स्त्री हूँ मैं
◆हाँ वही जिसे कमजोर समझा गया
बार-बार पुरुषों के पीछे रहना बताया गया
समाज की जंजीरों में जकड़ा गया
रिवाजों की बेड़ियों से बाँधा गया
हाँ वही स्त्री हूँ मैं!
◆जिम्मेदारियों का निर्वहन करने पर भी
चाहरदीवारी में कैद किया गया
सब के नखरे सहने पर भी
शक्तिहीन बताया गया
हाँ वही स्त्री हूँ मैं।
◆गलती न होने पर भी
चुप रहना सिखाया गया
दर्द हो हृदय में हजार
पर मुस्कुराना बताया गया
हाँ वही स्त्री हूँ मैं।
◆सब के नखरे सहे खुशी से
जिम्मेदारियाँ भी निभाई बखूबी मैंने
किन्तु , किया ही है क्या तुमने?
इन्हीं तानों से दुत्कारी गई
हाँ वही स्त्री हूँ मैं।
◆किंतु अब नया है अवतार मेरा
प्राणों से भी प्रिय मुझे
अब स्वाभिमान है मेरा
तोड़ दी है जंजीरें मैंने
आकाश को छूना
ध्येय है मेरा
आत्मनिर्भर स्वावलंबी हूँ मैं
हाँ स्त्री हूँ मैं।
-वर्षा शर्मा
-सुल्तानपुर , उत्तरप्रदेश

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