SDM की तैनाती के कार्यकाल में लिए गए निर्णयों व उनके द्वारा किए गए हर कार्य के भ्रष्टाचार की जांच कर कठोर दंड दिया जाना चाहिए-विद्यासागर अवस्थी
रजनीकांत अवस्थी
महराजगंज/रायबरेली: क्षेत्र में अपनी विवादित कार्यशैली के चलते महराजगंज के पूर्व उप जिलाधिकारी विनय कुमार सिंह के विरुद्ध क्षेत्रीय विधायक सहित प्राय: सभी दलों के लोग आजिज आ चुके के थे। उप जिलाधिकारी विनय कुमार सिंह पर संपूर्ण लॉक डाउन के दौरान कथित रूप से व्यापारियों का उत्पीड़न कर भारी मात्रा में धन उगाही करने के आरोप जन जन में चर्चा का विषय बना रहा। चंद दलालों और चाटुकारों से घिरे विनय कुमार सिंह के ऊपर भ्रष्टाचार के कई गंभीर आरोप लगे हैं। जिसकी परतें अब खुलने लगी है।
ज्ञात हो कि, एसडीएम पर सोशल मीडिया पर भ्रष्टाचार के कारनामों की फेहरिस्त उजागर होने के बाद जिला प्रशासन जो पहले से ही एसडीएम विनय कुमार सिंह की कारगुजारी से खिन्न चल रहा था। रातो रात न उनका तबादला किया गया, बल्कि रायबरेली में ही बुलाकर तबादला आदेश उन्हें थमा दिया गया। उनके स्थान पर जिलाधिकारी ने अपने बहुत ही विश्वस्त, अपनी ईमानदारी के लिए चर्चित पीसीएस अफसर विनय मिश्रा को नियुक्ति पत्र देकर वहीं चार्ज दिला दिया।
आपको बता दें कि, चन्द्र पालतू दलालों की सलाह पर कामकाज करने वाले विनय कुमार सिंह के ऊपर लाक डाउन के दौरान गरीबों की मदद के बहाने क्षेत्र भरके संपन्न लोगों व्यापारियों, भट्ठा मालिकों, पेट्रोल पंप मालिकों, जेसीबी मशीन के मालिकों, कंबाइंड मशीन मालिकों के अलावा ग्राम प्रधानों व कोटेदारों से जमकर पैसा वसूला गया था, और उस पैसे का बंदरबांट एसडीएम और उनके गुर्गों ने आपस में कर लिया था।
जिन व्यापारियों ने एसडीएम की फरमाइश पूरी नहीं की थी, तो दलालों के माध्यम से उनके प्रतिष्ठानों पर छापे मारे गए। तालाबंदी की गई। जब व्यापारियों ने पैसा नहीं दिया, तो उन पर लाखों का जुर्माना कर दिए गया। यह सब बातें जब विधायक राम नरेश रावत के संज्ञान में आई, तो उन्होंने जिलाधिकारी से मुलाकात कर एसडीएम की कारगुजारी की जानकारी डीएम को दी थी, और जिलाधिकारी ने विधायक को आश्वस्त किया था कि, वह पूरे मामले की गोपनीय ढंग से जांच कराएंगे।
फिलहाल उन्होंने यानी (डीएम सुभ्रा सक्सेना) ने मामले में प्रशासन की छीछालेदर होते देख सख्त रवैया अपनाया और तत्काल प्रभाव से एसडीएम विनय कुमार सिंह का स्थानांतरण कर उन्हें किसी तहसील में न भेजकर अतिरिक्त मजिस्ट्रेट के पद पर ट्रांसफर कर दिया है।
गोपनीय सूत्रों से पता चला है कि, जिलाधिकारी का रवैया इतना सख्त है कि, उन्होंने एक बड़े अधिकारी को एसडीएम के कारनामों की जांच करने का आदेश भी दे दिया है। इस मामले में जब क्षेत्रीय विधायक रामनरेश रावत से वार्ता की गई, तो उन्होंने बताया कि, योगी सरकार ने भ्रष्टाचार के मामले में जीरो टोलरेंस की नीति अपनाई है। उसी के तहत शिकायतें मिलने पर उन्होंने पाया कि, एसडीएम गलत कामों में लिप्त है। इसीलिए जिलाधिकारी से मिलकर उनके विरुद्ध शिकायत की थी।
