सुभाष पांडेय (वरिष्ठ संवाददाता)
महराजगंज/रायबरेली: इस बार का मौसम भी अजब गजब है। जिसका परिणाम वृक्षों और पौधों पर दिखाई दे रहा है। जुलाई माह बीतने को है। लेकिन आयुर्वेद के लिए महाऔषधि कहे जाने वाले जामुन और नीम के पेड़ों पर फल ही नहीं आए हैं। जिससे आयुर्वेद के चिकित्सक भी खासे हैरान है। बड़े बुजुर्गों का कहना है कि, उनकी जिंदगी में ऐसा वाकिया पहली बार हुआ है।
आपको बता दें कि, नीम और जामुन दो ऐसे औषधि गुणों वाले पेड़ हैं। जिनका भारतवर्ष में न केवल धार्मिक बल्कि चिकित्सीय दृष्टि से भी बहुत बड़ा महत्व है। नीम के पेड़ के बारे में तो चर्चा रही है कि, अमेरिका जैसे देश नीम के गुणों को लेकर इसको पेटेंट कराने का भी प्रयास कर चुके हैं। वहीं जामुन बहु उपयोगी वृक्ष है। जामुन की पत्तियों से लेकर गुठलियों तक का शुगर जैसे रोगों के लिए दवाएं तैयार की जाती है। यही नहीं जामुन का सिरका भी उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर बनाया जाता है। यह भी एक महा औषधि मानी जाती है।
इस बार दूर-दूर तक देखने पर जामुन के पेड़ में न तो फूल ही आए, इससे लोग हैरान हैं। वहीं दूसरी ओर नीम जिसे कृमि नाशक माना जाता है। नीम के पेड़ से निकले फूल से लेकर फल तक का बहुत बड़ा उपयोग है। नीम की खली को उन पेड़ों के जड़ों में डाला जाता है, जिनमें दीमक जैसे रोग लगते हैं। वहीं नीम की गूदी का भी आवश्यक कार्यों में उपयोग होता है। इस बार नीम के पेड़ों पर कहीं-कहीं फूल तो बहुत आया था, लेकिन फल देखने को नही मिल रहे हैं। इससे लोग हैरत में हैं।
इस बारे में रिटायर्ड एडीओ कृषि आरपी सिंह से पूछा गया, तो उन्होंने बताया कि, ऐसा कभी नहीं होता रहा है, लेकिन इस बार मौसम का मिजाज बनता बिगड़ता रहा है। चिकित्सक भी हैरान है। बड़े बुजुर्गों का कहना है कि, उनकी जिंदगी में ऐसा वाकिया पहली बार हुआ है।
विदित हो कि, नीम और जामुन औषधीय गुणों वाले हैं। जिनका भारतवर्ष में न केवल धार्मिंक बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी बड़ा महत्व तो है ही, किन्तु नींम के बारे में तो चर्चा रही है कि, अमेरिका जैसे देश नीम के गुणों को लेकर उसको पेटेन्ट कराने का प्रयास भी किया है। जामुन की पत्तियों से लेकर गुठलियों तक का मधुमेह जैसे रोगों के लिए दवाएं तैयार की जाती है। इस जामुन का सिरका भी उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर बनाया जाता है। इस बार दूर-दूर तक देखने पर भी जामुन और नीम के पेड़ों पर कहीं भी फल नहीं दिखाई दे रहे हैं। नीम के पेड़ों पर फूल तो बहुत आया था, परंतु फल किसी भी पेड़ पर नहीं मिला। वहीं इस बार जामुन के पेड़ों पर तो फूल ही नहीं आए, फल लगने का सवाल ही नहीं उठता।
इस बारे में जानकारी करने पर कृषि विभाग के रिटायर्ड सहायक विकास अधिकारी रामप्यारे सिंह मल का कहना है कि, 2020 में पूरा साल एक तो पानी बरसता रहा, दूसरे संपूर्ण लॉकडाउन के दौरान मौसम एक जैसा ही दिखा, जब इन पेड़ों पर फूल आने चाहिए, फल लगने चाहिए, उस दौरान तापमान कम रहा। यह वजह हो सकती है कि, जामुन पर फूल नहीं आए और नीम पर फल नहीं लगे। वहीं दूसरी ओर बुजुर्ग बाल किशोर त्रिपाठी का कहना है कि, जबसे उन्होंने होश संभाला है, यह पहली बार देखा गया है कि, न तो नीम पर फल आए हैं और ना ही जामुन में फल फूल या फल लगें है। वहीं मऊ गरबी के रहने वाले अधिवक्ता संघ के शिवसागर अवस्थी ने बताया कि, उन्होंने भी इस तरह के वाकिये को पहली बार देखा है, जबकि उनके पास जामुन और नीम के पर्याप्त पेड़ हैं। वहीं पारियावा गांव के रहने वाले बुधई पासी ने भी बताया कि, वह दूर दूर तक घूम कर आए हैं। उन्हें पूरे इलाके में नीम और जामुन के पेड़ों पर फल नहीं मिले हैं।
वहीं आयुर्वेदिक चिकित्सक मृत्युंजय त्रिपाठी ने बताया कि, आयुर्वेद में नीम और जामुन के फलों का बहुत महत्व है। विशेषकर अवध क्षेत्र के अंदर इन पेड़ों का फल अत्यंत ही उत्तम माना गया है। अब इस बार इन फलों के उपलब्ध न होने से आयुर्वेदिक दवाओं के निर्माण में दिक्कत आएगी।
©सुभाष पांडेय (वरिष्ठ संवाददाता)
