जब तक मजदूर परेशान और बेहाल रहेगा, तब तक यह देश कभी भी मजबूत राष्ट्र नहीं बन सकता-सुशील पासी
रजनीकांत अवस्थी
महराजगंज/रायबरेली: मजदूरों के बारे में वर्तमान समय में सरकारों द्वारा कोई ठोस कार्ययोजना न बनाकर महज ड्रामेबाजी की जा रही है। आज विश्व में कोई भी तब का सबसे दयनीय दशा से गुजर रहा है तो वह है मजदूर पेशा यदि सरकार सचेत ना हुई मजदूरों का इसी प्रकार शोषण जारी रहा तो यह बात निश्चित है कि देश की अर्थव्यवस्था गर्त के रसातल में चली जाएगी क्योंकि किसी भी अर्थव्यवस्था में मजदूर अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी होता है। यह उद्गार कांग्रेश पार्टी के प्रदेश सचिव सुशील पासी ने अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस के मौके पर हमारे संवाददाता को दिए गए बयान में व्यक्त किए हैं।
आपको बता दें कि, कांग्रेस पार्टी के प्रदेश सचिव सुशील पासी ने कहा कि जब से अर्थव्यवस्था ने जन्म लिया है। तब से मजदूरी प्रथा की शुरुआत हुई है। इस समय विश्व में पूंजीवादी अर्थव्यवस्था के अलावा साम्यवादी व्यवस्था काम कर रही हैं। पूंजीवादी व्यवस्था में पूजीपती व्यवस्था का मालिक होता है, और मजदूर उसकी दया पर निर्भर करते हैं। इसी के लंबे संघर्ष के बाद अंततोगत्वा साम्यवादी व्यवस्था का जन्म हुआ, जिसमें कोई पूंजीपति नहीं होता है, बल्कि मजदूर वर्ग ही श्रमिक भी होता है, और मालिक भी होता है। किंतु यह व्यवस्था भी विकृत रूप में परिवर्तित हो गई है। पूंजीवाद के षड्यंत्र के कारण साम्यवाद का विनाश हो गया, वह महज अब विश्व के चंद देशों में ही सीमित होकर रह गया है।
श्री पासी ने आगे कहा कि, हमारे देश में समाजवादी लोक कल्याणकारी व्यवस्था को अपनाया गया है। जिसमें समाज के निम्न वर्गों के कल्याण के लिए सरकारों के गठन को मंजूरी दी गई है। संविधान निर्माण करते समय बाबा साहब भीमराव अंबेडकर ने इस बात पर पूरा जोर दिया कि, देश में मजदूरों की स्थिति सम्मानजनक हो और उनके जीवन स्तर में निरंतर सुधार होता रहे, तथा वह समाज में प्रतिष्ठित तबके के रूप में जीवन जी सकें।
प्रारंभ में जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में बनी सरकार ने देश के औद्योगिक विकास के लिए जिस ढांचे का निर्माण किया था, उसमें श्रमिकों के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं बनाई गई थी। इसी सिलसिले को इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और बाद में संप्रग अध्यक्षा सोनिया गांधी के नेतृत्व में बनी कांग्रेस की डॉ मनमोहन सिंह सरकार ने भी उल्लेखनीय कार्य किए है। कांग्रेसी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि, उन्होंने श्रमिकों को मनरेगा जैसी विशाल योजना देकर उन्हें तरक्की के राह पर लाने का काम किया था, लेकिन कांग्रेसी सरकार के जाते ही यह योजना धीरे धीरे ठिकाने लगाई जा रही है। मजदूर एक बार फिर शहरों की ओर पलायन करने के लिए विवश हो रहे हैं, तथा मजदूर लगातार शोषण का भी शिकार हो रहे हैं।
श्री पासी ने वर्तमान समय में लाक डाउन लागू किए जाने के बाद पैदा हुई स्थिति के बारे में कहा कि, आज सबसे ज्यादा पीड़ित शोषित वर्ग कोई है, तो वह मजदूर है।
