अपील: 17 मई का इंतज़ार ना करें।। Raebareli news ।।

रायबरेली: कोरोना वायरस जैसे संक्रमण के बीच दुनिया कितनी बदल गई है। खासकर शहरों में सगे संबंधी भी फोन तक ही सिमट कर रह गए हैं। आदमी- आदमी में दूरियां बढ़ गई है। जिंदा रहने के लिए चेहरे पर मास्क, सैनिटाइजर व सामाजिक दूरी ही एकमात्र विकल्प है। जब तक सरकार द्वारा कोरोना वायरस की परफेक्ट दवा नहीं इजाद की जाती, तब तक कोरोना वायरस देश ही नहीं, अपितु समूचे विश्व का अभिशाप बना हुआ है।
        लाक डाउन -3 में एकल व्यापारियों को जो छूट दी गई है। वह सोशल डिस्टेंसिंग का अक्षरश पालन सुनिश्चित करें। लापरवाही कदापि ना बरतें। आओ संकल्प लें इसे कम्युनिटी लेवल पर नही फैलने देंगे! सरकार एक निश्चित समय तक ही lockdown रख सकती है। धीरे धीरे lockdown खत्म हो जाएगा। सरकार भी इतनी सख्ती नहीं दिखाएगी।
क्योंकि...... 
सरकार ने आपको कोरोना बीमारी के बारे में अवगत करा दिया है, सोशल डिस्टैंसिंग, हैण्ड सेनिटाइजेशन इत्यादि सब समझा दिया है। बीमार होने के बाद की स्थिति भी आप लोग देश और दुनिया में देख ही रहे है। अब जो समझदार है। वह आगे लंबे समय तक अपनी दिनचर्या, काम करने का तरीका समझ ले। 
     सरकार 24 घंटे  365 दिन आपकी चौकीदारी नहीं करेगी।आपके एवं आपके परिवार का भविष्य आपके हाथ में है। लोकडॉन खुलने के बाद सोच समझ कर घर से निकले एवं काम पर जाये, व नीयत नियमानुसार ही अपना कार्य करे l
     क्या लगता है आपको, 17 मई के बाद एकाएक कोरोना चला जायेगा, हम पहले की तरह जीवन जीने लगेंगे ? नही, कदापि नही। ये वायरस अब हमारे देश और दुनिया में जड़ें जमा चुका है, हमे इसके साथ रहना सीखना पड़ेगा।
कैसे ?
सरकार कब तक लॉक डाउन रखेगी ? कब तक बाहर निकलने में पाबंदी रहेगी ? हमे स्वयं इस वायरस से लड़ना पड़ेगा, अपनी जीवन शैली में बदलाव करके, अपनी इम्युनिटी स्ट्रांग करके। हमे सैकड़ों साल से चली रही पुरानी जीवन शैली अपनानी पड़ेगी। योग और प्राणायाम  को अपनाना होगा। शुद्ध आहार लें, शुद्ध मसाले खाएं। आंवला, एलोवेरा, गिलोय, काली मिर्च, लौंग, दालचीनी, लविंग, अदरक, हल्दी आदि पर निर्भर हों कर एन्टी बाइटिक्स के चंगुल से खुद को आज़ाद करें। अपने भोजन में पौष्टिक आहार की मात्रा बढ़ानी होगी, फ़ास्ट फ़ूड, पिज़्ज़ा, बर्गर, कोल्ड्रिंक की भूल जाएं तो बेहतर होगा। अपने बर्तनों को बदलना होगा, अल्युमिनियम, स्टील, टेफ़लोन कोटिंग आदि से निजात पानी होगी, हमे भारी बर्तन जैसे पीतल, कांसा, तांबा, मिट्टी को अपनाना होगा जो प्राकर्तिक रूप से वायरस को खत्म करते हैं। अपने आहार में दूध, दही, घी की मात्रा बढ़ानी होगी। भूल जाइए जीभ का स्वाद, तला-भुना मसालेदार, होटल वाला व्यंजन।
     कम से कम अगले 2 -3 साल तक तो ये करना ही पड़ेगा। तभी हम सरवाइव कर पाएंगे। जो नही बदले वो खत्म हो जाएंगे। समझदार और व्यवहारिक बने और इस बात को मान कर इन पर अमल करना शुरू कर दें। जिंदगी आपकी फैसला आपका।
अजय श्रीवास्तव वरिष्ठ संवाददाता व वरिष्ठ अधिवक्ता

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