यह है कि कोई महिला सेनिटाइजर का प्रयोग कर चूल्हा जलाने गई तो उसके हाथ में आग लग गई । सेनिटाइजर में स्प्रिट है । वह सेनिटाइजर के बाद हाथ नहीं धोई होगी, इससे यह हादसा हो गया । इस पर जानकारी की जरूरत है ।
आधा लीटर का 800/-में---
कतिपय दुकानदार मजबूरी का लाभ लेते हुए आधा लीटर का 800/- में बेचते रहे। जिलाधिकारी ने अपील की कि यदि कोई दुकानदार ज्यादा ले तो फौरन प्रशासन को बताएं । लेकिन बताने वाला कोई आगे नहीं आया ।
प्राइवेट अस्पताल अधिगृहीत हों--
जिस प्रकार चुनाव और आपदा में विद्यालयअधिगृहीत होते हैं । वैसे इस समय प्राइवेट अस्पताल अधिगृहीत होने चाहिए । इन अधिगृहीत अस्पतालों में रूटीन इलाज हो और सरकारी में कोरोना का ।
जनता-कर्फ्यू---
रविवार, 22 मार्च को जनता कर्फ्यू में प्रतीत होता है कि प्रशासन को ही उतरना पड़ेगा।  क्योंकि किसी व्यापारिक क्षेत्र के संगठन शनिवार की रात तक सक्रिय नहीं दिखे । न कपड़ा व्यवसाय, न दवा, न बर्तन, न ज्वेलरी आदि किसी तरह के संगठन के पदाधिकारी कोरोना को लेकर बात तो खूब करते दिखे लेकिन बंद की अपील प्रशासन को ही करनी पड़ी । लिहाजा जनता कर्फ्यू के बजाय यह प्रशासनिक कर्फ्यू का रूप लेते दिख रहा है ।
                      -सलिल पांडेय, मिर्जापुर ।
©कॉपीराइट एक्ट का उल्लंघन दंडनीय है।

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