ज्ञान प्रकाश तिवारी
रायबरेली: देश के सभी नागरिक विचार करें! अगर पूरे भारत में ऑनलाइन क्लास हावी हो गई, तो वह दिन दूर नहीं जब देश के सभी स्कूलों में ताले पड़ जाएंगे और मुकेश अंबानी जैसे उद्योगपति ऑनलाइन के माध्यम से ऑनलाइन किताबों के साथ-साथ ऑनलाइन पढ़ाई भी शुरू करवा देंगे, और देश के सभी स्कूल में ताले लग जाएंगे। देश में अध्यापकों की दुर्दशा शुरू हो जाएगी। आज देश में कितने ऐसे बच्चे हैं जिनके पास ऑनलाइन पढ़ाई के लिए मोबाइल है। कितने ऐसे बच्चे हैं जिनके मां बाप महंगे मोबाइल यूज कर रहे हैं। शायद! भारत में बहुत कम लोग होंगे।
भारतवर्ष में 70 से 80 फीसदी मध्यम वर्गीय परिवार है, जो डेली मेहनत मजदूरी करके अपना परिवार चलाते है। वह अपने परिवार को खाना खिलाने और बीमार होने पर दवाई में ही परेशान है। वे अपने बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई कैसे कराएं। ऊपर से स्कूल वाले फीस का दबाव डालते हैं। फीस भी इतनी महंगी की अध्यापक की कमर टूट रही है। कभी अभिभावक एक तरफ स्कूल की फीस भरता है, तो दूसरी तरफ ऑनलाइन पढ़ाई को लेकर विद्यालय द्वारा महंगे मोबाइल लेने के लिए टेंशन दे रहें है।
एक साधारण व्यक्ति कैसे अपने बच्चों को पढ़ाएं इन उद्योगपतियों ने देश को ऑनलाइन का बढ़ावा देकर आम जनमानस की कमर तोड़ दी है। अगर हम अब नहीं जागे, तो अब वह समय आ गया है कि, हिंदुस्तान के सभी स्कूलों में ताले पड़ जाएंगे, और देश की स्थिति गरीब और मध्यमवर्गीय लोगों के लिए खतरे में पड़ जाएगी।
ऑनलाइन क्लासेस: सभी स्कूलों पर ताले लग जाएंगे
सभी स्कूल वालों को यह समझना चाहिए कि, आज आप ऑनलाइन क्लासेस का बहुत ज्यादा समर्थन कर रहे हैं ! कहीं ऐसा ना हो कि, यही ऑनलाइन पढ़ाई आपके गले की हड्डी बन जाए! एक दिन ऐसा आएगा जब अंबानी, अदानी, टाटा, बिरला या कोई और सस्ती ऑनलाइन क्लास लांच कर देगें, तो सभी स्कूलों पर ताले लग जाएंगे! ध्यान रखें एक दिन यह अवश्य आएगा!
फिर मांगना पूरी फीस, बच्चों को घर बैठे पढ़ने की आदत स्कूल वाले डालेंगे और मजे बड़े घराने वाले लेगें। अब वह समय दूर नहीं, जब रिलायंस या कोई और बड़ी कंपनी ऑनलाइन क्लासेस लांच कर देगीं। बेशक कोई भी बड़ी कम्पनी जब सरकार की नीतियों में परिवर्तन करवा कर कम फीस में ऑन लाइन क्लास चलाएगीं (जिसमे देश के जाने माने विशेषज्ञ शिक्षा देंगे) और निजी स्कूलों में ताले लगजाएगें तब इन ऑनलाइन क्लासेस शुरू करने वाले विद्यालयों को समझ आएगा।
आज का फायदा कल का घाटे का सौदा न हो जाय।
बच्चे सिर्फ परीक्षा देने जाएंगे, साल की पूरी पढ़ाई ऑन लाइन होगी! और आगे अभिभावक भी खुश, की बच्चा घर पर ही आंख के सामने पढ़ रहा है, न ड्रेस का झंझट, न टिफ़िन का और न ही ऑटो का खर्च, बस्ते के भारी भरकम बोझ से भी पूरी तरह मुक्ति! स्कूल संचालकों के लिये आज यह सब जरूर सुनहरा स्वप्न लग रहा है, परन्तु यह आनेवाले कल के लिये बहुत बड़ी चुनौती है, और बड़े व्यवसायिक घराने इसे जल्द ही हाथों हाथ अपना लेंगे, क्योंकि इसके लिये जरूरी संसाधन जुटाना उनके लिये कोई बड़ी बात नही है! फिर ये आंदोलन करें या सरकार को कोसे! बस राजनीतिक पार्टीयों की कठपुतलियां बन अपने कर्मो का बोझ खुद ही ढोयेंगें!
© यह लेखक के अपने निजी विचार हैं।

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