सुभाष पांडेय
महराजगंज/रायबरेली: प्रेस क्लब महराजगंज के संरक्षक व वरिष्ठ पत्रकार सुभाष पांडेय ने कोरोना की वैश्विक महामारी में सरकारी तंत्र के कर्मियों का 50 लाख का बीमा करने और इस महासमर में बिना किसी सुरक्षा कवच के लगातार खबरों को संकलित करने वाले पत्रकारों के प्रति अब तक कोई घोषणा न होने से दुख प्रकट किया है। श्री पण्डेय ने कहा है कि, सरकार लोकतंत्र के तीन स्तंभों की सुरक्षा के प्रति तो काफी सतर्क व चिंतित दिख रही है। लेकिन लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ कहलाने वाले पत्रकारों के लिये आखिर सरकार के पास सोचने का भी वक्त क्यों नही है? क्या? कोरोना की खबरों से जनजन को अपडेट करने वाले पत्रकारों की जान सरकारों की नजर में कोई महत्व नही रखती है ? श्री पांडेय ने कहा है कि, कोरोना के खतरे के बीच रिपोर्टिंग कर कोने कोने की खबर देशवासियो तक पहुँचा रहे पत्रकारों को कोरोना वारियर्स की लिस्ट में शामिल न करना दुखद एवं पत्रकारों का मनोबल तोड़ने वाला कदम है।
आपको बता दें कि, वरिष्ठ पत्रकार व प्रेस क्लब महराजगंज के संरक्षक सुभाष पांडे ने आगे कहा कि, उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी द्वारा प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और सोशल मीडिया (वेब पोर्टल), पत्रिकाओं के पत्रकारों को 50 लाख का बीमा कराने की मांग करने लिये रायबरेली के प्रेस क्लब महराजगंज के समस्त पदाधिकारियों की तरफ से वे हार्दिक धन्यवाद ज्ञापित कर रहे है। जिन्होंने कम से कम हम लोगो की पीड़ा को सरकार तक पहुंचाने की पहल तो की है।
सरकार द्वारा कोरोना वारियर्स के लिए 50 लाख का सुरक्षा बीमा किये जाने का फैसला स्वागत योग्य है, परंतु वारियर्स की लिस्ट में पत्रकारों का ज़िक्र न होना अत्यंत दुखद है।
कोरोना वायरस के खतरे के बीच जिस तरह से डॉक्टर, पुलिस, सफाई कर्मी अपनी जान जोखिम में डाल कर ज़िम्मेदारी निभा रहे है, वो सराहनीय है उन्हें सम्मान और सुरक्षा उपकरण के साथ ही सुरक्षा बीमा मिलना ही चाहिए।
लेकिन यहां अफसोस की बात ये है कि, संसाधन विहीन होकर भी कोरोना वायरस के खतरे के बीच पत्रकारिता के दायित्वों का पूरी ईमानदारी के साथ निर्वाहन करने वाले पत्रकारों को कोरोना वारियर्स की लिस्ट में नही जोड़ा गया।
श्री पांडे ने कहा कि अगर वे उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की ही बात करे तो विगत शनिवार को एक प्राइवेट कंपनी द्वारा लखनऊ पुलिस कर्मियों के लिए 10 हज़ार मास्क दिए गए, एक प्राइवेट बैंक ने लखनऊ पुलिस के लिए 4 क्विंटल सेनेटाइजर उपलब्ध कराया।
पुलिस, डाक्टर, सफाई कर्मी कोरोना से लड़ने वाले ऐसे योद्धा है। जिन्हें सरकार से पहले ही वेतन मिल रहा है। अब इस वैश्विक महामारी के दौरान अन्य सुविधाएं उपलब्ध करा कर उनके मनोबल को बढ़ाना अत्यंत सराहनीय है। परन्तु पत्रकार के परिवार की न तो अभी तक सरकार ने कोई सुध ली और न ही किसी प्राइवेट संस्था ने, भले ही 50 लाख का बीमा न किया जाए, लेकिन दिन रात मेहनत कर रहे मान्यता प्राप्त एवं गैर मान्यता प्राप्त पत्रकारों को कोरोना वारियर्स की लिस्ट में शामिल कर उन्हें कुछ सुविधाए तो सरकार द्वारा उपलब्ध ही कराई जा सकती है। सरकार हम पत्रकार भी कोरोना वारियर्स है। हम भी अपनी ज़िम्मेदारिया निभा रहे है। अंत में श्री पांडेय ने कहा कि, उन्हें आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि, सरकार अपना ध्यान इस ओर आकर्षित करेगी।
