मुख्य सचिव के दौरे को हल्का कवरेज पत्रकारिता की कमजोरी!
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मिर्जापुर । बदलते दौर में समाचारों में हर पल कुछ नया खोजकर प्रस्तुत करने से आकर्षण बना रहता है अन्यथा सोशल मीडिया पर देखी-पढ़ी खबरें जब मुख्य इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया में प्रदर्शित/छपती हैं तो उस पर दर्शक/पाठक रुचि नहीं लेता है। इससे न्यूज चैनलों को देखने तथा अखबारों के पढ़ने की संख्या पर असर पड़ता है।
मुख्य सचिव का आगमन- जिले में रविवार, 26 जुलाई को प्रदेश के मुख्य सचिव श्री राजेन्द्र कुमार तिवारी का आगमन हुआ। अल्पकाल के लिए सही (3 माह) वे लगभग 23-24 वर्ष पहले यहां DM थे । कोरोनाकाल में उनका आगमन हुआ। किसी मुख्यसचिव का स्वतंत्र रूप से आगमन लंबे दिनों बाद हुआ लेकिन खबरें जो रविवार को सोशलमीडिया खासकर ह्वाट्सएप ग्रुप पर कई ग्रुपों में पढ़ी जा चुकी थी, वही प्रकाशित हुईं । वह भी बहुत सीमित रूप में ।
विन्ध्याचल में दर्शन- ह्वाट्सएप पर प्रसारित एक खबर कि 'मुख्य सचिव गर्भगृह में गए' को कतिपय अखबारों ने ज्यों का त्यों उतार दिया । जिसने भी यह खबर प्रसारित की, उसे मालूम नहीं कि मुख्य सचिव का पद संवैधानिक दृष्टि से कितना महत्त्वपूर्ण है । कोई घटना होती है तो सरकार की ओर से प्रथम जवाबदेही मुख्य सचिव की होती है। ऐसी स्थिति में गर्भगृह में जाकर व्यवस्था देखने में जिम्मेदार पदों को रोका नहीं जा सकता ।
प्रेस से बात भी की थी- मुख्य सचिव ने प्रेस से जब बात की तो उस वक्त कोरोना रोकथाम के इंतजाम को लेकर होमवर्क पहले से होना चाहिए था। मुख्यमंत्री ने ऑनलाइन RT-PCR लैब का शुभारंभ 15 दिनों पहले कर दिया था लेकिन वह कब से कार्य करेगा, इस पर प्रश्न के माध्यम से जानकारी जनता चाह रही थी, लेकिन ऐसी कोई जानकारी नहीं आ सकी।
इसके अलावा सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और अन्य स्टाफ की भारी कमी, फील्ड में जाकर स्वैब टेस्ट टीम की वास्तविक संख्या मण्डल के तीनों जनपदों में कितनी होनी चाहिए, इसके बारे में सवाल उठते तो संभव है कि चिकित्सकीय स्टाफ में जो कमी है, वह दूर होती।
कुछ अखबारों से कोई मतलब नहीं- सोमवार के कतिपय अखबारों को देखकर लगा कि मुख्य सचिव के आगमन से वे अनजान रहे। जबकि ऐसे अखबार के लोग गिफ्ट लेने के कार्यक्रम में, वीडियो कांफ्रेंसिंग आदि में बैठने के लिए आकाश-पाताल एक कर देते हैं ।
कोरोना के अलावा नगर के शास्त्री सेतु की मरम्मत, इस पर 6 लेन पुल, इंजीनियरिंग कॉलेज की शुरुआत, मनरेगा श्रमिकों, प्रवासी लोगों की समस्या, फीस को लेकर अभिभावक-स्कूल प्रबंध तंत्र में आए दिन विवाद, कोरोना के चलते कार्पेट तथा बर्तन उद्योग में गिरावट और उससे बचाने की सरकारी पहल, खनन के मामले में होने वाली दुर्घटनाओं पर रोक आदि पर मुख्य सचिव का ध्यान आकर्षित किया जाना चाहिए था।
कोई जनप्रतिनिधि क्यों नहीं मिला ?- यह प्रश्न सुर्खियों में होना चाहिए था कि जिले में मुख्य सचिव के आगमन पर कोई जनप्रतिनिधि उनसे क्यों नहीं मिला ? जबकि सभी सत्ता पक्ष के है । बहराल ह्वाट्सएप की फोटोकॉपी बनाने से पाठकीयता पर असर पड़ेगा ।
©सलिल पांडेय, मिर्जापुर।
