हुजूर, घाव पर नमक छिड़कने के बजाय थॉदि5 सी पुड़िया में दे दीजिए, सुखी रोटी के साथ खाने के काम आएगा

जिले की कोरोना-फाइल: भूखे भजन न होहिं गोपाला, ले लो अपनी कंठी माला
मिर्जापुर। कोरोना पर रोना-बिलखना जारी है । उजड़े-दयार में बेरोजगार हुए नौजवान अब नौजवान से नहीं असह्य-वान से दिख रहे । भाररतीय संस्कृति पर नाज करने वाले 'उत्तम पुरुष' के 'लघुत्तम रूप' को देख इनके अरमानों को 'दुखवा कासे कहूँ' का विषधर सर्प डँस रहा है ।
खुशबू कागज के फूलों से न दो हुजूर !
--
घोषणा हुई कि कोरोना से बे-हाथ हुओं को हाथ दिया जाएगा । उन्हें चींटी नहीं हाथी बनाया जाएगा। लेकिन इनको हालात ऐसे मसल रही कि ये 'चीं' भी नहीं बोल पा रहे हैं ।
उद्योग लगाने के पहले का उद्योग
---
बेरोजगारों को काम देने के क्रम में मुख्यमंत्री रोजगार योजना में 25 लाख तक 25% सब्सिडी पर लोन दिए जाने की घोषणा हुई । 15 से 20 मई तक आनलाइन आवेदन करने का हुक्म तामील हुआ । इसी प्रकार प्रधानमंत्री स्वरोजगार योजना में एक करोड़ की मदद का एलान हुआ । इसकी स्थिति सुन अगर आंख में आंसू नहीं आए तो सुनने वाला इंसान नहीं हो सकता ।
क्या क्या गुजरी, यह तो वे ही बता रहे हैं
--
पहले तो भागे दौड़े बेरोजगार उद्योग विभाग गए । वहां बताया गया कि ऑनलाइन फार्म भरो । साइबर कैफे पर आए । उसने पहले पैसा जमा करा लिया । फिर नाम, पता के बाद जो जो कागजात मांगा तब स्पष्ट हो गया कि उद्योग के सपने को कोरोना संक्रमित कर गया ।
कागजात बन ही नही पा रहा है : लौट के बुद्धू घर को आए
---
वर्तमान समय में जब लेखपाल, तहसीलदार सब क्वारन्टीन सेंटरों में लगे हैं तब निवास, आय, जाति प्रमाणपत्र, वह भी 6 माह पहले के अंदर का बना हो, उपलब्ध होना कोरोना मुक्त देश करने के समान कठिन है । 20 मई बुधवार को यह योजना खत्म हो रही है और हसीन सपना पाले बेरोजगार 'लौट के बुद्धू घर को आए' मुहावरे में फिट बैठते दिख रहे हैं ।
पहले दिन 15 मई को जो लोन बांटा गया था वह कोरोना-आगमन के पूर्व स्वीकृत था पिछले वित्तीय सत्र का । शो कोरोना कॉल में करके सपने रंगीन करने का गीत गाया जा रहा है ।
                 - सलिल पांडेय, मिर्जापुर ।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