"एक - एक से ग्यारह"

■ पकड़ हाथ को बने श्रृंखला, क़ायम हो भाईचारा,

बूँद - बूँद से सागर भरता, एक - एक से ग्यारह ।

◆ जीवन कितना ही दुष्कर हो, धैर्य रखो तुम भाई,

सीख दे रहा 'समय' सभी को, फिर होगी तरुणाई ।

■ कठिन समय का जीवन छोटा, खुशियाँ हैं दीर्घायु,

हुआ कष्ट जब पंख कटे थे, प्रभु की गोद जटायु ।

■ कर्म करो और भाग्य बनाओ, आराध्यों को शीश नवाओ,

'समय' शब्द यदि गए दूर तो, फिर वापस ना मिले बताओ ।

■ है विदेह का जीवन दर्शन, नीर - क्षीर विवेक है साक्षी,

जल में रहकर विरत जलज है, फिर काहे की आपा - धापी ।

■ Written by ~ कमल बाजपेई

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