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मिर्जापुर । बदलते दौर में समाचारों में हर पल कुछ नया खोजकर प्रस्तुत करने से आकर्षण बना रहता है अन्यथा सोशल मीडिया पर देखी-पढ़ी खबरें जब मुख्य इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया में प्रदर्शित/छपती हैं तो उस पर दर्शक/पाठक रुचि नहीं लेता है। इससे न्यूज चैनलों को देखने तथा अखबारों के पढ़ने की संख्या पर असर पड़ता है।
मुख्य सचिव का आगमन- जिले में रविवार, 26 जुलाई को प्रदेश के मुख्य सचिव श्री राजेन्द्र कुमार तिवारी का आगमन हुआ। अल्पकाल के लिए सही (3 माह) वे लगभग 23-24 वर्ष पहले यहां DM थे । कोरोनाकाल में उनका आगमन हुआ। किसी मुख्यसचिव का स्वतंत्र रूप से आगमन लंबे दिनों बाद हुआ लेकिन खबरें जो रविवार को सोशलमीडिया खासकर ह्वाट्सएप ग्रुप पर कई ग्रुपों में पढ़ी जा चुकी थी, वही प्रकाशित हुईं । वह भी बहुत सीमित रूप में ।
विन्ध्याचल में दर्शन- ह्वाट्सएप पर प्रसारित एक खबर कि 'मुख्य सचिव गर्भगृह में गए' को कतिपय अखबारों ने ज्यों का त्यों उतार दिया । जिसने भी यह खबर प्रसारित की, उसे मालूम नहीं कि मुख्य सचिव का पद संवैधानिक दृष्टि से कितना महत्त्वपूर्ण है । कोई घटना होती है तो सरकार की ओर से प्रथम जवाबदेही मुख्य सचिव की होती है। ऐसी स्थिति में गर्भगृह में जाकर व्यवस्था देखने में जिम्मेदार पदों को रोका नहीं जा सकता ।
प्रेस से बात भी की थी- मुख्य सचिव ने प्रेस से जब बात की तो उस वक्त कोरोना रोकथाम के इंतजाम को लेकर होमवर्क पहले से होना चाहिए था। मुख्यमंत्री ने ऑनलाइन RT-PCR लैब का शुभारंभ 15 दिनों पहले कर दिया था लेकिन वह कब से कार्य करेगा, इस पर प्रश्न के माध्यम से जानकारी जनता चाह रही थी, लेकिन ऐसी कोई जानकारी नहीं आ सकी।
इसके अलावा सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और अन्य स्टाफ की भारी कमी, फील्ड में जाकर स्वैब टेस्ट टीम की वास्तविक संख्या मण्डल के तीनों जनपदों में कितनी होनी चाहिए, इसके बारे में सवाल उठते तो संभव है कि चिकित्सकीय स्टाफ में जो कमी है, वह दूर होती।
कुछ अखबारों से कोई मतलब नहीं- सोमवार के कतिपय अखबारों को देखकर लगा कि मुख्य सचिव के आगमन से वे अनजान रहे। जबकि ऐसे अखबार के लोग गिफ्ट लेने के कार्यक्रम में, वीडियो कांफ्रेंसिंग आदि में बैठने के लिए आकाश-पाताल एक कर देते हैं ।
कोरोना के अलावा नगर के शास्त्री सेतु की मरम्मत, इस पर 6 लेन पुल, इंजीनियरिंग कॉलेज की शुरुआत, मनरेगा श्रमिकों, प्रवासी लोगों की समस्या, फीस को लेकर अभिभावक-स्कूल प्रबंध तंत्र में आए दिन विवाद, कोरोना के चलते कार्पेट तथा बर्तन उद्योग में गिरावट और उससे बचाने की सरकारी पहल, खनन के मामले में होने वाली दुर्घटनाओं पर रोक आदि पर मुख्य सचिव का ध्यान आकर्षित किया जाना चाहिए था।
कोई जनप्रतिनिधि क्यों नहीं मिला ?- यह प्रश्न सुर्खियों में होना चाहिए था कि जिले में मुख्य सचिव के आगमन पर कोई जनप्रतिनिधि उनसे क्यों नहीं मिला ? जबकि सभी सत्ता पक्ष के है । बहराल ह्वाट्सएप की फोटोकॉपी बनाने से पाठकीयता पर असर पड़ेगा ।
©सलिल पांडेय, मिर्जापुर।


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