शिवाकान्त अवस्थी
महराजगंज/रायबरेली: मुझे गर्व है कि, मैं पत्रकार हूं। देश कोरोना वायरस के संक्रमण से जूझ रहा है और सरकार के समक्ष एक संकट है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनता कर्फ्यू का आह्वान किया है। लोग इसका पालन भी कर रहे है। राष्ट्रहित में यह आवश्यक भी है। मगर डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ, पुलिस और पत्रकार की समाज के प्रति बड़ी जिम्मेदारी है।
आपको बता दें कि, संक्रमण के इस दौर में जोखिम तो है ही लेकिन आपको लेकर मेरी नैतिक जिम्मेदारी भी बनती है कि, हालातों को प्रामाणिक रूप से रूबरू कराने के लिए मुझे तो निकलना ही होगा, ताकि अगले दिन आपको पता लगे कि, भारत जीत गया और कोरोना हार गया है। हो सके तो शाम पांच बजे दो तालियां पत्रकारों के लिए भी बजा देना। हम भ्रांतियों के नहीं वास्तविकता के पक्षधर हैं।
यही विश्वास हमें आपसे जोड़े रखना है। हमारा आपका रिश्ता भी अटूट है। वैश्विक महामारी के शमन के लिए आपके धैर्य की अग्निपरीक्षा है, तो मेरे लिए इसकी अनिवार्यता। अंत में इतना ही कहना चाहूंगा कि "हम तो निकलेंगे, मगर आप मत निकलना।
महराजगंज/रायबरेली: मुझे गर्व है कि, मैं पत्रकार हूं। देश कोरोना वायरस के संक्रमण से जूझ रहा है और सरकार के समक्ष एक संकट है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनता कर्फ्यू का आह्वान किया है। लोग इसका पालन भी कर रहे है। राष्ट्रहित में यह आवश्यक भी है। मगर डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ, पुलिस और पत्रकार की समाज के प्रति बड़ी जिम्मेदारी है।
आपको बता दें कि, संक्रमण के इस दौर में जोखिम तो है ही लेकिन आपको लेकर मेरी नैतिक जिम्मेदारी भी बनती है कि, हालातों को प्रामाणिक रूप से रूबरू कराने के लिए मुझे तो निकलना ही होगा, ताकि अगले दिन आपको पता लगे कि, भारत जीत गया और कोरोना हार गया है। हो सके तो शाम पांच बजे दो तालियां पत्रकारों के लिए भी बजा देना। हम भ्रांतियों के नहीं वास्तविकता के पक्षधर हैं।
यही विश्वास हमें आपसे जोड़े रखना है। हमारा आपका रिश्ता भी अटूट है। वैश्विक महामारी के शमन के लिए आपके धैर्य की अग्निपरीक्षा है, तो मेरे लिए इसकी अनिवार्यता। अंत में इतना ही कहना चाहूंगा कि "हम तो निकलेंगे, मगर आप मत निकलना।

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