राजा उत्तानपाद की तरह हर व्यक्ति की दो पत्नियां होती हैं

विमाता से अपमानित ध्रुव ने की थी 21 दिनों की साधना--
21 दिनों में मौन की साधना से वाह्य बीमारियों को परास्त किया जा सकता है---
मिर्जापुर । कोरोना के आतंक के चलते 21 दिन के लॉक-डाउन के जो दिन हैं, उसे भी नवरात्र की आराध्या मां दुर्गा की कृपा का फल मानकर साधना और सफलता के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है ।
राजा उत्तानपाद की तरह हर व्यक्ति की दो पत्नियां-- 
धर्म कथाओं में राजा उत्तानपाद का उल्लेख हैं । उनकी दो पत्नियां थीं । हर व्यक्ति की दो प्रवृतियां होती हैं । पहली सुनीति और दूसरी सुरुचि । सुनीति का आशय सुंदर नीति । मतलब नीतिपूर्ण जीवन जो आंतरिक शुचिता से मतलब रखता है और सुरुचि का आशय सुंदर रुचि यानी भौतिक (वाह्य) स्तर की रुचि में लगना ।
ध्रुव ने 21 दिन तपस्या की ---
वाह्य सुंदरता के चलते राजा उत्तानपाद ने ध्रुव को बहिष्कृत कर दिया । ध्रुव की माता सुनीति ने कहा घबराओ नहीं । जाओ, जंगल में । वहां एकांत होकर जगतपिता को याद करो, वे जरूर आएंगे । 
नारायण दौड़ के आ गए---
जंगल में पहले 3 दिन अन्न खाकर, अगले 3 दिन फल, फिर 3 दिन पत्ता, उसके बाद पानी, फिर 3 दिन हवा खाने के बाद ध्रुव ने वायु भी त्याग दिया यानि पूर्ण प्राणायाम करते कुंडलनी जगा ली । ध्रुव की तपस्या-साधना की खबर तपस्या-लोक वैकुंठ तक पहुंच गई । भागे-भागे विष्णु जी आए और ध्रुव को गोद में बैठा लिया ।
यह मौन-साधना का काल है--
भारत सरकार ने 21 दिन का जो समय दिया है । यह नवरात्र का अवसर भी है तो इसका सदुपयोग करने का यह वक्त है । 
बड़े बड़े महापुरुष तेजस्वी हुए---
आजादी के दौरान गांधी, सुभाषचंद बोस, पं जवाहर लाल नेहरू, पं कमलापति त्रिपाठी जैसे महापुरुषों का जेल में अध्ययन तथा लिखी पुस्तकें अद्भुत हैं । 'गांधी का स्वराज', सुभाष बाबू की 'तरुण के स्वप्न', नेहरू की ' डिस्कवरी आफ इंडिया' कमलापति जी की 'बंदी की चेतना' आदि अद्भुत एवं ज्ञानभरी पुस्तकें इसलिए लोकप्रिय  हुईं कि जेल में उन्होंने मौन-साधना' की ।

कोरोना को भी शिकस्त दे सकता है मौन ---
मौन से शरीर की आंतरिक ऊर्जा जागृत होती है। मेटाबॉलिज्म, औरा, आभामंडल में चमात्कारिक वृद्धि होती है । स्वामीरामकृष्ण का आभामंडल तो इतना प्रगाढ़ था कि उनके आभामंडल के दायरे में आने से हिन्सक जानवर हिंसा भूल जाते थे । अतः इस 21 दिन में जीवन को 21 बनाया जा सकता है ।
-सलिल पांडेय, मिर्जापुर ।
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