महराजगंज/रायबरेली: इस बार का मौसम भी अजब गजब है। जिसका परिणाम वृक्षों और पौधों पर दिखाई दे रहा है। जुलाई माह बीतने को है। लेकिन आयुर्वेद के लिए महाऔषधि कहे जाने वाले जामुन और नीम के पेड़ों पर फल ही नहीं आए हैं। जिससे आयुर्वेद के चिकित्सक भी खासे हैरान है। बड़े बुजुर्गों का कहना है कि, उनकी जिंदगी में ऐसा वाकिया पहली बार हुआ है।
आपको बता दें कि, नीम और जामुन दो ऐसे औषधि गुणों वाले पेड़ हैं। जिनका भारतवर्ष में न केवल धार्मिक बल्कि चिकित्सीय दृष्टि से भी बहुत बड़ा महत्व है। नीम के पेड़ के बारे में तो चर्चा रही है कि, अमेरिका जैसे देश नीम के गुणों को लेकर इसको पेटेंट कराने का भी प्रयास कर चुके हैं। वहीं जामुन बहु उपयोगी वृक्ष है। जामुन की पत्तियों से लेकर गुठलियों तक का शुगर जैसे रोगों के लिए दवाएं तैयार की जाती है। यही नहीं जामुन का सिरका भी उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर बनाया जाता है। यह भी एक महा औषधि मानी जाती है।
इस बार दूर-दूर तक देखने पर जामुन के पेड़ में न तो फूल ही आए, इससे लोग हैरान हैं। वहीं दूसरी ओर नीम जिसे कृमि नाशक माना जाता है। नीम के पेड़ से निकले फूल से लेकर फल तक का बहुत बड़ा उपयोग है। नीम की खली को उन पेड़ों के जड़ों में डाला जाता है, जिनमें दीमक जैसे रोग लगते हैं। वहीं नीम की गूदी का भी आवश्यक कार्यों में उपयोग होता है। इस बार नीम के पेड़ों पर कहीं-कहीं फूल तो बहुत आया था, लेकिन फल देखने को नही मिल रहे हैं। इससे लोग हैरत में हैं।
इस बारे में रिटायर्ड एडीओ कृषि आरपी सिंह से पूछा गया, तो उन्होंने बताया कि, ऐसा कभी नहीं होता रहा है, लेकिन इस बार मौसम का मिजाज बनता बिगड़ता रहा है। चिकित्सक भी हैरान है। बड़े बुजुर्गों का कहना है कि, उनकी जिंदगी में ऐसा वाकिया पहली बार हुआ है।
विदित हो कि, नीम और जामुन औषधीय गुणों वाले हैं। जिनका भारतवर्ष में न केवल धार्मिंक बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी बड़ा महत्व तो है ही, किन्तु नींम के बारे में तो चर्चा रही है कि, अमेरिका जैसे देश नीम के गुणों को लेकर उसको पेटेन्ट कराने का प्रयास भी किया है। जामुन की पत्तियों से लेकर गुठलियों तक का मधुमेह जैसे रोगों के लिए दवाएं तैयार की जाती है। इस जामुन का सिरका भी उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर बनाया जाता है। इस बार दूर-दूर तक देखने पर भी जामुन और नीम के पेड़ों पर कहीं भी फल नहीं दिखाई दे रहे हैं। नीम के पेड़ों पर फूल तो बहुत आया था, परंतु फल किसी भी पेड़ पर नहीं मिला। वहीं इस बार जामुन के पेड़ों पर तो फूल ही नहीं आए, फल लगने का सवाल ही नहीं उठता।
इस बारे में जानकारी करने पर कृषि विभाग के रिटायर्ड सहायक विकास अधिकारी रामप्यारे सिंह मल का कहना है कि, 2020 में पूरा साल एक तो पानी बरसता रहा, दूसरे संपूर्ण लॉकडाउन के दौरान मौसम एक जैसा ही दिखा, जब इन पेड़ों पर फूल आने चाहिए, फल लगने चाहिए, उस दौरान तापमान कम रहा। यह वजह हो सकती है कि, जामुन पर फूल नहीं आए और नीम पर फल नहीं लगे। वहीं दूसरी ओर बुजुर्ग बाल किशोर त्रिपाठी का कहना है कि, जबसे उन्होंने होश संभाला है, यह पहली बार देखा गया है कि, न तो नीम पर फल आए हैं और ना ही जामुन में फल फूल या फल लगें है। वहीं मऊ गरबी के रहने वाले अधिवक्ता संघ के शिवसागर अवस्थी ने बताया कि, उन्होंने भी इस तरह के वाकिये को पहली बार देखा है, जबकि उनके पास जामुन और नीम के पर्याप्त पेड़ हैं। वहीं पारियावा गांव के रहने वाले बुधई पासी ने भी बताया कि, वह दूर दूर तक घूम कर आए हैं। उन्हें पूरे इलाके में नीम और जामुन के पेड़ों पर फल नहीं मिले हैं।
वहीं आयुर्वेदिक चिकित्सक मृत्युंजय त्रिपाठी ने बताया कि, आयुर्वेद में नीम और जामुन के फलों का बहुत महत्व है। विशेषकर अवध क्षेत्र के अंदर इन पेड़ों का फल अत्यंत ही उत्तम माना गया है। अब इस बार इन फलों के उपलब्ध न होने से आयुर्वेदिक दवाओं के निर्माण में दिक्कत आएगी।
©सुभाष पांडेय (वरिष्ठ संवाददाता)





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