क्षेत्रीय विधायक रामनरेश रावत ने जिलाधिकारी द्वारा फौरन एक्शन लिए जाने के मामले में संतोष जताते हुए कहा है कि, एसडीएम के सभी काले कारनामों का कच्चा चिट्ठा खोलना चाहिए और सक्षम अधिकारी के द्वारा जांच करवा कर इनके विरुद्ध नियमानुसार कड़ी से कड़ी कार्यवाही की जानी चाहिए। उन्होंने अन्य अधिकारियों को भी सचेत किया है कि, जनता के हितों के विरुद्ध काम करने वाले भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों की शिकायत मिलने पर वह जांच करा कर ऐसे अधिकारियों को दंडित कर आएंगे तथा बछरावां विधानसभा में भ्रष्टाचारी नकारे और चापलूस पसंद अधिकारियों को रहने नहीं दिया जाएगा।
इसी क्रम में भाजपा के पूर्व जिला उपाध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता विद्यासागर अवस्थी ने कहा कि, विधायक द्वारा उप जिलाधिकारी के विरुद्ध लिए गए एक्शन तथा जिलाधिकारी द्वारा ट्रांसफर किए जाने व भ्रष्टाचार के मामलों की जांच कराने के मामले पर खुशी जताते हुए कहां है कि, जिलाधिकारी ने बछरावां क्षेत्र की जनता को और लूटे जाने से बचा लिया है। उन्होंने यह भी कहा कि, उप जिलाधिकारी की तैनाती के कार्यकाल के दौरान लिए गए निर्णय और उनके द्वारा किए गए भ्रष्टाचार के हर मामले की जांच कर उन्हें कठोर दंड दिया जाना चाहिए।
रजनीकांत अवस्थी
महराजगंज/रायबरेली: क्षेत्र में अपनी विवादित कार्यशैली के चलते महराजगंज के पूर्व उप जिलाधिकारी विनय कुमार सिंह के विरुद्ध क्षेत्रीय विधायक सहित प्राय: सभी दलों के लोग आजिज आ चुके के थे। उप जिलाधिकारी विनय कुमार सिंह पर संपूर्ण लॉक डाउन के दौरान कथित रूप से व्यापारियों का उत्पीड़न कर भारी मात्रा में धन उगाही करने के आरोप जन जन में चर्चा का विषय बना रहा। चंद दलालों और चाटुकारों से घिरे विनय कुमार सिंह के ऊपर भ्रष्टाचार के कई गंभीर आरोप लगे हैं। जिसकी परतें अब खुलने लगी है।
ज्ञात हो कि, एसडीएम पर सोशल मीडिया पर भ्रष्टाचार के कारनामों की फेहरिस्त उजागर होने के बाद जिला प्रशासन जो पहले से ही एसडीएम विनय कुमार सिंह की कारगुजारी से खिन्न चल रहा था। रातो रात न उनका तबादला किया गया, बल्कि रायबरेली में ही बुलाकर तबादला आदेश उन्हें थमा दिया गया। उनके स्थान पर जिलाधिकारी ने अपने बहुत ही विश्वस्त, अपनी ईमानदारी के लिए चर्चित पीसीएस अफसर विनय मिश्रा को नियुक्ति पत्र देकर वहीं चार्ज दिला दिया।
आपको बता दें कि, चन्द्र पालतू दलालों की सलाह पर कामकाज करने वाले विनय कुमार सिंह के ऊपर लाक डाउन के दौरान गरीबों की मदद के बहाने क्षेत्र भरके संपन्न लोगों व्यापारियों, भट्ठा मालिकों, पेट्रोल पंप मालिकों, जेसीबी मशीन के मालिकों, कंबाइंड मशीन मालिकों के अलावा ग्राम प्रधानों व कोटेदारों से जमकर पैसा वसूला गया था, और उस पैसे का बंदरबांट एसडीएम और उनके गुर्गों ने आपस में कर लिया था।
