या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ।।
पहले श्लोक में मातारानी से रक्षा की प्रार्थना की गई है कि हमारी शूल से, खड्ग से रक्षा करें साथ ही घण्टा की ध्वनि और धनुष की टँकार से भी हम लोगों की रक्षा करें ।
मां से यह प्रार्थना तभी सफल होगी जब हम जन्म देने वाली मां की त्रैलोक्य सुख की कामना त्याग कर उनकी सेवा-सम्मान करते तो। क्योंकि मातारानी जन्म देने वाली में के रूप में हमारे जीवन में स्थित होती हैं । किसी भी की माँ के लिए असंसदीय शब्दों का प्रयोग न करें ।
खूब दर्शन-पूजन करें और मां को दुःखित तथा पीड़ित करें, इससे अच्छा है कि मातारानी की पूजा-अर्चना ही न करें क्योंकि जीवन में द्वंद्व हमेशा खतरनाक होता है शारीरिक और मानसिक दोनों स्तरों पर ।
सलिल पांडेय, मिर्जापुर ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ।।
पहले श्लोक में मातारानी से रक्षा की प्रार्थना की गई है कि हमारी शूल से, खड्ग से रक्षा करें साथ ही घण्टा की ध्वनि और धनुष की टँकार से भी हम लोगों की रक्षा करें ।
मां से यह प्रार्थना तभी सफल होगी जब हम जन्म देने वाली मां की त्रैलोक्य सुख की कामना त्याग कर उनकी सेवा-सम्मान करते तो। क्योंकि मातारानी जन्म देने वाली में के रूप में हमारे जीवन में स्थित होती हैं । किसी भी की माँ के लिए असंसदीय शब्दों का प्रयोग न करें ।
खूब दर्शन-पूजन करें और मां को दुःखित तथा पीड़ित करें, इससे अच्छा है कि मातारानी की पूजा-अर्चना ही न करें क्योंकि जीवन में द्वंद्व हमेशा खतरनाक होता है शारीरिक और मानसिक दोनों स्तरों पर ।
सलिल पांडेय, मिर्जापुर ।


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