जोग-टोक वाले मान रहे कि विंध्यपरिपथ को रोक दिया मां विंध्यवासिनी ने
मिर्जापुर। आकाश तो 8 जून को बिल्कुल साफ है और चटक धूप खिली है लेकिन धर्मस्थलों पर संशय के बादल सिर्फ विंध्याचल ही नहीं पूरे प्रदेश पर उमड़-घुमड़ के मंडरा रहे हैं । कभी एक तेज हवा का झोंका सन्देश दे जाता है कि 8 जून को धर्मस्थलों से पूजा-पाठ, घण्टा-घड़ियाल की गूंज/ मस्जिदों से अजान, गुरुद्वारों और गिरिजाघरों से प्रार्थना के स्वर सुनाई पड़ेंगे तो कभी यही बादल गरजते हैं कि सावधान ! अभी इतनी जल्दी भी क्या है ?,
विंध्याचल में बैठक के चन्द घण्टे पहले की स्थिति- यहां 8 जून को अपराह्न एक बजे विंध्यविकास परिषद से नाता रखने वाले नवरत्न पण्डों की संजीदगी भाव से भरे DM श्री सुशील कुमार पटेल के साथ मिलकर कोरोना विष बाहर करने के लिए वैचारिक मंथन होगा । उसके पहले पण्डा समाज के ये नवरत्न सुझाव-सलाह का मशविदा बनाने में लगे हैं । चूंकि पण्डा समाज पहले से बोल चुका है कि वह मंदिर खोलने को लेकर उतावला नहीं है लिहाजा उसी रणनीति पर समाज अभी भी कायम दिख रहा है ।
प्रबद्ध लोगों के सुझाव- नगर/जिले के प्रबद्ध लोगों ने सुझाव दिया है कि किसी भी धर्मस्थल के खुलने पर अभी स्थिति सामान्य होने तक 12 साल तक छोटे बच्चों और 60 से ऊपर के लोगों को लाने पर मनाही होनी चाहिए । जहां महिलाएं जाती हैं, वहां वृद्ध महिलाओं पर भी यह नियम कड़ाई से लागू होना चाहिए क्योंकि वृद्ध महिलाएं ज्यादा आस्थावान होती हैं और जिद करके मंदिरों में जाती हैं ।
प्रकृति को पसंद नहीं विंध्य-परिपथ- जोग-टोक आदि पर विचार करने वाले कोरोना के भयावह दौर का कारण विंध्याचल में प्रस्तावित विंध्य-परिपथ को भी मान रहे हैं । ऐसे लोगों के मन की धारणा है कि जगन्नियन्ता मां विंध्यवासिनी को यह कत्तई स्वीकार नहीं था कि पवित्र विंध्याचल मंदिर पर तोड़फोड़ के लिए हथौड़ा, जेसीबी चले । अब बदले हालात में तो नहीं लगता कि अगले 5-7 सालों में इस परियोजना पर काम शुरू हो सके ।
© सलिल पांडेय, मिर्जापुर ।
मिर्जापुर। आकाश तो 8 जून को बिल्कुल साफ है और चटक धूप खिली है लेकिन धर्मस्थलों पर संशय के बादल सिर्फ विंध्याचल ही नहीं पूरे प्रदेश पर उमड़-घुमड़ के मंडरा रहे हैं । कभी एक तेज हवा का झोंका सन्देश दे जाता है कि 8 जून को धर्मस्थलों से पूजा-पाठ, घण्टा-घड़ियाल की गूंज/ मस्जिदों से अजान, गुरुद्वारों और गिरिजाघरों से प्रार्थना के स्वर सुनाई पड़ेंगे तो कभी यही बादल गरजते हैं कि सावधान ! अभी इतनी जल्दी भी क्या है ?,
विंध्याचल में बैठक के चन्द घण्टे पहले की स्थिति- यहां 8 जून को अपराह्न एक बजे विंध्यविकास परिषद से नाता रखने वाले नवरत्न पण्डों की संजीदगी भाव से भरे DM श्री सुशील कुमार पटेल के साथ मिलकर कोरोना विष बाहर करने के लिए वैचारिक मंथन होगा । उसके पहले पण्डा समाज के ये नवरत्न सुझाव-सलाह का मशविदा बनाने में लगे हैं । चूंकि पण्डा समाज पहले से बोल चुका है कि वह मंदिर खोलने को लेकर उतावला नहीं है लिहाजा उसी रणनीति पर समाज अभी भी कायम दिख रहा है ।
प्रबद्ध लोगों के सुझाव- नगर/जिले के प्रबद्ध लोगों ने सुझाव दिया है कि किसी भी धर्मस्थल के खुलने पर अभी स्थिति सामान्य होने तक 12 साल तक छोटे बच्चों और 60 से ऊपर के लोगों को लाने पर मनाही होनी चाहिए । जहां महिलाएं जाती हैं, वहां वृद्ध महिलाओं पर भी यह नियम कड़ाई से लागू होना चाहिए क्योंकि वृद्ध महिलाएं ज्यादा आस्थावान होती हैं और जिद करके मंदिरों में जाती हैं ।
प्रकृति को पसंद नहीं विंध्य-परिपथ- जोग-टोक आदि पर विचार करने वाले कोरोना के भयावह दौर का कारण विंध्याचल में प्रस्तावित विंध्य-परिपथ को भी मान रहे हैं । ऐसे लोगों के मन की धारणा है कि जगन्नियन्ता मां विंध्यवासिनी को यह कत्तई स्वीकार नहीं था कि पवित्र विंध्याचल मंदिर पर तोड़फोड़ के लिए हथौड़ा, जेसीबी चले । अब बदले हालात में तो नहीं लगता कि अगले 5-7 सालों में इस परियोजना पर काम शुरू हो सके ।
© सलिल पांडेय, मिर्जापुर ।

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