"है अज्ञान देश का दुश्मन" कमल बाजपेई

◆है बदलाव समय मे आया , 
पर मानव की बुद्धि विलक्षण ।
सही गलत में अंतर समझो , 
नही दीखते अच्छे लक्षण ।
◆आज कहूंगा बिल्कुल सच्ची , 
रंच मात्र भी झूठ नही है ।
हक से ज्यादा धन का संग्रह , 
क्या माने यह लूट नही है ? 
◆किये गए वादों की तेरे , 
कुछ तो अपनी होगी सीमा ।
पर सीमा में कार्य न होना , 
दर्शाता गति को है धीमा ।
◆राजनीति और धर्मनीति को , 
अलग अलग कर के मत तोलो।
राजधर्म से , धर्मराज से, 
जुदा कहाँ है? कुछ तो बोलो ।
◆है अज्ञान देश का दुश्मन , 
पीढ़ी यदि ना होती शिक्षित ।
प्रगति देश की है रुक जाती , 
फल ना मिलें सभी को इच्छित ।
◆जीवन जीना बहुत सरल है , 
प्यार मुहब्बत से दिन काटो ।
बच्चो से भी बात करो तुम , 
अर्जित ज्ञान सभी में बाटो ।
◆- Written by  कमल बाजपेई

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