अमेठी की रहने वाली मां बेटी ने विधानसभा के सामने किया आत्मदाह का प्रयास।। Lucknow news ।।

रजनीकांत अवस्थी
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार जहां प्रदेश की कानून व्यवस्था को लेकर प्रदेश के प्रत्येक जनपद को लगातार निर्देश जारी कर रही है, कि प्रत्येक पीड़ित को न्याय मिले। लेकिन अमेठी जनपद है, जहां की पुलिस व प्रसासनिक अधिकारी भी पीड़ित की नहीं सुनते हैं। जिसके बाद न्याय के लिए पीड़ित को आखरी चौखट लखनऊ विधानसभा के आगे पहुंचना पड़ता है, और अपनी  जिंदगी को भी खत्म करने का कदम उठाना पड़ता है।
     आपको बता दें कि, ऐसा ही एक मामला आज  लखनऊ विधानसभा के सामने आया। जहां अमेठी के जामो निवासी मां और बेटी ने इसलिए अपने आप को आग लगा ली, क्योंकि अमेठी में उनको न्याय नहीं मिला और न्याय की हर चौखट पर दौड़ने के बाद हार मानकर लखनऊ विधानसभा के आगे अपने शरीर में आग लगाकर जीवन लीला समाप्त करने की कोशिश की।
      विदित हो कि, कोरोना महामारी काल में थाने से लेकर एसपी अमेठी और आईजी रेंज अयोध्या ऑफिस तक पीड़ित  महिला न्याय के लिए गुहार लगाती रही। लेकिन इंसाफ नही मिला। जहां बीते 6 जुलाई को मां बेटी आईजी रेंज अयोध्या कार्यालय में पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई थी। जमीनी विवाद को लेकर न्याय मांगा था, लेकिन पीड़िता को न्याय नहीं मिला।      
      अयोध्या मंडल के ही अमेठी जनपद की रहने वाली है पीड़ित न्याय न मिलने से आहत मां-बेटी ने विधानसभा के सामने आत्मदाह का प्रयास किया। सूचना पर आनन फानन पहुंची हजरतगंज पुलिस ने एक कम्बल से आग बुझाई, फिर पीड़िता को  ले जाकर सिविल हॉस्पिटल में भर्ती कराया। लोक भवन और विधानसभा की सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मी खड़े देखते रहे, और सुरक्षाकर्मियों की आंख के सामने महिला ने केरोसिन डालकर आग लगा ली।
     बताया जाता है कि मामला नाली के विवाद का है। अमेठी के जामो की रहने वाली पीड़िता अपनी बेटी के साथ जहां विधानसभा के सामने आत्मदाह का प्रयास किया तो वहीं महिला साफिया ने पुलिस पर गंभीर आरोप भी लगाए हैं। सफिया 80 से 90 फीसदी, तो वहीं उनकी बेटी गुड़िया 40 से 45 फीसदी जली हैं। दबंगों की करतूत और पुलिस की कार्यशैली से परेशान होकर अमेठी की रहने वाली मां-बेटी ने शुक्रवार को राजधानी लखनऊ स्थित लोकभवन के सामने अपने आप को आग के हवाले कर दिया। आग से झुलसी मां की हालत नाजुक बताई जा रही है।।  
       अब आपको यहां यह बताना जरूरी हो गया है कि, बेटी गुड़िया का आरोप है कि, बीते 9 मई को उनका अपने पड़ोसी अर्जुन साहू से नाली का विवाद हुआ था। जिसके बाद दबंगों ने उसकी मां पर हमला कर दिया था। विरोध करने पर उसकी भी पिटाई कर दी थी। गुड़िया जब जामो थाना पहुंची, तो दबंग वहां भी आ गए और पुलिस के सामने उसे थाने से बाहर भगाने लगे। उच्चाधिकारियों के हस्तक्षेप पर आरोपितों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर लिया गया था। जिसके बाद दोनों घर वापस आ गई थी। आरोप है कि, गुरुवार देर रात में हमलावर फिर उनके घर पहुंच गए और लाठी डंडे से मां-बेटी की पिटाई कर दी। कार्रवाई ना होने से नाराज मां-बेटी शुक्रवार को राजधानी पहुंची और लोक भवन के सामने दोनों ने खुद को आग लगाकर आत्मदाह करने की कोशिश की।
        उधर गुड़िया की तहरीर पर जामो थाने में अर्जुन साहू समेत चार लोगों के खिलाफ 323, 354 का मुकदमा दर्ज हुआ था। इतना ही नहीं, विपक्षी अर्जुन साहू की तहरीर पर गुड़िया पर धारा 323, 452, 308 का मुकदमा दर्ज हुआ था। दो दिन पहले गौरीगंज सीओ अर्पित कपूर ने दोनों माँ बेटी का बयान दर्ज किया था। बताया ये भी जा रहा है कि, पीड़ित महिला अमेठी डीएम और एसपी से अब तक नहीं मिली है। कुछ दिन पहले ही पीड़िता महिला ने आईजी अयोध्या से भी न्याय की गुहार लगाई थी। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की छानबीन कर रही है।
      वहीं अमेठी से चलकर-लखनऊ विधानसभा के सामने माँ बेटी द्वारा आत्महत्या के प्रयास के मामले पर, कांग्रेस एमएलसी दीपक सिंह ने प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए है। दीपक सिंह ने वीडियो जारी कर बीजेपी और सांसद स्मृति ईरानी पर भी सवाल खड़े किए है। स्मृति ईरानी वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिये जनसुनवाई का स्वांग रच रही है। स्मृति वीडियो कांफ्रेंसिंग नही वीडियोगेम खेल रही है। अमेठी की जनता इस आत्महत्या के प्रयास पर जवाब चाहती है। 
     वहीं अमेठी पुलिस अधिक्षक ख्याति गर्ग ने पीड़िता के घर पहुंच कर मामले की जांच करते हुए थानाध्यक्ष जामो रत्न सिंह व एसआई को निलंबित कर दिया है और मामले की जांच एएसपी को सौपी हैं। वहीं इस मामले पर महात्मा सिंह एसडीएम गौरीगंज से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि, आबादी की जमीन व पानी की निकासी को लेकर मामला चल रहा था, मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस द्वारा मामले की जांच की जा रही थी।
      इस मामले पर जब विजय विक्रम सिंह सदस्य पूर्वांचल विकास बोर्ड उत्तर प्रदेश सरकार से बात की गई, तो उनका कहना था कि, इस मामले की जांच की जायेगी। जो भी अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाया जायेगा उसे बख्शा नहीं जायेगा।

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