10 जून को राजा सुहेल देवी पासी ने मसूद गाजी पर विजय प्राप्त की थी।। Raebareli news ।।

विभिन्न संगठनों के तत्वाधान में मनाया गया विजय दिवस
रजनीकांत अवस्थी
रायबरेली: जनपद के विभिन्न संगठनों द्वारा राजा सुहेलदेव पासी का विजय दिवस मुकेश शिक्षण शोध संस्थान कोतवाली रोड, रायबरेली पर निश्चित दूरी के साथ मनाया गया। सभी पदाधिकारियों ने राजा सुहेलदेव पासी के चित्र पर माल्र्यापण एवं पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धाँजलि अर्पित की। 
     आपको बता दें कि, इस अवसर पर सेन्ट्रल बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष ओ.पी. यादव ने कहा कि, महमूद गजनवी का सेनापति एवं उसका भांजा सैय्यद सालार मसूद सोलह वर्ष की आयु में सिंध, मुल्तान, दिल्ली, मेरठ, कन्नौज, फतेहपुर सीकरी पर विजय प्राप्त करते हुए आगे बढ़ रहा था।  बाराबंकी के सतरिख में केन्द्र बनाकर बहराइच, श्रावस्ती सहित अयोध्या के आस-पास के लगभग 21 राजाओं से युद्ध किया और सभी को हराया। 
      इसके बाद सारे राजाओं ने मिलकर संगठन बनाकर युद्ध लड़ा, फिर भी पराजय हाथ लगी, अंततः तमाम राजाओं ने संयुक्त रूप से श्रावस्ती सम्राट सुहेलदेव पासी से सेनाओं का नेतृत्व करने का प्रस्ताव रखा।  ज्येष्ठ मास के पहले रविवार 10 जून 1034 को युद्ध में सुहेलदेव ने मसूद गाजी को मारकर सनातन संस्कृति की रक्षा की। 
       राष्ट्रीय पासी सेना के अध्यक्ष संजय पासी ने कहा कि, ग्यारहवीं शताब्दी के अनिश्चिततापूर्ण वातावरण में राष्ट्र नायक के रूप में सनातन संस्कृति के ध्वजवाहक महाराजा सुहेलदेव पासी का उदय हुआ।  वहीं उ0प्र0 उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मण्डल के प्रान्तीय संगठन मन्त्री मुकेश रस्तोगी ने कहा कि, महाराजा सुहेलदेव का जन्म बहराइच में बसंत पंचमी के दिन 990 में हुआ था, इनका शासनकाल 1027 से 1077ई0 तक माना जाता है। 
     संत गाडगे सेवक कमलेश चैधरी ने कहा कि, उनके विजयोत्सव पर संकल्प लेना चाहिए कि, समाज को उनके जीवन दर्शन को पढ़-समझकर एकता, अखंडता, राष्ट्रधर्म के प्रति निष्ठावान रहते हुए राष्ट्र की संस्कृति, उसकी परम्पराओं की रक्षा के प्रति सदैव तत्पर रहें, यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धाँजलि होगी।

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