जन-स्वास्थ्य, शिक्षा-दीक्षा, आर्थिक सुदृढ़ता और सामाजिक ताने-बाने को ध्वस्त करने की कोशिश में लगे कोरोना के खात्मे के लिए नाभि में बाण मारने की प्लानिंग का समय आ गया है । इसके लिए महर्षि पतंजलि के नाभि सुदृढ करने के ज्ञान को प्रथमत: अमल में लाने की जरूरत है ।
सबकी नाभि में अमृत- नाभि का स्थान नभ (गगन) जैसा है । केवल रावण के ही नहीं बल्कि हर व्यक्ति की नाभि में अमृत होता है । ऐसा नहीं कि श्रीराम को इसका पता नहीं था । दरअसल अमृत का यह कुंड अति काम, क्रोध, मोह, लोभ से सूख जाता है । इन बुराइयों के प्रतीक रावण के बारे में प्रथम दृष्टया श्रीराम की यही धारणा थी । लेकिन विभीषण को महत्ता देने के उद्देश्य से उन्होंने यह बात इसलिए मानी ताकि यह सन्देश जन-जन में जाए कि नाभि के कुंड की कितनी महत्ता है ।
बुराई के रास्ते चलने पर नाभि में जहर की उत्पत्ति- मां की नाभि से मिले जीवन में अमूल्य शक्ति नाभि में ही रहती है । महर्षि पतंजलि को इसका ज्ञान था, सो ऋषि ने कुंडलिनी शक्ति जागृत करने के लिए योग-विद्या उपहार स्वरूप प्रदान की । यदि इसमें सफलता मिलती है तो फिर नाभि के पास पीयूष (अमृत) की नदी बहने लगती है । इस प्राणायाम के जरिए सहस्रारचक्र (पीनियल ग्लैंड) से मस्तिष्क में पीयूष वर्षा कराई जा सकती है। यह ग्लैंड नवजात शिशु के सिर का वह स्थान है जो अति सुकोमल होता है ।
वाल्मीकि एवं गोस्वामी तुलसीदास को हुई थी- पीयूष वर्षा इन ऋषियों के अलावा अनगिनत ऋषियों को हुई थी । ऋषि प्रचेता के पुत्र रत्नाकर (वाल्मीकि का पूर्व नाम) इसी विद्या के बल पर डकैत से महर्षि हो गए। वरना जो मरा जप सकता हो, वह राम भी जप सकता है । लोग जिह्वा से राम जपते हैं महर्षि नाभि से जपने लगे थे । महाप्राण निराला रत्नावली काव्यग्रन्थ में जो संकेत देते है वह गोस्वामी जी की कुंडलिनी शक्ति जागृत होने का भाव प्रदर्शित करता है ।
गांव-गांव में तैनात हों योग-मित्र-इस संबन्ध में मिर्जापुर के आर्थोपेडिक सर्जन तथा सामाजिक टूटन को जोड़ने में दक्ष डॉ नीरज त्रिपाठी सलाह देते है कि गांव-गांव में इम्यून सिस्टम (रोग प्रतिरोधक शक्ति) को सशक्त करने के लिए योग मित्र नियुक्त होने चाहिए। आशा कार्यकर्तियों, बेसिक हेल्थ वर्कर तथा स्किल इंडिया के तहत विभिन्न पदों पर जीव-विज्ञान आदि के स्नातकों को प्रशिक्षित कर नियुक्त किया जाए तो अनुकूल प्रभाव दिखेगा ।
हजार कोरोना लड़ नहीं सकेगा- विंध्याचल पर्वत के गुरु महर्षि अगस्त्य को धोखे आतापी नामक राक्षस ने अपने वायरस रूप के भाई को भोजन के नाम पर खिला दिया । आतापी सोच रहा था कि वातापी पेट में जाकर ऋषि को मार डालेगा । लेकिन पेट में जलन होने पर ऋषि सब समझ गए और वातापी को पेट के अंदर जलाकर भस्म कर दिया । आतापी ने ऋषि से अंत में क्षमा मांगी । कोरोना टाइप के वायरस को जलाने के लिए योग की साधना आवश्यक है ।
सलिल पांडेय मिर्जापुर
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