जलती होलिका देखि के, खबरची दिया हंसाय । रमुआ मांगे गुड़ की बट्टी, सेठवा दिया जलाय

जानलेवा किरौना 'कोरोना' को त्रिशंकु बनाने का लांच हुआ फार्मूला---
मिर्जापुर । होलिका में आग की खोज-खबर लेने खबरची को ठठाका लगाते देख जब पूछा कि आप के ठठाका का कारण क्या है ? इसी के साथ एक और सवाल की चिनगारी लगाई कि इस दौर में जब हंसी श्रापित होकर पाताललोक चली गई है, मुट्ठी भर को छोड़ सबके चेहरे लटके, झटके, मुरझाए लग रहे हैं तो खबरची साहब आप सत्ताधारियों की तरह कभी हंस रहे हैं, कभी मुस्कुरा रहे हैं ? आप तो उलटवासी सन्त कवि कबीर को पिछाड़ दिए ?
 मिलगई !---
खबरची बोले-मिल गई । तो स्वाभाविक था कि पूछा जाए कि क्या मिल गई ? क्या खोया था जो मिल गई ? खबरची ने शायराना अंदाज में फिर उत्सुकता बढ़ाई कि जिसके लिए दिन भर परेशान था वह मिल गई । इस पर लगा कि वे बुझौव्वल का खेल रहे हैं ? फिर खुद ही जवाब दिया कि 'खबर मिल गई ।'
 सुबरनको खोजत फिरत, कवि व्यभिचारी चोर...---
हर हल्के का अपना अपना अंदाज होता है 'सुबरन को खोजत फिरत कवि व्यभिचारी चोर' की तरह । अर्थ जो न जानते हो उनके लिए कि कवि सुंदर शब्द, रामरहीम, आसाराम जैसे लोग नारी-सौंदर्य और चोर किस्म का व्यक्ति उसमें 379 का वस्तु चोरी करने वाला ही नहीं हर तरह के अवैध काम करने वाले चोर टाइप के लोग रुपया पैसा के चक्कर में पड़े रहते हैं । खबरची को खबर मिल गई थी लिहाजा ठठाका लगना ही था ।
 कैसीथी खबर ?---
जहां 60 से 70 परसेंट लोग किसी प्रकार पेट भरते हो । उनके खाने की क्वालिटी ऐसी है कि उनके शरीर का प्रतिरक्षण तंत्र लचर सिपाही-दरोगा की तरह है जिसे अपराधी भी भाव नहीं देते। यानि उनके शरीर में रोगों से लड़ने की क्षमता नहीं है उनसे गूगल लगायत ह्वाट्सएप तक पर कहा जा रहा कि होलिका में घी, कर्पूर, गुड़, लौंग इलायची होलिका में जलाओ जबकि इस पर तो सदी के महानायक अमिताभ बच्चन का एकाधिकार है और होली में ललकार कर अभिनेता संजीव कुमार को चिढ़ा रहे हैं कि ' लौंग इलायची का बीड़ा लगाया, खाए गोरी का यार (खुद) बलम (संजीव कुमार) तरसे रंग बरसे' की अलाप लगा रहे हैं ।
 क्योंजलाएं ?---
यह सब जलाते चीन से चला बहुराष्ट्रीय दवा कम्पनियों का सीईओ 'मिस्टर कोरोना' आकाश और धरती के बीच में त्रिशंकु की तरह लटका रहेगा और सभी लोग राजी-खुशी होली मना सकेंगे ।
 सेठ ने गुड़ दिया जलाय---
होलिका के आसपास प्रायः BPL कार्ड धारक ही डेरा जमाए रहते हैं । एक सेठ जी आधुनिक सोशल मीडिया से लेकर पुरातन प्रिंट मीडिया तक पर कोरोना को एक खतरनाक किरौना बना दिए जाने से चिंतित दिखे । वे उसको त्रिशंकु बनाने के लिए झोला लिए हैं । जैसे ही झोले से गुड़ निकाला, पास खड़े रामू ने सेठ जी से कहा-एक दो बट्टी मुझे दे दीजिए, दो दिन से न काम मिला और न  पेट भरने को राशन पानी लेकिन सेठ जी ने टेढ़ी नजर रामू पर डाली, उन्हें लगा कि यह भी कोई किरौना ही है, मुंह फेर झोले में रखा सामान निकाल निकाल कर होलिका में डालते गए । रामू और उसके टाइप के लोग सेठ जी को ही कोरोना कीटाणु की तरह देखने लगे जिस कोरोना को व्यापार जगत, सरकार, मीडिया सबने ने यमराज का प्रिय दूत बना दिया है ।
  फिर मायूस हुआ खबरची---
थोड़ी देर हंसने के बाद खबरची मायूस हो गया क्योंकि उसके प्रबंध तंत्र ने कोरोना को हिरण्यकश्यप की तरह जानलेवा बनाने का आदेश दिया है क्योंकि दवा बनाने वाली कम्पनियों से खर्चा पानी मिलता रहे ।
                       -सलिल पांडेय, मिर्जापुर ।
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