महराजगंज/रायबरेली: प्रेस क्लब महराजगंज के संरक्षक व वरिष्ठ पत्रकार सुभाष पांडेय ने कोरोना की वैश्विक महामारी में सरकारी तंत्र के कर्मियों का 50 लाख का बीमा करने और इस महासमर में बिना किसी सुरक्षा कवच के लगातार खबरों को संकलित करने वाले पत्रकारों के प्रति अब तक कोई घोषणा न होने से दुख प्रकट किया है। श्री पण्डेय ने कहा है कि, सरकार लोकतंत्र के तीन स्तंभों की सुरक्षा के प्रति तो काफी सतर्क व चिंतित दिख रही है। लेकिन लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ कहलाने वाले पत्रकारों के लिये आखिर सरकार के पास सोचने का भी वक्त क्यों नही है? क्या? कोरोना की खबरों से जनजन को अपडेट करने वाले पत्रकारों की जान सरकारों की नजर में कोई महत्व नही रखती है ? श्री पांडेय ने कहा है कि, कोरोना के खतरे के बीच रिपोर्टिंग कर कोने कोने की खबर देशवासियो तक पहुँचा रहे पत्रकारों को कोरोना वारियर्स की लिस्ट में शामिल न करना दुखद एवं पत्रकारों का मनोबल तोड़ने वाला कदम है।
आपको बता दें कि, वरिष्ठ पत्रकार व प्रेस क्लब महराजगंज के संरक्षक सुभाष पांडे ने आगे कहा कि, उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी द्वारा प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और सोशल मीडिया (वेब पोर्टल), पत्रिकाओं के पत्रकारों को 50 लाख का बीमा कराने की मांग करने लिये रायबरेली के प्रेस क्लब महराजगंज के समस्त पदाधिकारियों की तरफ से वे हार्दिक धन्यवाद ज्ञापित कर रहे है। जिन्होंने कम से कम हम लोगो की पीड़ा को सरकार तक पहुंचाने की पहल तो की है।
सरकार द्वारा कोरोना वारियर्स के लिए 50 लाख का सुरक्षा बीमा किये जाने का फैसला स्वागत योग्य है, परंतु वारियर्स की लिस्ट में पत्रकारों का ज़िक्र न होना अत्यंत दुखद है।
कोरोना वायरस के खतरे के बीच जिस तरह से डॉक्टर, पुलिस, सफाई कर्मी अपनी जान जोखिम में डाल कर ज़िम्मेदारी निभा रहे है, वो सराहनीय है उन्हें सम्मान और सुरक्षा उपकरण के साथ ही सुरक्षा बीमा मिलना ही चाहिए।
लेकिन यहां अफसोस की बात ये है कि, संसाधन विहीन होकर भी कोरोना वायरस के खतरे के बीच पत्रकारिता के दायित्वों का पूरी ईमानदारी के साथ निर्वाहन करने वाले पत्रकारों को कोरोना वारियर्स की लिस्ट में नही जोड़ा गया।
श्री पांडे ने कहा कि अगर वे उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की ही बात करे तो विगत शनिवार को एक प्राइवेट कंपनी द्वारा लखनऊ पुलिस कर्मियों के लिए 10 हज़ार मास्क दिए गए, एक प्राइवेट बैंक ने लखनऊ पुलिस के लिए 4 क्विंटल सेनेटाइजर उपलब्ध कराया।
पुलिस, डाक्टर, सफाई कर्मी कोरोना से लड़ने वाले ऐसे योद्धा है। जिन्हें सरकार से पहले ही वेतन मिल रहा है। अब इस वैश्विक महामारी के दौरान अन्य सुविधाएं उपलब्ध करा कर उनके मनोबल को बढ़ाना अत्यंत सराहनीय है। परन्तु पत्रकार के परिवार की न तो अभी तक सरकार ने कोई सुध ली और न ही किसी प्राइवेट संस्था ने, भले ही 50 लाख का बीमा न किया जाए, लेकिन दिन रात मेहनत कर रहे मान्यता प्राप्त एवं गैर मान्यता प्राप्त पत्रकारों को कोरोना वारियर्स की लिस्ट में शामिल कर उन्हें कुछ सुविधाए तो सरकार द्वारा उपलब्ध ही कराई जा सकती है। सरकार हम पत्रकार भी कोरोना वारियर्स है। हम भी अपनी ज़िम्मेदारिया निभा रहे है। अंत में श्री पांडेय ने कहा कि, उन्हें आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि, सरकार अपना ध्यान इस ओर आकर्षित करेगी।

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