उन्होंने आगे कहा कि, बड़े-बड़े कल कारखाने छोटे मझोले उद्योग धंधे सबके संचालन में बहुत बड़ी भूमिका मजदूरों की होती है, अब मजदूर बे काम हो गया है। सरकारों ने लाक डाउन लागू करने के पहले मजदूरों के विस्थापन के लिए कोई कार्ययोजना नहीं बनाई थी, जिससे आज हालात यह है कि, बड़े महानगरों सहित देश के सभी औद्योगिक कारखानों में मजदूर बेदखल कर दिए गए हैं। उनके पास ना तो भोजन की सामग्री है और ना ही वह अपने घरों तक पहुंच पा रहे हैं।
करोड़ों-करोड़ मजदूर भूखों मरने को विवश है, अपने घर तक पहुंचने के लिए कोई साइकिल से कोई पैदल तो, कोई अन्य साधनों से बिगड़े मौसम की परवाह न करते हुए अपने घर जाने को आतुर है। सरकारों की नाकामी इसी से साबित होती है कि, हमारे बछरावां क्षेत्र के सलेथू गांव के रहने वाले श्रमिक रामकुमार और उसके मौसेरे भाई आशीष जोकि, मध्य प्रदेश के मैहर स्थान पर एक फैक्ट्री में मजदूरी कर रहे थे। फैक्ट्री मालिक द्वारा बगैर राशन पानी की व्यवस्था किए, मजदूरों को बगैर एक पैसा दिए, भगा देने से वह पैदल ही घर वापस होने को मजबूर हो गए, और रास्ते में एक अज्ञात वाहन ने दोनों को कुचल कर उनकी जीवन लीला ही समाप्त कर दी है। यह सरकारों की नाकामी का सबसे बड़ा प्रमाण है।
अब सहज ही सोचा जा सकता है कि, युवा आयु के दोनों मजदूरों के परिवार का भरण पोषण कैसे होगा। मजदूर दिवस पर हमें यह संकल्प लेना है कि, हम एक नई आर्थिक नीति बनाकर मजदूरों को अर्थव्यवस्था की प्रमुख धुरी के रूप में स्थापित करें, और उनके सम्मान पूर्वक जीवन यापन के लिए समुचित व्यवस्था की गारंटी को, अन्यथा इस धरती पर जब तक मजदूर परेशान और बेहाल रहेगा, तब तक यह देश कभी भी मजबूत राष्ट्र नहीं बन सकता है।
रजनीकांत अवस्थी
महराजगंज/रायबरेली: मजदूरों के बारे में वर्तमान समय में सरकारों द्वारा कोई ठोस कार्ययोजना न बनाकर महज ड्रामेबाजी की जा रही है। आज विश्व में कोई भी तब का सबसे दयनीय दशा से गुजर रहा है तो वह है मजदूर पेशा यदि सरकार सचेत ना हुई मजदूरों का इसी प्रकार शोषण जारी रहा तो यह बात निश्चित है कि देश की अर्थव्यवस्था गर्त के रसातल में चली जाएगी क्योंकि किसी भी अर्थव्यवस्था में मजदूर अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी होता है। यह उद्गार कांग्रेश पार्टी के प्रदेश सचिव सुशील पासी ने अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस के मौके पर हमारे संवाददाता को दिए गए बयान में व्यक्त किए हैं।
आपको बता दें कि, कांग्रेस पार्टी के प्रदेश सचिव सुशील पासी ने कहा कि जब से अर्थव्यवस्था ने जन्म लिया है। तब से मजदूरी प्रथा की शुरुआत हुई है। इस समय विश्व में पूंजीवादी अर्थव्यवस्था के अलावा साम्यवादी व्यवस्था काम कर रही हैं। पूंजीवादी व्यवस्था में पूजीपती व्यवस्था का मालिक होता है, और मजदूर उसकी दया पर निर्भर करते हैं। इसी के लंबे संघर्ष के बाद अंततोगत्वा साम्यवादी व्यवस्था का जन्म हुआ, जिसमें कोई पूंजीपति नहीं होता है, बल्कि मजदूर वर्ग ही श्रमिक भी होता है, और मालिक भी होता है। किंतु यह व्यवस्था भी विकृत रूप में परिवर्तित हो गई है। पूंजीवाद के षड्यंत्र के कारण साम्यवाद का विनाश हो गया, वह महज अब विश्व के चंद देशों में ही सीमित होकर रह गया है।
