कोरोना: क्या कहते हैं तीर्थपुरोहित एवं धर्मगुरु !

मिर्जापुर। कोरोना को लेकर उपजे महासंकट से मुकाबला करने के लिए धर्म-विशेषज्ञों ने दवा के साथ दुआ को भी अपनाने पर जोर दिया है ।
विंध्याचल के तीर्थपुरोहित एवं नगर विधायक क्या कहते हैं---
नगर विधायक श्री रत्नाकर मिश्र सिर्फ राजनीतिज्ञ ही नहीं बल्कि धर्मशास्त्रों के गहरे जानकर हैं । उनका मानना है कि वैदिक मंत्रों एवं यज्ञ-अनुष्ठानों में महामारी से लड़ने की अभूतपूर्व क्षमता होती है । उससे जैसे जैसे लोग दूर होते गए, महामारी को उतना ही आतंक मचाने का अवसर मिलता गया । श्री मिश्र का सुझाव है कि जप-तप के साथ शंखनाद, घण्टा-घड़ियाल तथा ताली बजाने से वायुमंडल को विषाक्त करने वाले तत्व नष्ट होते हैं ।
हवस से रहें दूर--
नगर विधायक श्री मिश्र हवस के बजाय संयम को श्रेष्ठ बताते हुए दलील देते हैं कि आज का मनुष्य हर क्षेत्र में इतना भूखा है कि ईश्वर द्वारा जीवन भर के लिए दिए गए कोटे को बहुत ही जल्द इस्तेमाल कर जा रहा है । पहले लोग जीने के लिए खाते थे जबकि अब खाने के लिए जीते हैं । श्री मिश्र ने कहा कि मनुष्य को धर्मानुसार अर्थ कमाना तथा उसका उपभोग करना चाहिए । इसीलिए पुरुषार्थ चतुष्टय में सबसे पहले धर्म को रखा गया, फिर अर्थ, काम और मोक्ष को स्थान मिला है ।
बूढ़ेनाथ मंदिर के महन्थ के विचार : वैश्विक खलनायक है चीन---
मंदिरों के देशव्यापी कपाट बंद होने के चलते बूढ़ेनाथ मंदिर का भी कपाट बंद करते हुए मंदिर के महन्थ डॉ योगानन्द गिरि अंतर्मन से आहत दिखे । वे चीन को वैश्विक खलनायक मानते हैं । डॉ गिरि के पास इसके तर्क हैं । उनका मानना है कि विश्वभर में नकली, मिलावटी, स्वास्थ्य को आघात पहुंचाने वाले खाद्य तथा अन्य पदार्थों से मनुष्य शरीर को कोरोना के निवास लायक घर बनाया और बाद में विषाणु हमले की योजना बनाई । लेकिन दूसरों के लिए गड्ढा खोदने वाला चीन उसी गड्ढे में सबसे पहले खुद गिरा और अब पूरे विश्व के समक्ष संकट खड़ा कर दिया है । 
श्रीहनुमानमंदिर, गैवीघाट के पुजारी के विचार ---
मंदिर के पुजारी महात्मा रामानुजदास मानते हैं कि मानव जाति पर हर काल में आक्रमण होता रहा है । भस्मासुर, जलन्धर, रावण, कन्स, पूतना, कालियानाग आदि असुर भी कोरोना टाइप के विषाणु थे, जिनका अंत विष्णु जी, महादेव, श्रीराम एवं श्रीकृष्ण आदि ने समय समय पर किया था । मनुष्य को अपनी सजगता से कलिकाल के कोरोना को नष्ट करने के लिए चिकित्सकों, राजनेताओं, प्रशासनिक मशीनरी के साथ कदम से कदम मिलाकर चलना चाहिए ।
-सलिल पांडेय/विभाव पांडेय
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