रजनीकांत अवस्थी
रायबरेली: सरकारी व कॉपोरेट दबाव न होने की वजह से न्यूज पोर्टल के संवादाता व संपादक स्वतंत्र हो कर सरकारी व निजी कंपनियों की खामियों को उजागर कर उनका भांडाफोड़ करना शुरू कर दिया। जिस कारण न्यूज पोर्टल्स इन लोगों की आंख की किरकिरी बन गया है। इसलिए समय समय पर न्यूज पोर्टल के सम्बन्ध में इस प्रकार की फर्जी अफवाहें उड़ाई जाती है। न्यूज पोर्टल्स के आने से सबसे ज्यादा नुकसान चाटुकार पत्रकारों व भ्रष्ट सरकारी कर्मचारियों और अवैध व्यापार करने वालों को हुआ है। क्योंकि किसी विभाग की कमी, भ्रष्टाचार या किसी अवैध व्यापार की जानकारी, किसी कलमचोर पत्रकार को हो जाती थी, तो वो खबर लिखने से पहले उस अधिकारी/व्यापारी से बात करके मोटी रकम वसूल लेते थे, और खबर गायब कर जाते थे। लेकिन न्यूज पोर्टल के समय में इन दलाल पत्रकारों व भ्रष्ट अधिकारीयों की दाल नहीं गल पाती है। इसीलिए यह लोग वेब पोर्टल को फर्जी बताते है क्यूंकि कलमचोर पत्रकारों की सेटिंग होने से पहले ही वह खबर न्यूज पोर्टल/सोशल मीडिया में वायरल हो जाती है।
आपको बता दें कि, सरकार ने कभी नहीं कहा कि, न्यूज पोर्टल का संवाददाता पत्रकार नहीं है। वैसे तो कई बार देखने को मिलता है कि, बहुत से अधिकारी गण भी ये फरमान जारी कर देतें है कि, द्वारा जारी किया गया ऐसा कोई भी आदेश अथवा निर्देश है जिसमे में ये कहा गया हो कि, सरकार न्यूज पोर्टल के संवाददाता को पत्रकार नहीं मानती। तो ये न आपको कोई लिखित आदेश दिखा पाएंगे और न ही कोई जिओ, न्यूज पोर्टल्स पूर्णत, वैध भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 में दिए गए स्वतंत्रता के मूल अंधिकार को प्रैस की स्वतंत्रता के समकक्ष माना गया है। भारतीय नागरिक को न्यूज पोर्टल शुरू और संचालित करने की स्वतंत्रता है।
रायबरेली: सरकारी व कॉपोरेट दबाव न होने की वजह से न्यूज पोर्टल के संवादाता व संपादक स्वतंत्र हो कर सरकारी व निजी कंपनियों की खामियों को उजागर कर उनका भांडाफोड़ करना शुरू कर दिया। जिस कारण न्यूज पोर्टल्स इन लोगों की आंख की किरकिरी बन गया है। इसलिए समय समय पर न्यूज पोर्टल के सम्बन्ध में इस प्रकार की फर्जी अफवाहें उड़ाई जाती है। न्यूज पोर्टल्स के आने से सबसे ज्यादा नुकसान चाटुकार पत्रकारों व भ्रष्ट सरकारी कर्मचारियों और अवैध व्यापार करने वालों को हुआ है। क्योंकि किसी विभाग की कमी, भ्रष्टाचार या किसी अवैध व्यापार की जानकारी, किसी कलमचोर पत्रकार को हो जाती थी, तो वो खबर लिखने से पहले उस अधिकारी/व्यापारी से बात करके मोटी रकम वसूल लेते थे, और खबर गायब कर जाते थे। लेकिन न्यूज पोर्टल के समय में इन दलाल पत्रकारों व भ्रष्ट अधिकारीयों की दाल नहीं गल पाती है। इसीलिए यह लोग वेब पोर्टल को फर्जी बताते है क्यूंकि कलमचोर पत्रकारों की सेटिंग होने से पहले ही वह खबर न्यूज पोर्टल/सोशल मीडिया में वायरल हो जाती है।
आपको बता दें कि, सरकार ने कभी नहीं कहा कि, न्यूज पोर्टल का संवाददाता पत्रकार नहीं है। वैसे तो कई बार देखने को मिलता है कि, बहुत से अधिकारी गण भी ये फरमान जारी कर देतें है कि, द्वारा जारी किया गया ऐसा कोई भी आदेश अथवा निर्देश है जिसमे में ये कहा गया हो कि, सरकार न्यूज पोर्टल के संवाददाता को पत्रकार नहीं मानती। तो ये न आपको कोई लिखित आदेश दिखा पाएंगे और न ही कोई जिओ, न्यूज पोर्टल्स पूर्णत, वैध भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 में दिए गए स्वतंत्रता के मूल अंधिकार को प्रैस की स्वतंत्रता के समकक्ष माना गया है। भारतीय नागरिक को न्यूज पोर्टल शुरू और संचालित करने की स्वतंत्रता है।

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