आदि शंकराचार्य के अवतरण दिवस पर आनंद उत्सव।। Raebareli news ।।

रजनीकांत अवस्थी
महराजगंज/रायबरेली: हर पल उत्सव की तरह मनाए, जीवन आनंद है, दुख नहीं। जो सबको समान रूप से प्यार करें और जो बिना शर्त खुश रहे वही पूर्ण है। जब आप संपूर्ण होंगे, तब आप हर पल का आनंद ले पाएंगे। सब कुछ आपके पास आ जाएगा। यह शंकराचार्य का मुख्य कथन था।
       आपको बता दें कि, हर पल पूर्ण है, क्योंकि आप किसी चीज के लिए लालायित नहीं है। अगर आप कल के किसी चीज के लिए लालायित हो रहे हैं, तो वर्तमान पल में से कुछ गांव आ रहे हैं। अगर आप कल के भोजन के लिए सोच रहे हैं, तो आज के अन्न का आनंद नहीं ले पाएंगे। इसलिए हर पल को उत्सव की तरह मनाना चाहिए।
    हमारे देश की मौलिक प्रकृत है कि, हम हर किसी के आगे अपना सिर झुकाना सीखते हैं, यही हमारी शक्ति रही है। यही हमारे विकास और आत्मबोध की प्रक्रिया भी रही है। आदि शंकराचार्य एक महामानव, भाषा के प्रकांड पंडित और आध्यात्मिक गौरव थे। शंकराचार्य कलादी नामक गांव के थे। कलादी का अर्थ पैरों के नीचे, दक्षिण में हम भारत माता के चरणों में है। शंकर ने कहा हर चीज में आया है। माया का अर्थ है भ्रम। यहां आप यहां आप स्थूल शरीर के साथ हैं। जो आप भोजन पानी और सांस लेते हैं, उससे आपके शरीर की कोशिका है, हर दिन बदल रही है। इसका मतलब है कि, कुछ समय बाद, आपके पास नया शरीर होगा।
     आपके अनुभव में यही माया है। इसी प्रकार आप अस्तित्व को पांच इंद्रियों से समझते हैं, वह पूरी तरह से अलग है, यही भ्रम है।
      आज प्रकृत पर संकट खड़ा करने वाला मानव कैद है, और और प्रकृति स्वच्छंद विचरण कर रही है। ऐसे समय में प्राकृत और संस्कृति को एक सूत्र में पिरोने वाले शंकराचार्य के जन्मदिवस पर हम सबको प्रकृति के संरक्षण का संकल्प इस एकांतवास में लेना चाहिए। शंकराचार्य जी 32 वर्ष की अल्पायु में ही परिवहन के साधन ना होने के बावजूद संपूर्ण भारत की यात्रा कर चारों दिशाओं में चार आश्रम स्थापित किए और हमें ज्ञान भक्त और कर्म को एक साथ लाकर प्रकृति संरक्षण का संदेश दे गए।
    आज हम सब उनकी याद में आत्मज्ञान को प्रज्वलित करने हेतु अपने अपने घर में एक दीपक अवश्य जलाएं।

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