न्यूज़ पोर्टल/यू ट्यूब चैनल के पत्रकार को तथाकथित फर्जी कहने वाले लोग एक बार जरा ध्यान दे
रजनीकांत अवस्थी
रायबरेली: आज के इस तकनिकी युग में हर क्षेत्र में क्रांति आयी, जिसमे पत्रकारिता भी शामिल है, पत्रकारों को अपने विचारों व अभिव्यक्ति को व्यक्त करने के लिए एक नया क्रन्तिकारी मंच मिला जिसे आज हम “न्यूज पोर्टल” के नाम से जानते है। दुनिया भर में न्यूज पोर्टल की शुरुआत बड़ी तेजी से हुई। न्यूज पोर्टल्स की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए कई पुराने अख़बार व टीवी चैनलों ने भी अपना-अपना वेब पोर्टल चैनल शुरू किया, लेकिन जहाँ एक ओर न्यूज पोर्टल से पत्रकारिता में एक नई क्रांति आ रही है। तो वहीं दूसरी ओर कई बार ये खबर आए दिन चर्चा में रहती है कि, न्यूज पोर्टल फर्जी है और न्यूज पोर्टल पर काम करने वाले संवाददाताओं/रिपोर्टर कैमरामैन तथाकथित/फर्जी है।सरकार और पुलिस प्रशासन उनको पत्रकार नहीं मानती।
आपको पता दें कि, इस तरह कि, भ्रामक और झूठी खबरे आये दिन सोशल मीडिया में देखने को मिल जाती है। इतना ही नहीं कई अधिकारी भी इन ख़बरों पर सही की मुहर लगा बैठते है। ये जो लोग या अधिकारी गण ये मानते और कहते हैं कि, न्यूज पोर्टल फ़र्ज़ी है और इनमे कार्यरत संवाददाताओं को सरकार पत्रकार नहीं मानती है, दर असल इन लोगों व अधिकारीयों को न ही पत्रकारिता के विषय में कोई ज्ञान है और न ही पत्रकारिता के संघर्ष की जानकारी।
ये पहली बार नहीं है जब किसी ऐसे मंच को मौन रखने की साजिश रची जा रही है, जिसका सम्बन्ध पत्रकारिता से हो।
रजनीकांत अवस्थी
रायबरेली: आज के इस तकनिकी युग में हर क्षेत्र में क्रांति आयी, जिसमे पत्रकारिता भी शामिल है, पत्रकारों को अपने विचारों व अभिव्यक्ति को व्यक्त करने के लिए एक नया क्रन्तिकारी मंच मिला जिसे आज हम “न्यूज पोर्टल” के नाम से जानते है। दुनिया भर में न्यूज पोर्टल की शुरुआत बड़ी तेजी से हुई। न्यूज पोर्टल्स की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए कई पुराने अख़बार व टीवी चैनलों ने भी अपना-अपना वेब पोर्टल चैनल शुरू किया, लेकिन जहाँ एक ओर न्यूज पोर्टल से पत्रकारिता में एक नई क्रांति आ रही है। तो वहीं दूसरी ओर कई बार ये खबर आए दिन चर्चा में रहती है कि, न्यूज पोर्टल फर्जी है और न्यूज पोर्टल पर काम करने वाले संवाददाताओं/रिपोर्टर कैमरामैन तथाकथित/फर्जी है।सरकार और पुलिस प्रशासन उनको पत्रकार नहीं मानती।
आपको पता दें कि, इस तरह कि, भ्रामक और झूठी खबरे आये दिन सोशल मीडिया में देखने को मिल जाती है। इतना ही नहीं कई अधिकारी भी इन ख़बरों पर सही की मुहर लगा बैठते है। ये जो लोग या अधिकारी गण ये मानते और कहते हैं कि, न्यूज पोर्टल फ़र्ज़ी है और इनमे कार्यरत संवाददाताओं को सरकार पत्रकार नहीं मानती है, दर असल इन लोगों व अधिकारीयों को न ही पत्रकारिता के विषय में कोई ज्ञान है और न ही पत्रकारिता के संघर्ष की जानकारी।
ये पहली बार नहीं है जब किसी ऐसे मंच को मौन रखने की साजिश रची जा रही है, जिसका सम्बन्ध पत्रकारिता से हो।

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