साधन संपन्न घरों के बच्चे कर रहे हैं ऑनलाइन पढ़ाई। जबकि गरीबों के बच्चे लैपटॉप स्मार्टफोन ना होने से गली मोहल्लों में खेल रहे हैं गुल्ली डंडे
रजनीकांत अवस्थी
महराजगंज/रायबरेली: संपूर्ण लाक डाउन लागू होने के बाद से सबसे बड़ा नुकसान अगर किसी का हो रहा है, तो वह है स्कूली छात्र, जिनके स्कूल बंद होने से छात्र पढ़ाई से वंचित है, और जब तक यह व्यवस्था लागू रहेगी तब तक पढ़ाई स्कूलों में नहीं होगी। इससे छात्रों का जीवन अंधकार मय होता दिखाई पड़ रहा है। सबसे खराब हालत उन छात्रों की है, जो आर्थिक रूप से बहुत ही कमजोर परिवारों से आते हैं। क्योंकि स्कूलों में ऑनलाइन पढ़ाई शुरू कर दी गई है। लेकिन गरीब घरों के बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई करने से वंचित इसलिए हैं, क्योंकि उनके अभिभावकों के पास ना तो कंप्यूटर खरीदने के पैसे हैं, और ना ही स्मार्टफोन खरीदने के पैसे हैं, और उस पर भी ऑनलाइन पढ़ाई के लिए इंटरनेट लगवाने का खर्च भी अभिभावक बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं। ऐसे में इन बच्चों की पढ़ाई कैसे हो सकेगी। यह सवाल गरीब तबके के बच्चों को अंदर ही अंदर कचोट रहा है।
आपको बता दें कि, जब से संपूर्ण लॉक डाउन लगा हुआ है, तब से सरकार के निर्देश पर सरकारी व निजी विद्यालयों में तालाबंदी हो गई है, और सभी प्रकार की परीक्षाएं आधी अधूरी छोड़ दी गई हैं। ऐसे में कुछ छात्र तो, घरों पर रहकर किताबों से अध्ययन कर लेते हैं। लेकिन अधिकांश बच्चे खेलकूद और मनोरंजन में ही अपना समय गुजार रहे हैं।
अभिभावकों द्वारा यह समस्या निजी स्कूलों के प्रबंध तंत्र को बताए जाने पर प्रबंधतंत्र ने ऑनलाइन पढ़ाई जारी रखने का निर्णय लिया है। लेकिन इसमें सबसे बड़ी बाधा यह है कि, ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकतर छात्रों के अभिभावक इस हैसियत में नहीं है कि, वह 50, 000 का लैपटॉप या 20, 000 का स्मार्टफोन खरीद कर बच्चों को दे सकें। ना ही इन अभिभावकों की यह स्थिति है कि, इंटरनेट की कीमतें ही अदा कर सकें।
इस प्रकार क्षेत्र के हजारों छात्रों का भविष्य संकट और अंधकार में हो गया है। कई अभिभावकों ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि, इस समस्या के समाधान का कोई रास्ता निकाला जाए, अन्यथा साधन संपन्न घरों के बच्चे पढ़ाई में आगे निकल जाएंगे और गरीब तबके के लोगों के बच्चे शिक्षा के क्षेत्र में पीछे रह जाएंगे।
रजनीकांत अवस्थी
महराजगंज/रायबरेली: संपूर्ण लाक डाउन लागू होने के बाद से सबसे बड़ा नुकसान अगर किसी का हो रहा है, तो वह है स्कूली छात्र, जिनके स्कूल बंद होने से छात्र पढ़ाई से वंचित है, और जब तक यह व्यवस्था लागू रहेगी तब तक पढ़ाई स्कूलों में नहीं होगी। इससे छात्रों का जीवन अंधकार मय होता दिखाई पड़ रहा है। सबसे खराब हालत उन छात्रों की है, जो आर्थिक रूप से बहुत ही कमजोर परिवारों से आते हैं। क्योंकि स्कूलों में ऑनलाइन पढ़ाई शुरू कर दी गई है। लेकिन गरीब घरों के बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई करने से वंचित इसलिए हैं, क्योंकि उनके अभिभावकों के पास ना तो कंप्यूटर खरीदने के पैसे हैं, और ना ही स्मार्टफोन खरीदने के पैसे हैं, और उस पर भी ऑनलाइन पढ़ाई के लिए इंटरनेट लगवाने का खर्च भी अभिभावक बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं। ऐसे में इन बच्चों की पढ़ाई कैसे हो सकेगी। यह सवाल गरीब तबके के बच्चों को अंदर ही अंदर कचोट रहा है।
आपको बता दें कि, जब से संपूर्ण लॉक डाउन लगा हुआ है, तब से सरकार के निर्देश पर सरकारी व निजी विद्यालयों में तालाबंदी हो गई है, और सभी प्रकार की परीक्षाएं आधी अधूरी छोड़ दी गई हैं। ऐसे में कुछ छात्र तो, घरों पर रहकर किताबों से अध्ययन कर लेते हैं। लेकिन अधिकांश बच्चे खेलकूद और मनोरंजन में ही अपना समय गुजार रहे हैं।
अभिभावकों द्वारा यह समस्या निजी स्कूलों के प्रबंध तंत्र को बताए जाने पर प्रबंधतंत्र ने ऑनलाइन पढ़ाई जारी रखने का निर्णय लिया है। लेकिन इसमें सबसे बड़ी बाधा यह है कि, ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकतर छात्रों के अभिभावक इस हैसियत में नहीं है कि, वह 50, 000 का लैपटॉप या 20, 000 का स्मार्टफोन खरीद कर बच्चों को दे सकें। ना ही इन अभिभावकों की यह स्थिति है कि, इंटरनेट की कीमतें ही अदा कर सकें।
इस प्रकार क्षेत्र के हजारों छात्रों का भविष्य संकट और अंधकार में हो गया है। कई अभिभावकों ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि, इस समस्या के समाधान का कोई रास्ता निकाला जाए, अन्यथा साधन संपन्न घरों के बच्चे पढ़ाई में आगे निकल जाएंगे और गरीब तबके के लोगों के बच्चे शिक्षा के क्षेत्र में पीछे रह जाएंगे।




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