युवा लेखिका अर्चना सैनी की कलम से सरहद में तैनात भाईयो के लिए राखी और पाती


 📿 राखी और  पाती📜
ना तेरे पंख ना जाने कहना
 फिर भी तुझसे कहती बहना
जो भी मैं तुझको बतलाती
लिखने पर बन जाती पाती
 अपने मन का देकर भेद
तुझे रही सरहद पर भेज
भाई के हाथों में जाकर
 पहले उसका हाल जानना
खैर कुशल सब पूछ कर उससे
 फिर तुम घर का हाल बताना
बाबा ने आशीष भेजाया
ढेरों प्यार भेजती दादी
 पापा ने आशीष प्यार  संग
 भेजा एक संदेशा
 शिक्षा सेहत और समय का
 रखना ख्याल हमेशा
ईर्ष्या द्वेष नसे झगड़े का
 कभी न करना पेसा
 बहनों ने कच्चे धागे में
 प्यार का रंग मिलाया
 रक्षाबंधन के अवसर पर
  धागा वही भेजाया
 यह धागा रिश्तो का बंधन
 प्रतिवर्ष है बांधा जाता
 भाई बहन के प्यार को यह
 और भी मजबूत बनाता
 बहनों की है दुआ
हाथ यह कभी थके ना हारे
 कुछ भी हो  नामुमकिन ना
 तू हर मंजिल को पा ले
 दुश्मन की औकात नहीं कुछ
 शेर है भाई हमारे
  दोनों  बहनों की जिद को
 भाई पूरी करना होगा
 अपने प्यारे होठों पर
 मुस्कान जरा भरना होगा
 मनसे करना याद जरा
 भाई हमको आंख मूंदकर
 मन ही मन में आ जाएंगे
 भाई हम सब लोग समिट कर 
 बातें तो है और बहुत
 पाती  का दामन छोटा
 कुछ शब्दों में ही लिख डाला
 सबके मन का डाटा
सबकी दुआ रहो खुश तुम
 गम रहे हमेशा दूर
 अब रखती हूं कलम को
 पाती जाना है दूर
 आते-आते कहीं आप तक
 शब्द न जाए भूल
                 ✒️लेखिका  अर्चना सैनी✒️

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