रजनीकांत अवस्थी
महराजगंज/रायबरेली: मौसम का मिजाज एक बार फिर बिगड़ गया और पूरे दिन रुक रुक कर बरसात होती रही। जिससे जहां बिदा हो रही ठंड के पून: लौट आने के आसार दिखे हैं। वहीं बची खुशी फसलों विशेषकर आम की फसल को बड़ा खतरा पैदा हो गया है। जिसको लेकर किसानों के चेहरे लटक गए हैं।
आपको बता दें कि, इस बार मौसम का मिजाज किसी की समझ में नहीं आ रहा है। चैत माह की शुरूआत के बाद पुराने लोगों को हल्की गर्मी का एहसास हो जाता था और पंखे भी आहिस्ता आहिस्ता लोग शुरू कर देते हैं। लेकिन इस बार हर दूसरे तीसरे (दो-तीन) दिन बीतने के बाद होने वाली बारिश से मौसम में अभी भी ठंड बनी हुई है।
बीते बृहस्पतिवार को हालांकि दिन में गर्मी महसूस हुई लेकिन शुक्रवार की सुबह से ही जोरदार हवाएं चलने के साथ ही मौसम का रुख बदला और दिन में तीन चार बार बरसात हुई। जिससे पारा और नीचे चला गया। मौसम के बिगड़े मिजाज से सबसे ज्यादा नुकसान गेहूं, सरसों, आलू की फसलों को हुआ। वही खेतों में खड़ी मटर की फसल भी क्षतिग्रस्त हो गई है।
इस बार हालांकि आम के पेड़ों पर बौर काफी विलंब से आए थे। लेकिन लगातार बरसात के साथ तेज हवाओं के झोंको और ओले गिरने तथा फिर बरसात होने से आम के अधिकतर बौर टूट कर नीचे गिर गए हैं। जो बचे हैं उन्हें भी बीमारी लगने का खतरा पैदा हो गया है। साथ ही साथ ही जिन लोगों ने बरसात को नमस्ते कर के गर्म कपड़े बक्से में बंद कर दिए थे। पारा गिरने के साथ लोगों को पुनः बक्से खोलकर गर्म कपड़े बाहर निकालने पड़े है।
क्षेत्र के गांव हसनपुर के रहने वाले किसान मनीष दीक्षित बताते हैं कि, बेमौसम हुई बरसात से किसान अधमरा हो चुका है। जिस प्रकार खेतों में पराली जलाने पर सरकार के आदेश पर प्रशासन ने किसानों को दंडित कर जुर्माना ठोक था, उसी प्रकार तेज हवाओं के साथ बेमौसम हुई बरसात और ओलों से नष्ट हुई फसलों का मुआवजा बगैर किसानों की मांग के सरकार को अभिलंब देना चाहिए। जिससे अधमरे बैठे किसान के चेहरे पर मुस्कान लौटाई जा सके। किसान मनीष दीक्षित का मानना है कि, बेमौसम हुई बरसात में लगभग 60 फीसदी किसान की फसलें नष्ट हो चुकी है। शेष बची 40 फ़ीसदी फसलें खराब मौसम के पुनः वापसी करने के कारण नष्ट होती प्रतीत दिखाई दे रही है।
महराजगंज/रायबरेली: मौसम का मिजाज एक बार फिर बिगड़ गया और पूरे दिन रुक रुक कर बरसात होती रही। जिससे जहां बिदा हो रही ठंड के पून: लौट आने के आसार दिखे हैं। वहीं बची खुशी फसलों विशेषकर आम की फसल को बड़ा खतरा पैदा हो गया है। जिसको लेकर किसानों के चेहरे लटक गए हैं।
आपको बता दें कि, इस बार मौसम का मिजाज किसी की समझ में नहीं आ रहा है। चैत माह की शुरूआत के बाद पुराने लोगों को हल्की गर्मी का एहसास हो जाता था और पंखे भी आहिस्ता आहिस्ता लोग शुरू कर देते हैं। लेकिन इस बार हर दूसरे तीसरे (दो-तीन) दिन बीतने के बाद होने वाली बारिश से मौसम में अभी भी ठंड बनी हुई है।
बीते बृहस्पतिवार को हालांकि दिन में गर्मी महसूस हुई लेकिन शुक्रवार की सुबह से ही जोरदार हवाएं चलने के साथ ही मौसम का रुख बदला और दिन में तीन चार बार बरसात हुई। जिससे पारा और नीचे चला गया। मौसम के बिगड़े मिजाज से सबसे ज्यादा नुकसान गेहूं, सरसों, आलू की फसलों को हुआ। वही खेतों में खड़ी मटर की फसल भी क्षतिग्रस्त हो गई है।
क्षेत्र के गांव हसनपुर के रहने वाले किसान मनीष दीक्षित बताते हैं कि, बेमौसम हुई बरसात से किसान अधमरा हो चुका है। जिस प्रकार खेतों में पराली जलाने पर सरकार के आदेश पर प्रशासन ने किसानों को दंडित कर जुर्माना ठोक था, उसी प्रकार तेज हवाओं के साथ बेमौसम हुई बरसात और ओलों से नष्ट हुई फसलों का मुआवजा बगैर किसानों की मांग के सरकार को अभिलंब देना चाहिए। जिससे अधमरे बैठे किसान के चेहरे पर मुस्कान लौटाई जा सके। किसान मनीष दीक्षित का मानना है कि, बेमौसम हुई बरसात में लगभग 60 फीसदी किसान की फसलें नष्ट हो चुकी है। शेष बची 40 फ़ीसदी फसलें खराब मौसम के पुनः वापसी करने के कारण नष्ट होती प्रतीत दिखाई दे रही है।

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