जिन व्यापारियों ने एसडीएम की फरमाइश पूरी नहीं की थी, तो दलालों के माध्यम से उनके प्रतिष्ठानों पर छापे मारे गए। तालाबंदी की गई। जब व्यापारियों ने पैसा नहीं दिया, तो उन पर लाखों का जुर्माना कर दिए गया। यह सब बातें जब विधायक राम नरेश रावत के संज्ञान में आई, तो उन्होंने जिलाधिकारी से मुलाकात कर एसडीएम की कारगुजारी की जानकारी डीएम को दी थी, और जिलाधिकारी ने विधायक को आश्वस्त किया था कि, वह पूरे मामले की गोपनीय ढंग से जांच कराएंगे।
फिलहाल उन्होंने यानी (डीएम सुभ्रा सक्सेना) ने मामले में प्रशासन की छीछालेदर होते देख सख्त रवैया अपनाया और तत्काल प्रभाव से एसडीएम विनय कुमार सिंह का स्थानांतरण कर उन्हें किसी तहसील में न भेजकर अतिरिक्त मजिस्ट्रेट के पद पर ट्रांसफर कर दिया है।
गोपनीय सूत्रों से पता चला है कि, जिलाधिकारी का रवैया इतना सख्त है कि, उन्होंने एक बड़े अधिकारी को एसडीएम के कारनामों की जांच करने का आदेश भी दे दिया है। इस मामले में जब क्षेत्रीय विधायक रामनरेश रावत से वार्ता की गई, तो उन्होंने बताया कि, योगी सरकार ने भ्रष्टाचार के मामले में जीरो टोलरेंस की नीति अपनाई है। उसी के तहत शिकायतें मिलने पर उन्होंने पाया कि, एसडीएम गलत कामों में लिप्त है। इसीलिए जिलाधिकारी से मिलकर उनके विरुद्ध शिकायत की थी।
क्षेत्रीय विधायक रामनरेश रावत ने जिलाधिकारी द्वारा फौरन एक्शन लिए जाने के मामले में संतोष जताते हुए कहा है कि, एसडीएम के सभी काले कारनामों का कच्चा चिट्ठा खोलना चाहिए और सक्षम अधिकारी के द्वारा जांच करवा कर इनके विरुद्ध नियमानुसार कड़ी से कड़ी कार्यवाही की जानी चाहिए। उन्होंने अन्य अधिकारियों को भी सचेत किया है कि, जनता के हितों के विरुद्ध काम करने वाले भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों की शिकायत मिलने पर वह जांच करा कर ऐसे अधिकारियों को दंडित कर आएंगे तथा बछरावां विधानसभा में भ्रष्टाचारी नकारे और चापलूस पसंद अधिकारियों को रहने नहीं दिया जाएगा।
इसी क्रम में भाजपा के पूर्व जिला उपाध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता विद्यासागर अवस्थी ने कहा कि, विधायक द्वारा उप जिलाधिकारी के विरुद्ध लिए गए एक्शन तथा जिलाधिकारी द्वारा ट्रांसफर किए जाने व भ्रष्टाचार के मामलों की जांच कराने के मामले पर खुशी जताते हुए कहां है कि, जिलाधिकारी ने बछरावां क्षेत्र की जनता को और लूटे जाने से बचा लिया है। उन्होंने यह भी कहा कि, उप जिलाधिकारी की तैनाती के कार्यकाल के दौरान लिए गए निर्णय और उनके द्वारा किए गए भ्रष्टाचार के हर मामले की जांच कर उन्हें कठोर दंड दिया जाना चाहिए।

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