भूखी प्यासी मासूम बच्ची बार-बार मां से यही सवाल कर रही थी मां घर कब आएगा
रजनीकांत अवस्थी
रायबरेली: वैश्विक महामारी के चलते लॉकडाउन में प्रवासी मजदूरों की दुर्दशा देखकर बछरावां कस्बा निवासी वरिष्ठ पत्रकार दीपचंद मिश्रा की आंखें भर आई। उनका मन व्यथित हो गया। मासूम बेटी अपनी मां से कह रही थी कि, मेरा गुनाह क्या है माँ ! गुनाह सिर्फ गरीबी है। अमीरजादे अपने घरों में महफूज हैं। अगर रह गए सड़कों पर तो सिर्फ गरीब। सौ दो सौ नही हजारों किलोमीटर चल चल कर भी लोग अपने घर नही पहुंच रहे हैं। पिछले कई दिनों से भूखी मां अपनी बच्ची की भूख मिटाने में असमर्थ दिख रही थी। क्योंकि उनका शरीर कमजोर हो चुका है। वो बच्ची के लिए दूध नही जुटा पा रही थी।
आपको बता दें कि, लाचार माँ अपनी बेटी को दे सकती थी तो सिर्फ असहाय नजरे और लाचार आंखे उस बेटी का दर्द काश कोई समझ ले ऐसे तमाम लोग सड़को पर थे। उस बच्ची की आंखे अपनी माँ से सिर्फ एक सवाल करती मां घर कब आएगा।घर कब आएगा। मासूम बच्ची के करुणा भरे सवाल सुनकर श्री मिश्र की आंखें भर आई। उन्होंने बच्ची की मां को 500 देकर आर्थिक मदद की और मां बेटी को ट्रक में बैठाकर उनके गंतव्य के लिए रवाना किया।
ये सवाल बहुत लोगों के मन में है, जो सड़को पर है बेहाल है। भूखे है पता नही उन्हें उनका घर कब नसीब होगा, श्री मिश्र ने राज्य सरकार से अपील करते हुए कहा कि, प्रवासी मजदूरों के लिए ठोस कदम उठाते हुए उन्हें अपने घरों तक सुरक्षित पहुंचा दिया जाए। ताकि कोई भूखी प्यासी मां अपने बच्चे को अपनी पीठ पर लादकर हजारों किलोमीटर का सफर पैदल तंय करने को मजबूर न हो।
रजनीकांत अवस्थी
रायबरेली: वैश्विक महामारी के चलते लॉकडाउन में प्रवासी मजदूरों की दुर्दशा देखकर बछरावां कस्बा निवासी वरिष्ठ पत्रकार दीपचंद मिश्रा की आंखें भर आई। उनका मन व्यथित हो गया। मासूम बेटी अपनी मां से कह रही थी कि, मेरा गुनाह क्या है माँ ! गुनाह सिर्फ गरीबी है। अमीरजादे अपने घरों में महफूज हैं। अगर रह गए सड़कों पर तो सिर्फ गरीब। सौ दो सौ नही हजारों किलोमीटर चल चल कर भी लोग अपने घर नही पहुंच रहे हैं। पिछले कई दिनों से भूखी मां अपनी बच्ची की भूख मिटाने में असमर्थ दिख रही थी। क्योंकि उनका शरीर कमजोर हो चुका है। वो बच्ची के लिए दूध नही जुटा पा रही थी।
आपको बता दें कि, लाचार माँ अपनी बेटी को दे सकती थी तो सिर्फ असहाय नजरे और लाचार आंखे उस बेटी का दर्द काश कोई समझ ले ऐसे तमाम लोग सड़को पर थे। उस बच्ची की आंखे अपनी माँ से सिर्फ एक सवाल करती मां घर कब आएगा।घर कब आएगा। मासूम बच्ची के करुणा भरे सवाल सुनकर श्री मिश्र की आंखें भर आई। उन्होंने बच्ची की मां को 500 देकर आर्थिक मदद की और मां बेटी को ट्रक में बैठाकर उनके गंतव्य के लिए रवाना किया।
ये सवाल बहुत लोगों के मन में है, जो सड़को पर है बेहाल है। भूखे है पता नही उन्हें उनका घर कब नसीब होगा, श्री मिश्र ने राज्य सरकार से अपील करते हुए कहा कि, प्रवासी मजदूरों के लिए ठोस कदम उठाते हुए उन्हें अपने घरों तक सुरक्षित पहुंचा दिया जाए। ताकि कोई भूखी प्यासी मां अपने बच्चे को अपनी पीठ पर लादकर हजारों किलोमीटर का सफर पैदल तंय करने को मजबूर न हो।

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