जिंदगी के हर तौर-तरीकों को झकझोर दिया है बेहूदे कोरोना ने, आप पॉजिटिव हैं' लिखा तो भड़क गए मेरे दोस्त

जिस बात पर लड्डू-पेड़े मिलते थे, वहीं अब मिलती है ज़लालत---
    उनका ह्वाट्सएप सन्देश आया कि वे लॉकडाउन नियमों का बखूबी पालन कर रहे हैं । घर से न निकलते हैं और न घर के किसी सदस्य को निकलने देते हैं । आसपास-पड़ोस की आस पूरी करते हैं । किरायेदारों का किराया माफ कर दिया है, आदि आदि ढेरों बातें । 
     वे चाहते थे कि इस पर कुछ लिख दूँ बहुत शार्ट में ताकि वे अपने परिचितों, मित्रों और रिश्तेदारों को पोस्ट कर सकें ।
    शर्त यही थी कि बहुत संक्षिप्त में उनकी सारी खासियतों को मंत्र की तरह ही लिखा जाए ।
   वे बहुत लंबा-चौड़ा बयान नहीं चाहते थे । उनका मानना है कि ह्वाट्सएप और फेसबुक पर लंबी गाथा कोई नहीं पढ़ता और डिलीट कर देता है 
शर्तों के मुताबिक- मैंने लिखा कि आप पॉजिटिव हैं।
इसी के साथ पॉजिटिव किसे कहते हैं, यह भी आगे लिख दिया। लेकिन आगे पढ़ने के बजाए उनका क्रोध कोरोना की तरह आक्रांता हो गया । भला बुरा जवाब लिख कर नम्बर ब्लाक कर दिया और पहुंच गए पुलिस आफिसर के पास FIR दर्ज कराने ।
   पुलिस का अधिकारी तो वैसे भी धरती पर नहीं बल्कि सातवें आसमान पर रहता है । दोनों मिलकर 14 आसमान उठा लिए ।
   तत्काल दो सिपाही आ धमके और बोले-चलिए, बड़े साहब ने बुलाया है । आपके खिलाफ तहरीर आई है। 
  पुलिस अधिकारी से ज्यादा तैश में मेरे दोस्त थे । वे बोले-हुजूर इन्हें तत्काल अरेस्ट कर लीजिए ।
  बयान में मुझसे पूछा गया- बिना जांच के आपने कैसे लिख दिया कि ये पॉजिटिव हैं ।
   मैंने स्पष्ट किया कि आगे पढ़िए मैंने लिखा है कि धर्मशास्त्रों से लेकर हर बड़े चिंतकों ने लिखा है कि इस तरह के लोग पॉजिटिव माने जाते हैं । जो लोगों की मदद करते हैं । वरना निगेटिव सोच के लोग सबका काम बिगाड़ देते हैं ।
   धन्य है ये बेहूदा कोरोना जिसने जिंदगी के हर हिस्सों को बुरी तरह झकझोर दिया है।
 जहाँ किसी को पॉजिटिव कहने से लड्डू-पेड़े मिलते थे, वहीं अब जलालत झेलनी पड़ रही है।
                    सलिल पांडेय मिर्जापुर ।
   °© इस व्यंग्य पोस्ट को कॉपीराइट के तहत छेड़े नहीं ।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