श्री पासी ने आगे कहा कि, हमारे देश में समाजवादी लोक कल्याणकारी व्यवस्था को अपनाया गया है। जिसमें समाज के निम्न वर्गों के कल्याण के लिए सरकारों के गठन को मंजूरी दी गई है। संविधान निर्माण करते समय बाबा साहब भीमराव अंबेडकर ने इस बात पर पूरा जोर दिया कि, देश में मजदूरों की स्थिति सम्मानजनक हो और उनके जीवन स्तर में निरंतर सुधार होता रहे, तथा वह समाज में प्रतिष्ठित तबके के रूप में जीवन जी सकें।
प्रारंभ में जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में बनी सरकार ने देश के औद्योगिक विकास के लिए जिस ढांचे का निर्माण किया था, उसमें श्रमिकों के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं बनाई गई थी। इसी सिलसिले को इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और बाद में संप्रग अध्यक्षा सोनिया गांधी के नेतृत्व में बनी कांग्रेस की डॉ मनमोहन सिंह सरकार ने भी उल्लेखनीय कार्य किए है। कांग्रेसी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि, उन्होंने श्रमिकों को मनरेगा जैसी विशाल योजना देकर उन्हें तरक्की के राह पर लाने का काम किया था, लेकिन कांग्रेसी सरकार के जाते ही यह योजना धीरे धीरे ठिकाने लगाई जा रही है। मजदूर एक बार फिर शहरों की ओर पलायन करने के लिए विवश हो रहे हैं, तथा मजदूर लगातार शोषण का भी शिकार हो रहे हैं।
श्री पासी ने वर्तमान समय में लाक डाउन लागू किए जाने के बाद पैदा हुई स्थिति के बारे में कहा कि, आज सबसे ज्यादा पीड़ित शोषित वर्ग कोई है, तो वह मजदूर है।
उन्होंने आगे कहा कि, बड़े-बड़े कल कारखाने छोटे मझोले उद्योग धंधे सबके संचालन में बहुत बड़ी भूमिका मजदूरों की होती है, अब मजदूर बे काम हो गया है। सरकारों ने लाक डाउन लागू करने के पहले मजदूरों के विस्थापन के लिए कोई कार्ययोजना नहीं बनाई थी, जिससे आज हालात यह है कि, बड़े महानगरों सहित देश के सभी औद्योगिक कारखानों में मजदूर बेदखल कर दिए गए हैं। उनके पास ना तो भोजन की सामग्री है और ना ही वह अपने घरों तक पहुंच पा रहे हैं।
करोड़ों-करोड़ मजदूर भूखों मरने को विवश है, अपने घर तक पहुंचने के लिए कोई साइकिल से कोई पैदल तो, कोई अन्य साधनों से बिगड़े मौसम की परवाह न करते हुए अपने घर जाने को आतुर है। सरकारों की नाकामी इसी से साबित होती है कि, हमारे बछरावां क्षेत्र के सलेथू गांव के रहने वाले श्रमिक रामकुमार और उसके मौसेरे भाई आशीष जोकि, मध्य प्रदेश के मैहर स्थान पर एक फैक्ट्री में मजदूरी कर रहे थे। फैक्ट्री मालिक द्वारा बगैर राशन पानी की व्यवस्था किए, मजदूरों को बगैर एक पैसा दिए, भगा देने से वह पैदल ही घर वापस होने को मजबूर हो गए, और रास्ते में एक अज्ञात वाहन ने दोनों को कुचल कर उनकी जीवन लीला ही समाप्त कर दी है। यह सरकारों की नाकामी का सबसे बड़ा प्रमाण है।
अब सहज ही सोचा जा सकता है कि, युवा आयु के दोनों मजदूरों के परिवार का भरण पोषण कैसे होगा। मजदूर दिवस पर हमें यह संकल्प लेना है कि, हम एक नई आर्थिक नीति बनाकर मजदूरों को अर्थव्यवस्था की प्रमुख धुरी के रूप में स्थापित करें, और उनके सम्मान पूर्वक जीवन यापन के लिए समुचित व्यवस्था की गारंटी को, अन्यथा इस धरती पर जब तक मजदूर परेशान और बेहाल रहेगा, तब तक यह देश कभी भी मजबूत राष्ट्र नहीं बन सकता है।

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