रजनीकांत अवस्थी
खीरों/रायबरेली: एक ओर जहां केंद्र व राज्य सरकारें गरीबों, असहायो के लिए करोड़ों रुपए की योजनाएं बनाती हैं वहीं दूसरी ओर वह योजनाएं शायद उन तक नहीं पहुंच पाती है, जो सही मायने में उन योजनाओं के पात्र होते हैं।
आपको बता दें कि, मामला रायबरेली जनपद के विकासखंड क्षेत्र खीरों के मटिहन का पुरवा मजरे कमालपुर का है। जहाँ की निवासिनी नीलम पाल पत्नी राकेश पाल का दर्द कोई भी आला अधिकारी अथवा ग्राम प्रधान सुनने को तैयार नहीं है। इस महिला को अभी तक प्रधानमंत्री आवास तक नहीं मिला है। आखिर जिम्मेदार कौन है।
आपको बता दें कि, विगत कई वर्ष से नीलम पाल सरकार की गरीब कल्याणकारी योजनाओं की ओर आश भरी निगाह से देख रही है, कि आखिर उसको कब तक सरकार की योजनाओं का लाभ मिलेगा और कब तक उपेक्षा का शिकार होना पड़ेगा।
जब इस संवाददाता ने नीलम पाल से पूछा कि, आपको सरकार द्वारा दी जा रही किन-किन योजनाओं का लाभ मिला है, तो उसकी आंखों से आंसू छलक पड़े और उसने भर्राई हुई आवाज में बताया कि, उसे अभी तक प्रधानमंत्री आवास भी नहीं मिल पाया है जिसकी उसे दरकार है। हालांकि देखा जाए तो कालोनी लगभग प्रत्येक ग्राम सभा में बनाई गए है, लेकिन इस गरीब और जरूरतमंद महिला को सरकार की गरीब कल्याणकारी योजनाओं का लाभ अभी तक नहीं मिला है और क्यों नहीं मिला यह बहुत बड़ा सवाल विकासखंड मुख्यालय में बैठे उच्चाधिकारियों से जो पात्र लाभार्थियों को दरकिनार करके अपात्रों को सरकार की योजनाओं का लाभ दे रहे हैं जो सही मायने में उन योजनाओं के पात्र ही नहीं है।
सरकार जिन योजनाओं को गरीबों के लिए बनाती है। सही मायने में वह योजनाएं अधिकारियों की खाऊ कमाऊ नीति के चलते गरीबों तक नहीं पहुंच पा रही है। अगर सरकार निष्पक्ष रुप से जांच करा ले, तो हकीकत सामने आ जाएगी। ऐसे में योजनाओं से लाभान्वित होने वाले लाभार्थी या तो पात्र है, या फिर कागजी कोरम झूठा है।

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